तेल सिर्फ ईंधन नहीं है बल्कि देशों की ताकत और उनकी कमाई का सबसे बड़ा जरिया भी है. दुनिया की राजनीति से लेकर ग्लोबल मार्केट तक तेल की भूमिका बहुत अहम है. जब भी तेल की कीमतों में हलचल होती है तो आम लोगों की जेब पर भी असर दिखता है. ऐसे में यह जानना जरूरी हो जाता है कि दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार आखिर किस देश के पास है. हैरानी की बात यह है कि नंबर वन देश वो नहीं है जिसका नाम आमतौर पर सबसे पहले लिया जाता है.
कई लोगों को लगता है कि नंबर वन पर सऊदी अरब होगा लेकिन सच इससे बिल्कुल अलग है.दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार पर अमेरिका की भी नजर है . हाल के दिनों में इस देश पर किए गए अमेरिकी हमले ने पूरी दुनिया को चौंका दिया है.
आज हम आपको आसान भाषा में बताएंगे दुनिया के उन 10 देशों के बारे में जिनके पास सबसे बड़े तेल भंडार हैं और आखिर क्यों नंबर वन देश होने के बावजूद भी कुछ देश तेल से उतनी कमाई नहीं कर पा रहे...
- वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है. यहां करीब 303 अरब बैरल तेल मौजूद है जो पूरी दुनिया के कुल तेल का बड़ा हिस्सा है. इस देश का ज्यादातर तेल बहुत भारी है जिसे निकालना आसान नहीं है. अमेरिका के प्रतिबंध, कमजोर इंफ्रास्ट्रक्चर और निवेश की कमी की वजह से वेनेजुएला तेल होते हुए भी सीमित मात्रा में ही उत्पादन कर पा रहा है. आज इसकी कमाई पहले जैसी नहीं रही.
- सऊदी अरब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा तेल भंडार रखने वाला देश है. यहां करीब 267 से 269 अरब बैरल तेल मौजूद है. सऊदी का तेल अच्छी क्वालिटी का माना जाता है और यही वजह है कि यह देश ओपेक में सबसे ताकतवर खिलाड़ी है. जरूरत पड़ने पर सऊदी तेल उत्पादन बढ़ा या घटाकर ग्लोबल कीमतों को भी प्रभावित कर सकता है.
- ईरान के पास करीब 209 अरब बैरल तेल का भंडार है. तेल की क्वालिटी अच्छी है लेकिन अमेरिका के प्रतिबंधों की वजह से ईरान अपनी पूरी क्षमता का इस्तेमाल नहीं कर पा रहा. राजनीति और परमाणु मुद्दों के चलते ईरान का तेल कारोबार हमेशा जोखिम में रहता है.
- कनाडा के पास 163 से 170 अरब बैरल तेल मौजूद है. यहां का ज्यादातर तेल ऑयल सैंड्स से निकलता है जो निकालने में महंगा पड़ता है. इसके बावजूद कनाडा को एक भरोसेमंद सप्लायर माना जाता है और अमेरिका इसका सबसे बड़ा खरीदार है.
- इराक के पास करीब 145 अरब बैरल तेल है. यह ओपेक का अहम सदस्य है लेकिन राजनीतिक अस्थिरता और सुरक्षा समस्याओं की वजह से इसका पूरा फायदा नहीं मिल पा रहा. तेल की क्षमता बहुत ज्यादा है लेकिन हालात रास्ते में रुकावट बनते हैं.
- रूस के पास 80 से 107 अरब बैरल के बीच तेल भंडार है. यहां तेल की क्वालिटी अलग अलग तरह की है. यूक्रेन युद्ध और पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के बाद रूस ने अपना तेल भारत और चीन जैसे देशों को ज्यादा बेचना शुरू किया.
- संयुक्त अरब अमीरात के पास 97 से 111 अरब बैरल तेल है. ज्यादातर तेल अबू धाबी में है. यूएई भले ही रिन्यूएबल एनर्जी में निवेश कर रहा हो लेकिन आज भी उसकी अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा तेल पर ही टिका है.
- कुवैत के पास करीब 101 अरब बैरल तेल है. यहां का तेल हाई क्वालिटी का माना जाता है और यह लंबे समय से एक भरोसेमंद सप्लायर रहा है. हालांकि मिडिल ईस्ट की राजनीति का असर कुवैत पर भी पड़ता रहता है.
- अमेरिका के पास तेल भंडार तुलनात्मक रूप से कम है जो करीब 45 से 69 अरब बैरल के बीच है. इसके बावजूद अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा तेल उत्पादक देश है. शेल ऑयल की वजह से उत्पादन बढ़ा है लेकिन यह तेल जल्दी खत्म भी होता है.
- लीबिया के पास करीब 48 अरब बैरल तेल है जो अफ्रीका में सबसे ज्यादा है. यहां का तेल हल्का और अच्छी क्वालिटी का है लेकिन गृहयुद्ध और राजनीतिक अस्थिरता की वजह से उत्पादन कभी स्थिर नहीं रह पाता.
वेनेजुएला के पास अमेरिका से पांच गुना ज्यादा ऑयल रिजर्व
अमेरिका के पास करीब 55 अरब बैरल तेल है और वह इस लिस्ट में नौवें नंबर पर आता है. इसका मतलब यह है कि वेनेजुएला के पास अमेरिका से पांच गुना ज्यादा तेल मौजूद है.इसी वजह से ये बातें चल रही हैं कि वेनेजुएला के खिलाफ डोनाल्ड ट्रम्प के ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व के पीछे क्या वेनेजुएला का 303 अरब बैरल तेल भंडार असली वजह है?
सच्चाई यह है कि वेनेजुएला आज तेल से उतनी कमाई नहीं कर पा रहा जितनी वह पहले करता था. राजनीतिक प्रतिबंध और कमजोर सिस्टम की वजह से दुनिया का सबसे बड़ा तेल खजाना होने के बाद भी यह देश आर्थिक संकट से जूझ रहा है.
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