अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने अपने नए रेसिप्रोकल टैरिफ (Reciprocal Tariff) का ऐलान कर दिया है, जिससे अमेरिका और दुनिया भर में महंगाई और व्यापार पर असर पड़ सकता है. ट्रंप ने घोषणा की है कि अमेरिका में आने वाले लगभग सभी सामानों पर 10% बेसलाइन टैक्स लगेगा, जबकि कुछ देशों पर इससे भी ज्यादा टैक्स लगाया जाएगा. इस लिस्ट में चीन, भारत, जापान और यूरोपियन यूनियन (EU) जैसे प्रमुख व्यापारिक साझेदार शामिल हैं. लेकिन इस पूरी लिस्ट में एक नाम गायब है वो है रूस...
ट्रंप रूस पर थे नाराज, लेकिन नहीं लगाया टैरिफ
बीते दिनों ट्रंप ने कहा था कि अगर रूस यूक्रेन युद्ध (Russia-Ukraine war) को खत्म नहीं करता, तो अमेरिका रूसी तेल पर भारी टैरिफ लगाएगा. उन्होंने यह भी कहा कि जो भी देश रूस से तेल खरीदेगा, उसे अमेरिका के साथ व्यापार करने में दिक्कत होगी. लेकिन जब ट्रंप ने अपने टैरिफ की लिस्ट (Trump Tariff List) जारी की, तो उसमें रूस का नाम नहीं था.
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व्हाइट हाउस ने दी सफाई, फिर भी उछ रहे सवाल
जब इस बारे में सवाल उठे तो व्हाइट हाउस की प्रवक्ता कैरोलीन लीविट ने कहा कि अमेरिका पहले से ही रूस पर कड़े प्रतिबंध लगा चुका है, इसलिए उस पर अतिरिक्त टैरिफ की जरूरत नहीं है. लेकिन इस सफाई से सब संतुष्ट नहीं हैं क्योंकि अमेरिका अभी भी रूस के साथ व्यापार करता है, और कुछ ऐसे छोटे देशों को टैरिफ लिस्ट में डाला गया है जिनका अमेरिका के साथ व्यापार रूस से भी कम है.
ट्रंप-पुतिन के बीच तनाव, फिर रूस को क्यों दी राहत?
ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है. ट्रंप ने कुछ दिनों पहले कहा था कि वे यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की की आलोचना करने पर पुतिन से बहुत नाराज हैं. उन्होंने रूस पर 25% सेकेंडरी टैरिफ लगाने की धमकी भी दी थी और कहा था कि अगर रूस युद्धविराम के लिए तैयार नहीं हुआ तो एक महीने के अंदर ये शुल्क लागू कर दिए जाएंगे. लेकिन अब जब टैरिफ लिस्ट जारी हुई है, तो उसमें रूस का नाम नहीं है, जिससे कई लोगों को हैरानी हो रही है.
किन देशों को मिली छूट, किन पर लगा भारी टैक्स?
बता दें कि रूस अकेला देश नहीं है जिसे ट्रंप के नए टैरिफ से छूट मिली है. बेलारूस, क्यूबा और नॉर्थ कोरिया, जो पहले से ही अमेरिका के प्रतिबंधों का सामना कर रहे हैं, को भी इस लिस्ट में शामिल नहीं किया गया. लेकिन ईरान और सीरिया पर 10% और 40% का अतिरिक्त शुल्क लगा दिया गया है.
इसके अलावा, कनाडा और मैक्सिको, जो पहले ट्रंप की टैरिफ नीति से प्रभावित हुए थे, को भी इस बार छूट मिल गई. वहीं, चीन पर सबसे भारी शुल्क लगाया गया है, जो पहले ही फेंटानाइल सप्लाई चेन में भूमिका को लेकर 20% टैक्स झेल रहा था. अब इस पर 34% और बढ़ा दिया गया है, जिससे कुल शुल्क 54% हो गया है.
क्या रूस को बचाने की कोशिश कर रहे हैं ट्रंप?
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या ट्रंप रूस के खिलाफ अपनी सख्ती से पीछे हट रहे हैं? पहले उन्होंने कहा था कि रूस पर नए प्रतिबंध जल्द लगाए जाएंगे, लेकिन अब टैरिफ लिस्ट में उसका नाम ही नहीं है. क्या यह पुतिन से किसी डील का संकेत है या अमेरिका की मौजूदा पॉलिसी का हिस्सा? इस फैसले पर दुनिया भर में चर्चा तेज हो गई है और सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या ट्रंप वाकई रूस पर कड़े कदम उठाएंगे या यह सिर्फ एक बयानबाजी थी.
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