Government Decision on Silver: केंद्र सरकार ने देश में चांदी के आयात को लेकर एक सख्त कदम उठाया. सरकार ने चांदी के इम्पोर्ट को तत्काल प्रभाव से फ्री कैटेगरी से हटाकर रिस्ट्रिक्टेड कैटेगरी में डाल दिया है. ये फैसला ऐसे समय पर आया है, जब कुछ ही दिनों पहले सरकार ने सोना और चांदी पर आयात शुल्क को 6% से बढ़ाकर 15% कर दिया था. सरकार के इस कदम का सीधा मकसद बढ़ते आयात को नियंत्रित करना, घरेलू बाजार को संतुलित रखना और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव को कम करना है. लेकिन, इस फैसले से सर्राफा बाजार और चांदी के व्यापारियों में हलचल तेज हो गई है.

Government Decision on Silver
जमीनी हकीकत: दिल्ली के बड़े कारोबारी की जुबानी
इस पाबंदी का जमीनी स्तर पर चांदी के व्यापारियों और ज्वेलर्स पर क्या असर पड़ेगा? इसे समझने के लिए हमने दिल्ली की सबसे पुरानी दुकानों में से एक बेली राम चिमन लाल जैन सिल्वर ज्वैलर्स, जो 1971 से चांदी के कारोबार में हैं, के मालिक अभिनव से बातचीत की. दुकान के अंदर चारों तरफ चांदी की खूबसूरत मूर्तियां और बर्तन सजे हैं. काउंटरों पर 1 किलोग्राम और 500 ग्राम के चमचमाते सिल्वर बार्स रखी हुई हैं..
असर एक दो-दिन में होगा साफ
बेली राम सिल्वर ज्वैलर्स के मालिक अभिनव ने सरकार के इस फैसले और बाजार की मौजूदा स्थिति पर खुलकर अपनी बात रखी. अभिनव का कहना है कि इस फैसले का सटीक असर एक-दो दिनों में साफ होगा, लेकिन हमारे बिजनेस पर इसका असर पड़ना तय है. कीमतें पहले से ही आसमान छू रही हैं, जिससे ग्राहकों की संख्या में लगभग 50% की भारी गिरावट आई है. ज्वैलरी इंडस्ट्री के लिए ये साल पहले से ही काफी खराब चल रहा है. अभिनव ने आगे कहा कि चांदी की सप्लाई कम होने से सीधे तौर पर मैन्यूफैक्चरिंग प्रभावित होगी. इस इंडस्ट्री से लाखों कारीगर जुड़े हुए हैं और बाजार में फैल रही ये नेगेटिविटी उनके भविष्य के लिए अच्छी नहीं है.
कारोबारी अभिनव के अनुसार भारत में ड्यूटी बढ़ने की वजह से चांदी महंगी हो गई है, जबकि विदेशों में ये अब भी सस्ती है. ऐसे में जो प्रवासी भारतीय पहले भारत से चांदी खरीदते थे, अब वो यहां से खरीदारी करने से बचेंगे.
देशहित में पीएम मोदी के साथ
कारोबारी अभिनव ने देशहित में पीएम मोदी के इस फैसले का समर्थन भी किया. उन्होंने देश की जनता से अपील करते हुए कहा कि पीएम ने जो फैसला लिया है, वो देश हित में है. हमारी लोगों से अपील है कि घरों और मंदिरों में जो बिना इस्तेमाल की हुई चांदी रखी है, उसे बाहर निकालें. जब वो चांदी बाजार में आएगी और रिसाइकल होगी, तो हम उसे नया रूप देकर बेच सकेंगे. इससे देश को नई सिल्वर इंपोर्ट करने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी. सरकार के इंपोर्ट नियमों को कड़ा करने और आयात शुल्क में भारी बढ़ोतरी के बाद, आने वाले दिनों में चांदी की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है.
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