Petrol Diesel Prices cut soon or not: हर दिन जब आप अपनी गाड़ी में पेट्रोल या डीजल भरवाने जाते हैं तो एक बार कीमतों पर नजर जरूर पड़ती है. मोबाइल स्क्रॉल करते हुए या फिर टीवी न्यूज चैनल देखते हुए कभी-कभी आपके मन में खयाल आता है कि जैसे.... पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने की खबर आई थी, काश उसी तरह पेट्रोल-डीजल के दाम कम होने की भी खबर आ जाए. पेट्रोल-डीजल कब सस्ता होगा, ये सवाल करोड़ों लोगों के मन में है और गुरुवार को यही सवाल देश के पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी से भी किया गया. उन्होंने इस सवाल के साथ कई अन्य सवालों के भी जवाब दिए. साथ ही ये भी बताया कि किन रणनीतियों की बदौलत मिडिल ईस्ट संकट के दौरान भी भारत पर होर्मुज स्ट्रेट का ज्यादा असर नहीं पड़ा.
क्या कम होंगे पेट्रोल-डीजल के दाम?
आप अगर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में राहत की उम्मीद कर रहे है तो आपको अभी और इंतजार करना पड़ सकता है. केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इस सवाल का जवाब देते हुए कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में तेल की खुदरा कीमतें घटाने का कोई औचित्य नहीं है.
तेल की कीमतों पर प्रतिक्रिया देते हुए पुरी ने कहा कि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव के बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें काफी हद तक स्थिर बनी हुई हैं.

'4 साल में महज इतनी बढ़ी कीमतें'
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि पिछले चार वर्षों में पेट्रोल की कीमतों में केवल 5.58 प्रतिशत और डीजल की कीमतों में 6.23 प्रतिशत की ही बढ़ोतरी हुई है. उन्होंने कहा कि सरकारी तेल मार्केटिंग कंपनियां (OMC) अभी भी करीब 2.18 लाख करोड़ रुपए के संचयी अंडर-रिकवरी (घाटे) की भरपाई कर रही हैं. इसके अलावा, इन कंपनियों के पास अभी भी ऐसे ईंधन का स्टॉक मौजूद है, जिसे तब खरीदा गया था जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें काफी अधिक थीं. ऐसे में फिलहाल पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में कटौती करना व्यावहारिक नहीं है.
केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा कि सरकार ने अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में आए उतार-चढ़ाव का प्रभाव भारतीय उपभोक्ताओं पर काफी हद तक नहीं पड़ने दिया. उन्होंने हाल ही में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास उत्पन्न तनाव का उल्लेख करते हुए कहा कि उस दौरान भी देश में कहीं भी ईंधन आपूर्ति बाधित नहीं हुई.
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1 लाख से ज्यादा पेट्रोल पंप नहीं सूखे!
उन्होंने कहा, 'देश के किसी भी पेट्रोल पंप पर ईंधन खत्म होने (ड्राई-आउट) की स्थिति नहीं आई.' केंद्रीय मंत्री के अनुसार, देश भर में मौजूद करीब 1.07 लाख पेट्रोल पंप पूरे संकट के दौरान सामान्य रूप से संचालित होते रहे. उन्होंने कहा कि सरकार ने वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव से पैदा हुए अधिकांश झटकों को खुद वहन किया, जिससे आम लोगों पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ा.
पुरी ने कहा कि सरकार देश के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को और मजबूत करने की दिशा में लगातार काम कर रही है. उन्होंने बताया कि 2030 तक भारत की रिफाइनिंग क्षमता बढ़कर 309.5 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष (MMTPA) होने का लक्ष्य है.
उन्होंने बताया कि इस दिशा में कई रिफाइनरी विस्तार परियोजनाएं और नई ग्रीनफील्ड रिफाइनरियां विकसित की जा रही हैं, जिनमें से कुछ परियोजनाएं अगले दो वर्षों में पूरी होने की उम्मीद है, जिससे देश की ऊर्जा सुरक्षा और रिफाइनिंग क्षमता दोनों मजबूत होंगी.
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