विज्ञापन

चांदी 60% महंगी, 2.5 लाख से रिकॉर्ड 4 लाख के पार कीमतें- क्यों बेतहाशा महंगी हुई चांदी? समझें पूरा गणित

चांदी की कीमत दिसंबर में 2.5 लाख रुपये थी. अब यह 4 लाख के पार पहुंच गई है. एक महीने में 60% तो एक साल में इसमें करीब 280% का इजाफा देखा गया है. आखिर क्या हैं वजहें कि चांदी की कीमत बेतहाशा तेजी से बढ़ रही है?

चांदी 60% महंगी, 2.5 लाख से रिकॉर्ड 4 लाख के पार कीमतें- क्यों बेतहाशा महंगी हुई चांदी? समझें पूरा गणित
NDTV
  • चांदी की कीमतें आसमान छू रही हैं क्योंकि अब इसकी मांग सिर्फ गहनों तक सीमित नहीं है.
  • चांदी अब गहनों के साथ-साथ सोलर पैनल, मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और EV उद्योग की अहम धातु बन चुकी है.
  • भारत चांदी के लिए आयात पर निर्भर है, इसलिए वैश्विक दबाव सीधे घरेलू कीमतों को प्रभावित कर रहा है.
क्या हमारी AI समरी आपके लिए उपयोगी रही?
हमें बताएं।

29 दिसंबर को चांदी की कीमत 2.50 लाख रुपये प्रति किलो थी. इसी महीने (जनवरी) की 16 तारीख को चांदी ने एक महीने के दौरान 30% की बढ़त देखी थी. उसके एक दिन पहले ही इसमें अचानक 15 हजार रुपये का उछाल आया था. तब कीमत करीब 3 लाख रुपये पर थी. अब सिर्फ दो हफ्ते बाद गुरुवार (29 जनवरी 2026) को चांदी की कीमत ने रिकॉर्ड 4 लाख के स्तर को छू लिया है. इस साल जनवरी में 60% तो बीते एक साल में इसमें करीब 280 फीसद का उछाल आया है.

एक दिन पहले बुधवार (28 जनवरी) को MCX चांदी 2.4% बढ़कर 3,64,821 रुपये प्रति किलोग्राम पर खुली और 3,83,100 रुपये प्रति किलोग्राम के रिकॉर्ड स्तर को छुआ था. यानी एक ही दिन में इसमें रिकॉर्ड 18279 रुपये का इजाफा देखा गया. यह एक रिकॉर्ड था.  बीते कुछ महीनों के दौरान चांदी की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि हुई है. 

इसकी कीमतें किस कदर बढ़ रही हैं इसका उदाहरण गुरुवार को एक बार फिर देखने को मिला जब एक ही दिन में इसमें करीब 10% से अधिक का इजाफा देखा गया. मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX पर इसकी कीमत 4.27 लाख रुपये प्रति किलो पहुंच गई.

ये भी पढ़ें: Gold-Silver Price Today: चांदी पहली बार 4 लाख के पार, सोने ने भी तोड़ा रिकॉर्ड, जानें आज क्या है ताजा भाव?

Latest and Breaking News on NDTV

Photo Credit: ANI

क्यों बढ़ रही हैं चांदी की कीमतें?

आखिर क्या वजह है कि चांदी की कीमत में पिछले एक साल से भी अधिक समय से बेतहाशा वृद्धि हो रही है?

इसकी तात्कालिक वजह आर्थिक अनिश्चितता, बढ़ते अमेरिकी कर्ज और बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव हैं. विभिन्न देशों के सेंट्रल बैंक सोना खरीद रहे हैं. अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों में बदलाव नहीं किया है जिससे  जारी फेडरल रिज़र्व ने इंटरेस्ट रेट्स में कोई बदलाव नहीं किया. डॉलर की कमजोर होती कीमतों से भी इसकी कीमत पर असर पड़ा. वहीं सबसे बड़ी बात यह भी है कि इसकी सप्लाई में कमी है जबकि मांग में तेजी तो अर्थव्यवस्था के मांग और आपूर्ति के नियमों के मुताबिक इसमें तेजी आना स्वाभाविक भी है. साथ ही बढ़ती कीमतों की वजह से भी चांदी की मांग में बढ़ोतरी देखी जा रही है.

हालांकि इसकी दीर्घकालिक वजह के बारे में जानकार बताते हैं कि आज चांदी का उपयोग केवल निवेश या गहने के तौर पर नहीं होता बल्कि कई उद्योंगों में इसकी जरूरत बढ़ गई है. इसकी खपत स्मार्टफोन, सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक वाहनों और अन्य आधुनिक तकनीकों में बढ़ रही है, जिससे इसकी मांग लगातार सप्लाई को पार कर गई है. 

भारत में चांदी का पारंपरिक उपयोग गहनों में बहुत पुराना है. शादियों, त्योहारों और अन्य महत्वपूर्ण अवसरों पर चांदी के गहने और सिक्के लोकप्रिय रहे हैं. बेशक भारत में चांदी की खपत का एक बड़ा हिस्सा आभूषणों के क्षेत्र में होता है, खास कर त्योहारों के दरम्यान, पर औद्योगिक मांग की हिस्सेदारी भी लगातार बढ़ रही है. चलिए देखते हैं किन-किन उद्योगों में बढ़ती चांदी की खपत का असर इसकी कीमत पर पड़ा है.

ये भी पढ़ें: Gold vs Silver Return: सोने में पैसा लगाएं या चांदी में? एक्सपर्ट ने सब कुछ बता दिया

Latest and Breaking News on NDTV

Photo Credit: AFP

सोलर पैनल

अमेरिका स्थित गैर-लाभकारी अंतरराष्ट्रीय संस्था 'द सिल्वर इंस्टीट्यूट' के मुताबिक आज चांदी का सबसे तेजी से बढ़ता उपयोग सौर पैनलों में हो रहा है. द सिल्वर इंस्टीट्यूट की इस रिपोर्ट के अनुसार 2024 में पूरी दुनिया में फोटोवोल्टिक सिल्वर (पीवी सिल्वर) की मांग कुल चांदी के खपत का 29% था, जो उससे पहले केवल 11% था.  सोलर पैनलों के सिलिकॉन सेल में चांदी का उपयोग मुख्य रूप से सिल्वर पेस्ट के रूप में होता है, जो इलेक्ट्रॉनों को कनेक्ट करने और बिजली को प्रभावी रूप से कंडक्ट करने में मदद करता है. एक औसत सोलर पीवी पैनल में लगभग 15–20 ग्राम चांदी इस्तेमाल होता है. 

अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) और इंटरनैशनल रिन्यूएबल एनर्जी एजेंसी IRENA की 2025-26 की रिपोर्ट के अनुसार सौर ऊर्जा की खपत लगातार बढ़ रही है.

भारत में 2014 में केवल 2.6 गीगावाट सौर ऊर्जा का उत्पादन होता था, 2020 में यह 35 गीगावाट तक पहुंच गया. वहीं अगले चार साल में इसमें दोगुना से भी अधिक बढ़त देखने को मिली,जो 2024 में 85 गीगावाट तक पहुंच गया. 2026 में इसके 100 से अधिक गीगावाट पहुंचने की उम्मीद है. तो भारत में जैसे-जैसे सौर ऊर्जा उत्पादन बड़े स्केल पर हो रहा है, इसका स्ट्रक्चरल प्रभाव चांदी की खपत पर पड़ रहा है. यानी जैसे-जैसे सौर ऊर्जा की खपत बढ़ रही है, चांदी की कुल खपत भी उतनी ही तेजी से बढ़ रही है.

ये भी पढ़ें: दुनिया में कहां हैं चांदी के सबसे बड़े भंडार, जानें किस देश के पास है सबसे ज्यादा रिजर्व

Latest and Breaking News on NDTV

Photo Credit: AFP

मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स

चांदी का एक और बड़े मांग वाला क्षेत्र है स्मार्टफोन, टैबलेट्स, लैपटॉप और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण.

प्रिंटेड सर्किट बोर्ड (पीसीबी) में कॉन्टैक्ट्स के कॉन्ड्यूसिव पाथ तैयार करने में, RFID एंटेना और सर्किट कनेक्शन में, सेंसर स्विच और कनेक्टर्स के अलावा कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में चांदी का इस्तेमाल होता है. इसका कारण, इसकी अत्यधिक निम्न प्रतिरोधकता यानी अल्ट्रा-लो रेजिस्टिव नेचर और लंबे समय तक टिके रहने की क्षमता का होना है. 

आज लगभग हर आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस में चांदी मिलती है. फिर चाहे वो मोबाइल हो या कंप्यूटर, टीवी हो या कोई भी स्मार्ट डिवाइस, हर साल बड़े पैमाने पर इनका उत्पादन बढ़ रहा है और चांदी की खपत भी उसी अनुपात में बढ़ता जा रहा है.

Latest and Breaking News on NDTV

Photo Credit: AFP

इलेक्ट्रिक वाहन (EVs) और ऑटोमोबाइल

जब बात इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) की बात आती है, तो चांदी इनमें कई जगहों पर इस्तेमाल की जाती है. बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स और इन्वर्टर, वायरिंग एवं हाई-कंडक्टिविटी स्विच, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, सेंसर और इलेक्ट्रिकल कॉन्टैक्ट्स यानी बिजली के जोड़ में इसका उपयोग होता है.

सिल्वर इंस्टीट्यूट ने अपनी 2021 की रिपोर्ट में बताया था कि इलेक्ट्रॉनिक व्हिकल के आने से वाहनों में चांदी की खपत और बढ़ जाएगी. इसके मुताबिक एक सामान्य इंटरनल कंबशन इंजन वाले वाहन में 15 से 28 ग्राम चांदी इस्तेमाल की जाती है, वहीं हाइब्रिड गाड़ियों में यह 18-34 ग्राम तक लगाई जाती है और ईवी हो तो इसकी खपत 25-50 ग्राम तक हो सकती है. यानी पारंपरिक ICE (इंटरनल कंबशन इंजन) वाली गाड़ियों की तुलना में इलेक्ट्रॉनिक वाहनों में करीब 67% से 79% अधिक चांदी की खपत होती है. 

Latest and Breaking News on NDTV

Photo Credit: AFP

चांदी में उछाल और बढ़ती औद्योगिक मांग

चांदी की कीमत 2025 में 80000–85000 रुपये प्रति किलो के स्तर से बढ़कर 4 लाख रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है. एक्सपर्ट्स की मानें तो चांदी का औद्योगिक भाग अब कुल मांग का करीब 60% तक पहुंच चुका है, और यह सोना या अन्य कीमती धातुओं को पार कर रहा है. 

भारत खुद चांदी का बड़ा उत्पादक देश नहीं है. यहां बड़ी मात्रा में चांदी की खपत आयात पर निर्भर है. द इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक 2025 में भारत ने करीब  9.2 बिलियन डॉलर (लगभग 75 हजार करोड़ रुपये से अधिक) कीमत का चांदी आयात किया, पिछले साल (2024) के मुकाबले 44% अधिक है. इस तरह भारत चांदी का एक बड़ा आयातक देश बन चुका है. 

वर्ल्ड इंटिग्रेटेड ट्रेड सॉल्यूशन के मुताबिक 2023 में भारत ने सबसे अधिक चांदी चीन, यूनाइटेड किंगडम, यूएई, हॉन्ग कॉन्ग और रूस से खरीदा. चीन में एक बड़ा प्रोसेसिंग सेंटर है जहां से बने-बनाए उत्पाद भारत तक पहुंचते हैं. वहीं इंडिया-यूएई कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रिमेंट के तहत भारत को यूएई से कम टैरिफ पर चीजें मिलती हैं.

Latest and Breaking News on NDTV

Photo Credit: AFP

अमेरिका में चांदी

यूएस जियोलॉजिकल सर्वे की मिनरल कमोडिटी समरी के मुताबिक 2024 में अमेरिका में कुल चांदी के खपत का 30 फीसद हिस्सा फिजिकल इन्वेस्टमेंट बार पर किया गया. चांदी के कुल खपत का करीब 29% इलेक्ट्रिक गाड़ियों और इलेक्ट्रॉनिक्स पर किया गया. फोटोवोल्टिक्स (PV) यानी सोलर पैनल में 12% और इतना ही चांदी के सिक्के और पदकों में किया गया. वहीं ज्वेलरी और चांदी के बर्तनों पर  6%और फोटोग्राफी में 7% चांदी का इस्तेमाल किया गया. यूएस गोल्ड ब्यूरो के मुताबिक फिलहाल अमेरिका में एक औंस (31.1 ग्राम) चांदी की कीमत 92.48 डॉलर है.

यहां एक बात जानना जरूरी है कि चांदी का एक बड़ा हिस्सा अन्य धातुओं जैसे कॉपर, लेड, जिंक और गोल्ड के खानों से बायप्रोडक्ट के रूप में मिलता है. इसका मतलब स्पष्ट है कि चाहे मांग कितनी भी अधिक क्यों न हो इसकी सप्लाई उतनी तेजी से नहीं बढ़ाई जा सकती. अब चूंकि वैश्विक सप्लाई लगभग स्थिर बनी हुई हैं पर भारत जैसे देश में इसकी मांग में इजाफा हुआ है तो कीमतें लगातार ऊपर की ओर जा रही हैं. सोलर पैनलों, ईवी और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के उत्पादन में वृद्धि के साथ ही चांदी की डिमांड और भी बढ़ती जाएगी लिहाजा वैश्विक और भारतीय दोनों बाजारों में चांदी की कीमतें ऊपर की ओर जा रही हैं. कुल मिलाकर चांदी अब केवल सजावटी धातु नहीं बल्कि बड़े स्तर पर उद्योग और तकनीकी धातु बन चुकी है.

क्या गिरेंगी कीमतें?

हालांकि, चांदी की बढ़ती कीमतों के बीच इसके निवेशकों को रिच डैड पुअर डैड सीरीज के लेखक रॉबर्ट कियोसाकी ने आगाह किया है कि हो सकता है इसकी कीमतें अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हों और आने वाले वक्त में भले ही इसमें लंबे समय तक तेजी देखने को मिले पर उससे पहले गिरावट का सामना करना पड़ सकता है. सोशल मीडिया एक्स पर कियोसाकी ने निवेशकों से सावधान रहने का आग्रह करते हुए यह भी लिखा कि बड़े पैमाने पर इसकी बिक्री से अंत में बाजार क्रैश भी हो सकता है.

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com