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ऑफर पर ऑफर, फिर भी क्‍यों नहीं बिक रहे फ्लैट्स, आनंद राठी रिपोर्ट ने बताई वजह

आनंद राठी रिपोर्ट ने बताया कि साल 2026 के पहले तीन महीनों में अनसोल्ड हाउसिंग स्टॉक बढ़कर 18 महीने का हो गया है. सप्लाई ज्यादा है और घर को खरीदने वाले कम हैं.

ऑफर पर ऑफर, फिर भी क्‍यों नहीं बिक रहे फ्लैट्स, आनंद राठी रिपोर्ट ने बताई वजह
आनंद राठी रिपोर्ट के अनुसार देश का रियल एस्टेट सेक्टर करेक्शन के दौर से गुजर रहा है.
NDTV File Photo

देश का रियल एस्टेट मार्केट एक बार फिर सुस्त नजर आ रहा है. ये हम नहीं बल्कि आनंद राठी की रिपोर्ट कह रही है. रिपोर्ट के अनुसार साल 2026 के पहले 3 महीनों में मार्केच में बिना बिके घरों का स्टॉक बढ़कर 18 महीने हो गया है. मतलब कि आज से अगर कोई नया प्रोजेक्ट ना बने तो भी मार्केट में पुराने घरों को बेचने में 18 महीने यानी डेढ़ साल लग जाएंगे. जबकि साल 2024 में ये आंकड़ा 14 महीने था. 

आनंद राठी रिपोर्ट के अनुसार यहां डिमांड और सप्लाई का बैलेंस बिगड़ गया है. बिल्डरों को फंड आसानी से मिल रहा है, इससे मार्केट में नए प्रोजेक्ट्स लगातार बढ़ते जा रहे हैं. पर दूसरी तरफ डिमांड कहीं ना कहीं नदारद है. यानी सप्लाई तो बढ़ी पर ग्राहक नहीं आए. इसका नतीजा ये हुआ कि घरों की सेल जो साल 2023 में 4.8 लाख यूनिट्स के रिकॉर्ड लेवल पर थी, वो अब कम होकर 4 लाख यूनिट्स पर आ गई है. साल-दर-साल के बेस पर इसमें 9% की कमी आई.

मार्केट में दिख रहा एक अलग समीकरण

आनंद राठी की रिपोर्ट में एक हैरान कर देने वाला आंकड़ा भी दिखा है. वो ये कि घरों की सेल तो कम हुई है, लेकिन मार्केट की टोटल वैल्यू लगातार बढ़ रही है. जहां साल 2023 में टोटल सेल हुए घरों की वैल्यू 4,870 अरब रुपये थी, वहीं ये बढ़कर 6,006 अरब रुपये हो गई. इससे पता चलता है कि ग्राहक अब सस्ते घरों को छोड़ प्रीमियम घर खरीद रहे हैं.

आनंद राठी की रिपोर्ट कहती है कि इस पूरे हालात को रियल एस्टेट में आई मंदी तो नहीं कह सकते. ये केवल वॉल्यूम करेक्शन के तौर पर देखा जा सकता है. मतलब ये कि पिछले कुछ सालों की तेजी को बाजार बैलेंस कर रहा है. आने वाले समय में अगर ब्याज की दर स्टेबल रहती हैं या कम होती हैं तो मार्केट में फिर से रौनक लौट सकती है.

सेगमेंट के हिसाब से जानें स्थिति

रिपोर्ट में सेगमेंट वाइज मार्केट की स्थिति के बारे में बताया है. पहले बात करते हैं 80 लाख रुपये से कम वाले घरों के बारे में. इस सेगमेंट पर सबसे ज्यादा असर दिखाई दिया है. वजह की बात करें तो इसमें आईटी सेक्टर में गिरावट, शेयर मार्केट में उठा-पटक और कीमतों का ऑउट ऑफ बजट जाना शामिल हैं. पिछले साल 2025 में इस सेगमेंट में 28% की बड़ी गिरावट आई, जिसमें हैदराबाद और दिल्ली-एनसीआर का हाल सबसे बुरा है.

  • मिड रेंज सेगमेंट का हाल

इसके बाद 80 लाख से 1.5 करोड़ रुपये के सेगमेंट का नंबर आता है. इस सेगमेंट ने साल 2023 में कमाल का प्रदर्शन किया था. पर साल 2025 में 8% की गिरावट आई है. दिल्ली-एनसीआर, बेंगलुरु और मुंबई जैसे बड़े बाजारों में इस सेगमेंट की पकड़ कम हुई है. हालांकि चेन्नई के मार्केट में 23% की ग्रोथ हुई है.

  • प्रीमियम घरों की स्थिति

प्रीमियम घरों की रेंज 1.5 करोड़ रुपये से ऊपर की है. पहली बात तो ये की अमीर लोगों की पसंद इसमें लगातार बनी है. तभी ये सेगमेंट टिका हुआ है. हालांकि ग्रोथ की रफ्तार कम हुई है. साल 2022 में ये सेगमेंट 149% की तेज सफ्तार से भाग रहा था, वहीं अब साल 2025 में इसकी ग्रोथ 6% ही रह गई है. मुंबई में इन प्रीमियम घरों की सेल में पिछले 2 सालों से 15% की गिरावट आई है.

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