केंद्र सरकार ने चीनी के बढ़ते दामों पर लगाने के लिए बड़ा फैसला किया है. सरकार ने बुधवार रात को बड़ा आदेश जारी करते हुए सितंबर तक चीनी निर्यात पर रोक लगा दी है. भारत दुनिया में चीनी का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है और देश में पिछले कुछ वक्त में शक्कर के दाम में बढ़ोतरी देखी गई है. यह कदम दुनिया में चीनी की बढ़ती कीमतों को काबू में करने, साथ ही ब्राजील और थाईलैंड जैसे देशों के एशिया और अफ्रीकी देशों को निर्यात बढ़ाने के मकसद से किया गया है.
भारत चीनी का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक
यह कदम दुनिया में चीनी की बढ़ती कीमतों को काबू में करने, साथ ही ब्राजील और थाईलैंड जैसे देशों के एशिया और अफ्रीकी देशों को निर्यात बढ़ाने के मकसद से किया गया है. ब्राजील के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक है. उसने मिलों को 1.59 मिलियन मीट्रिक टन चीनी निर्यात की इजाजत दी है, ताकि बढ़ते उत्पादन को संभाला जा सके. लेकिन इस बार उत्पादन के साथ खपत में कमी लगातार दूसरे साल देखी जा रही है.इस कारण गन्ने की फसल भी कमजोर हुई है.
अलनीनो की वजह से मानसूम कमजोर
अल नीनो की वजह से इस साल मानसून में बाधा आने की आशंकाओं के कारण अगले सीजन में चीनी उत्पादन के अनुमान से कम रहने का खतरा बढ़ा दिया है. निर्यात के लिए स्वीकृत 15 लाख मीट्रिक टन में से व्यापारियों ने लगभग 8 लाख मीट्रिक टन के लिए सौदे किए हैं. इसमें से 6 लाख टन से अधिक की शिपमेंट पहले ही हो चुकी है. सरकार ने कहा कि वह कच्ची और सफेद चीनी के निर्यात पर रोक लगाएगी, जबकि निर्यात के लिए तैयार माल को कुछ शर्तों के तहत आगे बढ़ने की अनुमति देगी. सरकार ने कहा कि अगर आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचना प्रकाशित होने से पहले ही माल की लोडिंग शुरू हो चुकी हो, तो शिपमेंट की अनुमति दी जाएगी.
चीनी निर्यात कोटा बढ़ाया गया था
जिन जहाजों के लिए शिपिंग बिल दाखिल किया गया था और वे भारतीय बंदरगाह पर पहले ही लंगर डाल चुके थे, पहुंच चुके थे या लंगर डाल चुके थे, उन्हें भी निर्यात की अनुमति दी जाएगी. सरकार ने कहा कि अधिसूचना जारी होने से पहले यदि चीनी सीमा शुल्क विभाग या किसी संरक्षक को सौंप दी गई थी तो शिपमेंट को मंजूरी दे दी जाएगी. सरकार ने फरवरी में अतिरिक्त चीनी निर्यात कोटा प्रदान किया था, जिससे व्यापारियों को निर्यात सौदे करने के लिए प्रोत्साहन मिला. अब व्यापारियों के लिए उन निर्यात आदेशों को पूरा करना मुश्किल हो जाएगा. भारत द्वारा निर्यात पर प्रतिबंध की घोषणा के बाद न्यूयॉर्क रॉ शुगर वायदा में 2% से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि लंदन व्हाइट शुगर वायदा में 3% की उछाल आई.
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