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चीनी की बढ़ती कीमतों के बीच सरकार का बड़ा फैसला: 4,000 क्विंटल और 30 दिन की लिमिट तय, क्या अब सस्ते होंगे दाम?

Sugar Price Hike: कमजोर मानसून की आशंका को देखते हुए सरकार ने घरेलू बाजार में सप्लाई बनाए रखने के लिए चीनी के निर्यात पर 30 सितंबर 2026 तक रोक लगा रखी है. चीनी उद्योग संगठनों के अनुसार देश में चीनी की कोई कमी नहीं है और पर्याप्त स्टॉक मौजूद है.

चीनी की बढ़ती कीमतों के बीच सरकार का बड़ा फैसला: 4,000 क्विंटल और 30 दिन की लिमिट तय, क्या अब सस्ते होंगे दाम?
Sugar Stock Limit : चीनी की कीमतों पर बड़ा अपडेट, सस्ती होगी चीनी या बढ़ेंगे दाम?

Sugar Prices in India: हाल के दिनों में  चीनी की कीमत लगातार बढ़ रही है, जिसे देखते हुए अब सरकार ने इसे काबू में रखने के लिए बड़ा फैसला लिया है. केंद्र सरकार ने देशभर में चीनी की जमाखोरी रोकने के लिए डीलरों पर सख्त स्टॉक लिमिट लागू कर दी है. सरकार का मानना है कि इससे बाजार में चीनी की उपलब्धता बनी रहेगी और आम लोगों को ज्यादा कीमत चुकाने की नौबत नहीं आएगी.

अब 30 दिन से ज्यादा नहीं रख सकेंगे चीनी का स्टॉक

सरकार के नए आदेश के मुताबिक, अब कोई भी चीनी डीलर किसी भी स्टॉक को 30 दिनों से ज्यादा समय तक अपने पास नहीं रख सकेगा. इसके अलावा एक समय पर किसी भी जगह 4,000 क्विंटल से ज्यादा चीनी का स्टॉक रखने की भी अनुमति नहीं होगी. यानी तय सीमा से ज्यादा स्टॉक जमा करने पर कार्रवाई की जा सकती है.

1 अगस्त से लागू होंगे नए नियम

यह नया आदेश 1 अगस्त 2026 से लागू होगा और 30 नवंबर 2026 तक प्रभावी रहेगा. खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने यह फैसला आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 और शुगर (कंट्रोल) ऑर्डर, 2025 के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए लिया है. सरकार का कहना है कि इन नियमों का उद्देश्य केवल जमाखोरी रोकना और बाजार में सप्लाई बनाए रखना है.

सरकार ने क्यों उठाया यह कदम?

सरकार को आशंका है कि कमजोर मानसून की वजह से चीनी उत्पादन पर असर पड़ सकता है, जिससे आने वाले समय में कीमतें और बढ़ सकती हैं. इसी संभावना को देखते हुए पहले ही चीनी के निर्यात पर रोक लगाई जा चुकी है. अब स्टॉक लिमिट लागू कर सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि घरेलू बाजार में चीनी की कमी न हो और कीमतें कंट्रोल में रहें.

किन पर लागू नहीं होंगे ये नियम?

यह आदेश उन चीनी स्टॉक पर लागू नहीं होगा जो सरकार के खाते में रखे गए हैं. इसके अलावा सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत उचित मूल्य की दुकानों में वितरण के लिए राज्य सरकार या उसके अधिकृत अधिकारियों द्वारा नामित डीलरों के स्टॉक पर भी यह नियम लागू नहीं होगा.

राज्य सरकारों को भी दिए गए निर्देश

केंद्र सरकार ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से कहा है कि वे अपने लेवल पर स्टॉक रखने और कारोबार की लिमिट तय करें. हालांकि यह सीमा केंद्र सरकार द्वारा तय की गई 30 दिन की अवधि और 4,000 क्विंटल की अधिकतम सीमा से ज्यादा नहीं हो सकती. स्टॉक रखने की अवधि की गणना उसी दिन से होगी, जिस दिन डीलर के पास चीनी का नया स्टॉक पहुंचेगा.

डीलरों को देना होगा स्टॉक का पूरा रिकॉर्ड

सरकार ने सभी चीनी डीलरों को निर्देश दिया है कि वे अपने पास मौजूद चीनी के स्टॉक की जानकारी तय पोर्टल पर दर्ज करें और उसे समय-समय पर अपडेट भी करते रहें. इससे सरकार बाजार में उपलब्ध स्टॉक पर नजर रख सकेगी और जरूरत पड़ने पर तुरंत कार्रवाई कर सकेगी.

पहले ही लग चुकी है निर्यात पर रोक

बढ़ती कीमतों और घरेलू उपलब्धता बनाए रखने के लिए सरकार ने मई में ही 30 सितंबर 2026 तक चीनी के निर्यात पर रोक लगा दी थी. हालांकि 2025-26 मार्केटिंग सीजन के लिए करीब 16 लाख टन चीनी के निर्यात की अनुमति पहले ही दी जा चुकी थी.

देश में चीनी की कमी नहीं,पर्याप्त स्टॉक मौजूद 

चीनी उद्योग संगठन ISMA और NFCSF का कहना है कि देश में फिलहाल चीनी का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है. 17 जुलाई को दोनों संगठनों ने संस्थागत खरीदारों, थोक कारोबारियों और खुदरा व्यापारियों से अपील की थी कि वे बढ़ती कीमतों के बीच जरूरत से ज्यादा खरीदारी या सट्टेबाजी से बचें. वहीं ISMA का अनुमान है कि 2025-26 मार्केटिंग सीजन में एथेनॉल के लिए डायवर्जन के बाद भी देश में करीब 29.3 मिलियन टन चीनी का उत्पादन होगा, जो पिछले सीजन के 26.12 मिलियन टन से ज्यादा है.
 

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