Tata Trusts Dispute: एन चंद्रशेखरन के टाटा संस के चेयरमैन पद पर बने रहने को लेकर टाटा संस और टाटा ट्रस्ट्स के बीच बढ़ते विवाद ने एक गहरे मतभेद को सामने ला दिया है. ये मतभेद खास तौर पर टाटा संस की लिस्टिंग को लेकर है.
टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा जहां टाटा संस की सार्वजनिक लिस्टिंग का विरोध कर रहे हैं, वहीं ट्रस्ट नॉमिनी वेणु श्रीनिवासन ने लिस्टिंग का समर्थन किया है. एन चंद्रशेखरन के कानूनी सलाहकार और वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने कहा है कि विवादित बोर्ड मीटिंग पर ध्यान केंद्रिती होने से 'असली मुद्दे' से ध्यान हट गया है.
NDTV के CEO और एडिटर-इन-चीफ राहुल कंवल के साथ एक विशेष इंटरव्यू में साल्वे ने कहा कि ध्यान बोर्ड मीटिंग पर चला गया, जबकि टाटा ट्रस्ट्स ने सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट के वाइस चेयरपर्सन और टाटा संस के डायरेक्टर वेणु श्रीनिवासन को लिखे पत्र में कुछ चिंताएं सामने रखी थीं.
'टाटा ट्रस्ट्स लिस्टिंग के खिलाफ, श्रीनिवासन समर्थन में'
साल्वे ने कहा, 'उनके शब्दों में, आप कंपनी की लिस्टिंग के समर्थन में हैं, टाटा ट्रस्ट्स कंपनी की लिस्टिंग के खिलाफ हैं. इसलिए आप, श्री श्रीनिवासन, हितों के टकराव की स्थिति में हैं.'
उन्होंने ये बात टाटा संस में एन चंद्रशेखरन को एग्जीक्यूटिव चेयरपर्सन के तौर पर दोबारा नियुक्त किए जाने को लेकर शेयरहोल्डर्स की इच्छा के खिलाफ बोर्ड के जाने से जुड़े सवाल के जवाब में कही.
पूर्व सॉलिसिटर जनरल ने आगे कहा, 'आपने जो कहा है, उसके लिए बहुत से छोटे जवाब हैं. बड़े मुद्दे सामने हैं. हमें पेड़ों के लिए जंगल को नहीं भूलना चाहिए. कानूनी सलाह हासिल करना एक अच्छा फॉरेंसिक तरीका है.'

'RBI के फैसले के बाद लिस्टिंग की ओर बढ़ रहा टाटा संस'
साल्वे ने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ओर से टाटा संस को अपर-लेयर नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) के तौर पर वर्गीकृत किए जाने के बाद कंपनी लिस्टिंग की दिशा में आगे बढ़ रही थी. उन्होंने RBI के इस निर्देश के पीछे के तर्क पर भी सवाल उठाया.
उन्होंने कहा कि RBI ने ऐतिहासिक रूप से उन होल्डिंग कंपनियों को NBFC के तौर पर रेगुलेट किया है, जिनकी सार्वजनिक फंड तक पहुंच थी. हालांकि, उन्होंने कहा कि टाटा संस की NBFC के तौर पर स्थिति विवाद में नहीं है.
वरिष्ठ अधिवक्ता ने आगे कहा कि RBI ने शुरुआत में 2019 में संकेत दिया था कि सार्वजनिक फंड तक पहुंच रखने वाली कंपनियां कुछ परिस्थितियों में अपर-लेयर फ्रेमवर्क से बाहर रह सकती हैं. लेकिन बाद में रेगुलेटर ने अपनी स्थिति पर दोबारा विचार किया.
उनके मुताबिक रेगुलेटर का तर्क था कि सार्वजनिक फंड तक अप्रत्यक्ष पहुंच भी तब हो सकती है, जब किसी ग्रुप के भीतर मौजूद कंपनियों की ऐसे फंड तक पहुंच हो.
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— NDTV (@ndtv) September 20, 2026
टाटा स्टील की 4% हिस्सेदारी का दिया उदाहरण
साल्वे ने टाटा स्टील का उदाहरण देते हुए कहा कि टाटा स्टील के पास टाटा संस में 4 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जिसकी कीमत उन्होंने करीब 40,000 करोड़ रुपये आंकी.
उन्होंने कहा कि टाटा संस की लिस्टिंग होने पर टाटा स्टील इस हिस्सेदारी को मोनेटाइज कर सकती है और अपना कर्ज घटा सकती है. वहीं, अगर कंपनी इस हिस्सेदारी को बनाए रखती है, तो उसे अपने कर्ज की सर्विसिंग के लिए टाटा संस से मिलने वाले डिविडेंड पर निर्भर रहना पड़ेगा.
अपर-लेयर NBFC के लिए बहुत ऊंची है सीमा
साल्वे ने कहा कि किसी कंपनी को अपर-लेयर NBFC के तौर पर वर्गीकृत करने की सीमा बहुत ऊंची है. इसके लिए कंपनी का आकार 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा या करीब 10 अरब डॉलर होना जरूरी है.
उन्होंने कहा, 'टाटा संस की वैल्यू करीब 20-25 अरब डॉलर है. टाटा ग्रुप और टाटा संस की कुल वैल्यू 270 अरब डॉलर है. अगर टाटा संस के साथ कुछ होता है, तो हमारी अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी.'
'RBI कहे कि लिस्ट हो, तो कॉरपोरेट गवर्नेंस का क्या होगा?'
साल्वे ने कहा कि RBI की ओर से टाटा संस को लिस्ट होने का निर्देश दिए जाने से कॉरपोरेट गवर्नेंस और कंपनी के बोर्ड पर रेगुलेटर की निगरानी को लेकर भी सवाल उठते हैं.
उन्होंने कहा, 'जब रेगुलेटर कहता है कि खुद को लिस्ट करो, तो क्या होता है? A: कॉरपोरेट गवर्नेंस खत्म हो जाती है. B: रिजर्व बैंक के पास ये अधिकार होता है कि बोर्ड में कौन आता है, इस पर निगरानी रखे.'
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