भारत‑अमेरिका के बीच टैरिफ डील पर बनी सहमति से शेयर बाजार में जबरदस्त उत्साह देखा गया. मंगलवार को शेयर बाजार जोरदार उछाल के साथ खुले. प्री-ओपनिंग सेशन में ही सेंसेक्स ने 3,800 अंकों की ऐतिहासिक छलांग लगाई, वहीं निफ्टी में भी 1,500 अंकों के साथ बड़ा उछाल देखा गया. ट्रेड डील फाइनल होने के फैसले को निवेशकों ने दोनों हाथों से लिया और बाजार खुलते ही खरीदारी इतनी तेज रही कि शुरुआती कुछ मिनटों में ही ऑटो, फार्मा, टेक्सटाइल समेत सभी सेक्टर्स हरे निशान में पहुंच गए. मंगलवार को रुपया भी बड़ी मजबूती के साथ खुला.
सुबह 9:45 बजे सेंसेक्स 2.66% या 2,174 रुपये के उछाल के साथ 83,840 रुपये पर ट्रेड कर रहे थे, वहीं निफ्टी 2.65% या 665 अंकों के उछाल के साथ 25,757 पर ट्रेड कर रहा था.
डॉलर के मुकाबले 1.2% मजबूत होकर 90.4 तक पहुंचा रुपया
टैरिफ डील का सकारात्मक असर फॉरेक्स मार्केट में भी दिखा. मार्केट खुलते ही रुपया 1.2% मजबूत होकर सोमवार के 91.52 के स्तर से उछलकर 90.4 तक पहुंच गया. यह पिछले कई महीनों में रुपया‑डॉलर बाजार की सबसे मजबूत शुरुआती चालों में से एक रही. निवेशकों के अनुसार, अमेरिकी टैरिफ में कमी से भारत के निर्यात और विदेशी पूंजी प्रवाह पर सकारात्मक असर होगा, जिससे रुपया और भी मजबूत रह सकता है.
अमेरिका ने 25% से घटाकर 18% किया टैरिफ
भारत-अमेरिका के बीच ट्रेड डील पर बनी सहमति से भारतीय शेयर बाजार में आज बड़ा उछाल आया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर लगने वाले रेसिप्रोकल टैरिफ को 25% से घटाकर 18% कर दिया है. ट्रंप के इस ऐलान से भारत के विदेशी व्यापार को लेकर उम्मीदें जगी हैं. जल्द ही इस ट्रेड डील की तस्वीर साफ होने की उम्मीद की जा रही है. आज मंगलवार को शेयर बाजार पर इसी का असर देखा गया.
शेयर बाजार में लौटी रौनक
भारतीय शेयर बाजार लंबे समय से अमेरिकी टैरिफ का दबाव झेल रहे शेयर बाजार में रौनक लौटी है. जानकारों ने बताया था कि खासतौर से एक्सपोर्ट से जुड़े सेक्टर्स, जैसे ऑटो, टेक्सटाइल, फार्मा, सीफूड, कंज्यूमर गुड्स से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में तेजी देखने को मिल सकती है. वहीं, इससे उलट, जिन सेक्टर्स पर अमेरिकी आयात बढ़ने का खतरा है, वहां थोड़ा दबाव भी बन सकता है.
भारत का बड़ा ट्रेड पार्टनर है अमेरिका
अमेरिका, भारत का एक बड़ा ट्रेड पार्टनर है. खासतौर से ऑटो पार्ट्स, फार्मा, टेक्सटाइल्स, जेम्स एंड ज्वैलरी जैसे कई सेक्टर की कंपनियों की मोटी कमाई अमेरिकी बाजार से होती रही है. एक्सपोर्ट ओरिएंटेड सेक्टर्स के लिए टैरिफ 25% से घटकर 18% होना सीधे तौर पर फायदेमंद साबित होगा. भारतीय एक्सपोर्टर्स यानी निर्यातकों के प्रॉडक्ट्स अमेरिकी उपभोक्ताओं को सस्ते पड़ेंगे, जिससे भारतीय एक्सपोर्ट में तेजी आ सकती है. इससे अमेरिका के साथ भारत का ट्रेड डेफिसिट यानी व्यापार घाटा भी काफी कंट्रोल होगा.
वेनेजुएला से तेल आयात का असर!
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा है कि भारत रूस से कच्चा तेल खरीदना बंद करेगा और उसकी बजाय अमेरिका और वेनेजुएला से ज्यादा तेल खरीदेगा. जानकारों के मुताबिक, अगर ऐसा होता है तो भारत के तेल आयात की तस्वीर बदल सकती है. हालांकि अमेरिकी तेल आमतौर पर रूसी तेल के मुकाबले महंगा होता है. हालांकि वेनेजुएला से आयात होने वाला तेल सस्ता हो सका है.
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