वैश्विक तेल बाजार से एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. सऊदी अरब, जो दुनिया को सबसे ज्यादा तेल बेचता है, ने एक ऐसा बड़ा फैसला लिया है, जिस पर पूरी दुनिया के एनर्जी मार्केट की नजरें जम गईं हैं. ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के अनुसार सऊदी अरब की सरकारी तेल कंपनी सऊदी अरामको ने एशिया के ग्राहकों के लिए अपने क्रूड ग्रेड की कीमतों में 26 सालों की सबसे बड़ी कटौती कर दी है. अरामको ने अगस्त डिलीवरी के लिए कच्चे तेल की कीमतों में सीधे 11 डॉलर प्रति बैरल का डिस्काउंट किया है. एक्सपर्ट्स जितने की उम्मीद कर रहे थे, सऊदी ने उससे कहीं बड़ी कटौती कर सभी को हैरान कर दिया.
सऊदी अरब ने क्यों लिया ये बड़ा फैसला?
मालूम हो कि ग्लोबल मार्केट में ये बड़ी गिरावट ऐसे समय में आई है जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की सप्लाई में तेजी से सुधरी है. अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते के बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते दुबारा खुल गए, जिसकी वजह से मिडिल ईस्ट से कच्चे तेल की सप्लाई बाजार में आ गई है. जब बाजार में तेल की कमी पूरी हुई, तो एशियाई रिफाइनर्स को अपनी ओर खींचने के लिए सऊदी अरब को ये बड़ा दांव खेलना पड़ा. फिलहाल ब्रेंट क्रूड की कीमतें गिरकर करीब 72 डॉलर प्रति बैरल के लेवल पर हैं, जो इस साल फरवरी के बाद का सबसे लो लेवल है.
भारत के लिए लॉटरी!
सऊदी अरब के इस फैसले का सीधा और बड़ा फायदा भारत को मिलने वाला है. भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए करीब 85 फीसदी कच्चे तेल का हिस्सा दूसरे देशों से खरीदता है. साथ ही भारत के लिए सऊदी अरब हमेशा से बड़े तेल सप्लायर्स में से एक रहा है. कच्चे तेल की कीमतों में 11 डॉलर प्रति बैरल की बड़ी कटौती से भारत को कई मोर्चों पर सीधा फायदा मिलेगा. मसलन-
- तेल सस्ता मिलने से सरकार को कच्चा तेल खरीदने के लिए विदेशी मुद्रा कम खर्च करनी पड़ेगी. इससे देश का चालू खाता घाटा कम होगा और भारतीय रुपया मजबूत होगा.
- भारतीय तेल कंपनियां अब सऊदी से काफी सस्ते दामों पर कच्चा तेल खरीद सकेंगी. कच्चे माल सस्ता होने से देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कमी जल्दी देखने को मिल सकती है.
- भारत में ट्रांसपोर्टेशन लगभग डीजल के जरिए ही होता है. इसलिए अगर डीजल की कीमतें कम होती हैं, तो रोजमर्रा के सामानों की ढुलाई कंपनियों के लिए सस्ती पड़ेगी, जिससे देश में रिटेल महंगाई कम होने की उम्मीद है.
जंग के बाद से 90% तक बढ़ा एक्सपोर्ट
सऊदी अरामको ने फारस की खाड़ी में मौजूद अपने बड़े लोडिंग पॉइंट रास तनूरा बंदरगाह से एक्सपोर्ट फिर से पूरी ताकत से शुरू कर दिया है. जंग और टेंशन के दिनों में अरामको ने अपने शिपमेंट को रेड सी की तरफ मोड़ दिया था, लेकिन अब हालात ठीक होने पर सऊदी ने अपने क्रूड शिपमेंट को जंग से पहले के लेवल के करीब 90% तक बढ़ा दिया है.
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