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पैसे की किल्लत, छोड़ी पढ़ाई, अब बनाती हैं एप्पल की स्क्रीन और टेस्ला का ग्लास, जानें कौन हैं Zhou Qunfei

Zhou Qunfei Success Story: जानिए चीन की अमीर महिलाओं में शामिल झोउ क्यूनफेई की सक्सेस स्टोरी, जो कभी एक मामूली फैक्ट्री वर्कर थीं और आज अमेरिका-चीन डिनर बैंकविट में एलन मस्क और टिम कुक के बीच सीट पर बैठी नजर आईं.

पैसे की किल्लत, छोड़ी पढ़ाई, अब बनाती हैं एप्पल की स्क्रीन और टेस्ला का ग्लास, जानें कौन हैं Zhou Qunfei
Zhou Qunfei Success Story: झोउ क्यूनफेई की कहानी संघर्ष भरी है. उनका जन्म चीन के एक गरीब गांव में हुआ था.

Zhou Qunfei Success Story: अमेरिका और चीन के बीच हुए खास डिनर की एक तस्वीर काफी चर्चा में रही. इस टेबल पर दुनिया के बड़े लोग बैठे थे. बीच में टेस्ला के बॉस एलन मस्क और एप्पल के सीईओ टिम कुक नजर आए. लेकिन सबसे ज्यादा लोगों का ध्यान उनके बीच बैठी एक महिला ने खींचा. ये महिला कोई नेता या अमीर परिवार से नहीं थी, बल्कि लेंस टेक्नोलॉजी की फाउंडर झोउ क्यूनफेई थीं, जिन्होंने अपनी मेहनत से ये मुकाम हासिल किया. कभी गरीबी की वजह से 16 साल की उम्र में स्कूल छोड़ने पर मजबूर हुई सिंपल फैक्ट्री गर्ल, आज दो सबसे बड़े बिजनेसमैन के बीच पावर सेंटर बनकर बैठी थी. बिना किसी गॉडफादर, बिना किसी बैकग्राउंड और सिर्फ अपने इरादों के दम पर चीन की सबसे अमीर महिला बनने वाली झोउ क्यूनफेई की कहानी प्रेरणा से भरी हुई है.

जीरो से शुरुआत

झोउ क्यूनफेई की कहानी संघर्ष भरी है. उनका जन्म चीन के एक गरीब परिवार में हुआ था. जब वो केवल 5 साल की थीं, तभी उनकी मां का निधन हो गया और उनके पिता भी एक हादसे में दिव्यांग हो गए. घर की हालत इतनी खराब थी कि उन्हें ठीक से खाना और कपड़े भी नहीं मिलते थे. 16 साल की उम्र में पैसों की कमी के चलते उन्हें पढ़ाई छोड़नी पड़ी और काम की तलाश में गुआंगडोंग जाना पड़ा. वहां एक फैक्ट्री में उन्हें घड़ियों के कांच घिसने का काम मिला. दिन भर मेहनत करने के बाद भी वो हार नहीं मानती थीं और रात में पढ़ाई करके नए कौशल सीखती थीं, जैसे अकाउंटिंग और कंप्यूटर. उन्हें भरोसा था कि मेहनत और सीखने की लगन ही उन्हें गरीबी से बाहर निकाल सकती है.

20 हजार युआन और 8 रिश्तेदारों के साथ पहली सफलता

फैक्ट्री में कुछ साल काम करने के बाद, झोउ ने अपनी सैलरी से पाई जोड़कर 20,000 युआन जमा किए. साल 1993 में, उन्होंने अपने भाई, बहन, भाभी और जीजा के साथ परिवार के 8 लोगों को इकट्ठा किया और शेन्जेन में वॉच ग्लास प्रोसेसिंग की एक छोटी सी वर्कशॉप शुरू कर दी. ये कोई शानदार ऑफिस नहीं था, बल्कि एक छोटा सा कमरा था. झोउ खुद मशीनें ठीक करती थीं, खुद ही सेल्स के लिए कंपनियों के चक्कर काटती थीं और खुद ही ग्लास ग्राइंडिंग भी करती थीं. अगले चार सालों तक वो इसी तरह चौबीसों घंटे बिना थके काम करती रहीं.

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फिर आया टर्निंग प्वाइंट

साल 2000 के आसपास मोबाइल फोन का जमाना तेजी से बढ़ने लगा. झोउ ने समझ लिया कि अब घड़ियों के कांच से ज्यादा बड़ा बाजार मोबाइल स्क्रीन का होगा. इसी सोच के साथ उन्होंने अपनी कंपनी लेंस टेक्नोलॉजी शुरू की. शुरुआत में उनकी कंपनी छोटे और सस्ते मोबाइल फोन के लिए स्क्रीन बनाती थी. फिर एक बड़ा मौका आया, जब उन्होंने अमेरिका की बड़ी कंपनी मोटोरोला से काम लेने की कोशिश की. उनकी मेहनत रंग लाई और लेंस टेक्नोलॉजी को मशहूर मोटोरोला रेजर V3 फोन के लिए स्क्रीन बनाने का ऑर्डर मिल गया. ये फोन दुनिया भर में हिट हुआ और 10 करोड़ से ज्यादा बिका.

फिर नोकिया और सैमसंग जैसी बड़ी कंपनियां भी उनकी कस्टमर बन गईं. लेकिन इतिहास रचना अभी बाकी था. साल 2007 में एप्पल के स्टीव जॉब्स (Steve Jobs) ने पहला आईफोन लॉन्च किया, जिसने पूरी दुनिया से की-पैड हटाकर फुल-ग्लास टचस्क्रीन का कॉन्सेप्ट रख दिया. जॉब्स को एक ऐसे ग्लास की तलाश थी जो स्क्रैच-रेसिस्टेंट भी हो और स्मूथ भी. झोउ क्यूनफेई की टीम ने एप्पल के इंजीनियरों के साथ मिलकर दिन-रात मेहनत की और सिर्फ 3 महीने में आईफोन के लिए ग्लास पैनल तैयार कर दिया. इस एक बड़े कॉन्ट्रैक्ट ने उनकी कंपनी लेंस टेक्नोलॉजी की किस्मत बदल दी.

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टिम कुक तो ठीक हैं, पर मस्क के बगल में क्यों?

टिम कुक के पास बैठना तो इसलिए समझ आता है क्योंकि झोउ क्यूनफेई की कंपनी एप्पल के लिए काम करती है. लेकिन एलन मस्क के पास बैठने की वजह भी काफी स्पेशल है. असल में, झोउ क्यूनफेई ने अपनी कंपनी को आगे बढ़ाकर कारों और रोबोट्स के बिजनेस में भी उतार दिया है. आज Lens Technology दुनिया की 30 से ज्यादा बड़ी कार कंपनियों, जैसे टेस्ला, Mercedes और BMW को कार के अंदर लगने वाली स्क्रीन, टच कंट्रोल पैनल और डैशबोर्ड ग्लास सप्लाई करती है. मतलब टेस्ला की गाड़ियों में जो हाई-टेक स्क्रीन दिखती है, उसमें भी उनकी कंपनी का रोल है.

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