ग्रेटर नोएडा में ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे (EPE) और यमुना एक्सप्रेसवे को जोड़ने वाले इंटरचेंज का निर्माण पूरा होने वाला है. इसका 80 फीसदी काम पूरा हो चुका है और दिवाली से पहले इसके चालू होने की संभावना है. ऐसे में इस इलाके में रियल एस्टेट डिमांड भी बढ़ने लगी है. रियल एस्टेट डेवलपर्स काउंटी ग्रुप, सिक्का ग्रुप और SKA ग्रुप के अधिकारियों के अनुसार, आवासीय, कारोबार और निवेश के लिहाज से आसपास के इलाकों में आकर्षण बढ़ रहा है और कीमतें भी बढ़ने लगी हैं. कुछ इलाकों में तो महज एक साल में जमीन की वैल्यू डेढ़ से दो गुना हो चुकी हैं.
किसी भी शहर या इलाके के विकास में कनेक्टिविटी की भूमिका बेहद अहम होती है. खासकर रियल एस्टेट में बेहतर सड़क संपर्क से किसी इलाके तक पहुंच आसान होती है और इससे डिमांड बढ़ जाती है.
ग्रेटर नोएडा में अब ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे (EPE) और यमुना एक्सप्रेसवे को जोड़ने वाला इंटरचेंज परियोजना का करीब 80% काम पूरा हो चुका है और निर्माण एजेंसी की ओर से इसी महीने के मध्य तक यानी 15 अक्टूबर तक काम पूरा करने की तैयारी है.
इंटरचेंज शुरू होने के बाद EPE से आने वाले वाहनों के लिए यमुना एक्सप्रेसवे तक पहुंच आसान हो जाएगी. अभी कई वाहनों को यमुना एक्सप्रेसवे तक पहुंचने के लिए अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है.
एक्सप्रेसवे के साथ कैसे बदल जाएगा प्रॉपर्टी मार्केट?
रियल एस्टेट बाजार में किसी इलाके की कीमत सिर्फ वहां बने मकानों या खाली जमीन से तय नहीं होती. जानकारों के अनुसार, कनेक्टिविटी, रोजगार के अवसर, कमर्शियल गतिविधियां, स्कूल, अस्पताल और दूसरी सुविधाएं भी प्रॉपर्टी की मांग को प्रभावित करती हैं.
काउंटी ग्रुप के निदेशक अमित मोदी का कहना है कि कनेक्टिविटी इंफ्रास्ट्रक्चर किसी क्षेत्र के विकास की बुनियाद तैयार करता है. EPE-यमुना इंटरचेंज जैसे प्रोजेक्ट से पश्चिमी NCR से आने वाले लोगों की पहुंच आसान होगी, जिससे इस पूरे माइक्रो-मार्केट की दीर्घकालिक संभावनाएं मजबूत हो सकती हैं.
सिक्का ग्रुप के चेयरमैन हरविंदर सिंह सिक्का का कहना है कि जब किसी इलाके को एक्सप्रेसवे के जरिए दूसरे शहरों और प्रमुख बिजनेस सेंटर से बेहतर कनेक्टिविटी मिलती है, तो वहां रहने वाले लोगों के लिए आने-जाने का समय कम हो सकता है.

इसका असर डेवलपर्स की दिलचस्पी पर भी पड़ सकता है. बेहतर सड़क नेटवर्क के आसपास नई हाउसिंग सोसाइटी, प्लॉटेड डेवलपमेंट, कमर्शियल प्रोजेक्ट, वेयरहाउस और दूसरी गतिविधियां विकसित हो सकती हैं. इससे जमीन की मांग बढ़ सकती है और लंबी अवधि में प्रॉपर्टी की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है.
हालांकि, किसी इलाके में प्रॉपर्टी की कीमत बढ़ने का कारण सिर्फ एक्सप्रेसवे को मानना सही नहीं होगा. एयरपोर्ट, मेट्रो, औद्योगिक परियोजनाएं, रोजगार केंद्र और स्थानीय इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे कई दूसरे फैक्टर भी प्रॉपर्टी के मूल्य को प्रभावित करते हैं.
EPE-यमुना इंटरचेंज से किन इलाकों को फायदा?
प्रस्तावित इंटरचेंज ग्रेटर नोएडा में जगनपुर-अफजलपुर गांव के पास बनाया जा रहा है. ये यमुना एक्सप्रेसवे के जीरो प्वाइंट से करीब 10 किलोमीटर की दूरी पर है.
इंटरचेंज शुरू होने के बाद EPE से आने वाले वाहन सीधे यमुना एक्सप्रेसवे की ओर जा सकेंगे.
इसका फायदा पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हरियाणा और NCR के उन हिस्सों से आने वाले लोगों को मिल सकता है, जिन्हें यमुना एक्सप्रेसवे और ग्रेटर नोएडा की ओर जाना होता है.
बेहतर कनेक्टिविटी से इस कॉरिडोर में आवागमन आसान होने के साथ आसपास के क्षेत्रों में रियल एस्टेट गतिविधियों को भी समर्थन मिलने की उम्मीद है.

रियल एस्टेट डेवलपर्स का कहना है कि इन इलाकों की जमीनें महंगी होती जा रही हैं. Photo Credit: Google Map
डेवलपर्स के मुताबिक कनेक्टिविटी से बढ़ सकती है मांग
रियल एस्टेट डेवलपर्स का मानना है कि किसी माइक्रो-मार्केट में इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास होने पर एंड-यूजर्स और निवेशकों की रुचि बढ़ सकती है.
काउंटी ग्रुप के निदेशक अमित मोदी ने कहा, 'बेहतर कनेक्टिविटी के साथ इस क्षेत्र में प्लॉट, आवासीय और कमर्शियल प्रॉपर्टी की मांग को भी लंबी अवधि में समर्थन मिलने की उम्मीद है.' SKA ग्रुप के निदेशक संजय शर्मा ने कहा, 'एक्सप्रेसवे और बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट किसी भी माइक्रो-मार्केट की कनेक्टिविटी को बदल देते हैं. बेहतर पहुंच के साथ जमीन और आवासीय प्रॉपर्टी की मांग में धीरे-धीरे बदलाव देखने को मिलता है. जैसे-जैसे कनेक्टिविटी बेहतर होती है, एंड-यूजर्स के साथ निवेशकों की रुचि भी ऐसे इलाकों में बढ़ने लगती है.'
सिक्का ग्रुप के चेयरमैन हरविंदर सिंह सिक्का के अनुसार, 'यमुना एक्सप्रेसवे के साथ नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट और EPE की कनेक्टिविटी इस क्षेत्र को एक बड़े रियल एस्टेट कॉरिडोर में बदल रही है. एयरपोर्ट के आसपास बेहतर कनेक्टिविटी से रेजिडेंशियल और कमर्शियल दोनों तरह की गतिविधियों को समर्थन मिल सकता है. आने वाले समय में बेहतर रोड नेटवर्क इस क्षेत्र में रोजगार, कारोबार और नई रियल एस्टेट परियोजनाओं के विकास को भी बढ़ावा दे सकता है.'
नोएडा एयरपोर्ट से बढ़ी कॉरिडोर की अहमियत
इस पूरे क्षेत्र में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का विकास भी रियल एस्टेट के लिए एक बड़ा फैक्टर है.
एयरपोर्ट के आसपास सड़क और एक्सप्रेसवे नेटवर्क मजबूत होने से यात्रियों के साथ-साथ कारोबार और लॉजिस्टिक्स गतिविधियों को भी फायदा मिल सकता है.
यमुना एक्सप्रेसवे पहले से ही नोएडा और आगरा की दिशा में महत्वपूर्ण कनेक्टिविटी देता है. दूसरी ओर EPE दिल्ली-NCR के कई प्रमुख हिस्सों को जोड़ता है.
ऐसे में दोनों एक्सप्रेसवे के बीच सीधा कनेक्शन बनने से ये पूरा कॉरिडोर भविष्य में और अधिक महत्वपूर्ण हो सकता है.
जमीन से लेकर मकानों तक पड़ सकता है असर
एक्सप्रेसवे के आसपास जमीन की कीमतों में बदलाव का असर सिर्फ खाली जमीन या प्लॉट तक सीमित नहीं रहता. जैसे-जैसे किसी क्षेत्र में नई परियोजनाएं आती हैं, वहां बने मकानों और अपार्टमेंट की मांग भी बदल सकती है.
कमर्शियल गतिविधियां बढ़ने पर दुकानों, ऑफिस और दूसरी व्यावसायिक संपत्तियों की मांग में भी बदलाव देखने को मिल सकता है.
ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे के आसपास पिछले कुछ वर्षों में रेजिडेंशियल और कमर्शियल डेवलपमेंट बढ़ा है. अब एयरपोर्ट और बेहतर एक्सप्रेसवे कनेक्टिविटी के साथ इस क्षेत्र में डेवलपर्स की गतिविधियां और बढ़ने की संभावना पर बाजार की नजर है.
सिर्फ सड़क नहीं, पूरे इकोसिस्टम से बढ़ती है प्रॉपर्टी की कीमत
रियल एस्टेट विशेषज्ञों के मुताबिक, एक्सप्रेसवे किसी इलाके के विकास की शुरुआत कर सकता है, लेकिन कीमतों में टिकाऊ बढ़ोतरी के लिए पूरे इकोसिस्टम का विकसित होना जरूरी है.
सड़क के साथ रोजगार, पब्लिक ट्रांसपोर्ट, स्कूल, अस्पताल, रिटेल और कमर्शियल सुविधाएं विकसित होने पर किसी क्षेत्र में रहने की वास्तविक मांग पैदा होती है.
इसी लिहाज से EPE-यमुना इंटरचेंज को सिर्फ एक सड़क परियोजना के तौर पर नहीं देखा जा रहा है. इसके साथ नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, यमुना एक्सप्रेसवे और ग्रेटर नोएडा के आसपास हो रहे औद्योगिक और रियल एस्टेट विकास को जोड़कर देखा जाए तो ये कनेक्टिविटी आने वाले वर्षों में पूरे माइक्रो-मार्केट के विकास को प्रभावित कर सकती है.
फिलहाल इंटरचेंज का निर्माण अंतिम चरण में है. अगर तय समय के अनुसार ये शुरू हो जाता है, तो पश्चिमी NCR और यमुना एक्सप्रेसवे के बीच आवागमन आसान होगा. इसके बाद ये देखना महत्वपूर्ण होगा कि बेहतर कनेक्टिविटी का असर आसपास के इलाकों में जमीन, आवासीय और कमर्शियल प्रॉपर्टी की मांग पर किस तरह दिखाई देता है.
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