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रुपया संभला! रिकॉर्ड निचले स्तर से ऊपर चढ़ी भारतीय करेंसी, डॉलर के मुकाबले दबाव अब भी बरकरार

Rupee vs dollar: वैश्विक बाजारों में अमेरिकी डॉलर की मांग लगातार बढ़ रही है. 'सेफ हेवन' एसेट के तौर पर डॉलर इंडेक्स 100 के करीब बना हुआ है, जिससे रुपये पर दबाव देखा जा रहा है.

रुपया संभला! रिकॉर्ड निचले स्तर से ऊपर चढ़ी भारतीय करेंसी, डॉलर के मुकाबले दबाव अब भी बरकरार
Rupee Record Fall: रुपया निचले स्‍तर से संभला

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान पर हमलों को 5 दिनों के लिए टालने के ऐलान के बाद मंगलवार को भारतीय रुपया (Rupee) अमेरिकी डॉलर के मुकाबले थोड़ी मजबूती के साथ खुला. पिछले सत्र में 93.98 के अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर बंद होने के बाद, आज रुपया 93.64 के स्तर पर कारोबार करता देखा गया.

बाजार में 'राहत' पर 'भरोसा' कम

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशकों ने युद्ध टलने की खबर का स्वागत तो किया है, लेकिन वे अब भी पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं. रुपया सोमवार को 0.37% की भारी गिरावट के साथ 93.95 के पार चला गया था. हालांकि आज इसमें सुधार दिखा है, लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि जब तक युद्ध पूरी तरह खत्म होने के संकेत नहीं मिलते, डॉलर के मुकाबले रुपये में बड़ी रिकवरी मुश्किल है.

एक्‍सपर्ट ने बताए रुपये पर दबाव के 3 बड़े कारण

  • महंगा कच्चा तेल: भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर तेल आयात करता है. मिडिल ईस्ट में तनाव के कारण तेल की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं, जिससे भारत का 'इंपोर्ट बिल' बढ़ गया है और डॉलर की मांग बढ़ रही है.
  • महंगाई का डर: विशेषज्ञों के अनुसार, अगर तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहीं, तो इससे देश में महंगाई बढ़ सकती है, जिससे भारत की आर्थिक ग्रोथ पर बुरा असर पड़ेगा.
  • कमजोर इकोनॉमिक इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर: एलकेपी सिक्योरिटीज के रिसर्च एनालिस्ट जतीन त्रिवेदी के मुताबिक, जब तक भू-राजनीतिक तनाव और ऊर्जा की कीमतें कम नहीं होतीं, रुपया कमजोर बना रहेगा.

आप पर क्या होगा असर?

रुपये के दबाव का सीधा असर आपकी जेब पर भी पड़ सकता है. रुपये की गिरावट के चलते आयात महंगा होगा तो इलेक्ट्रॉनिक्स, मोबाइल फोन और कच्चा तेल आयात करना महंगा हो जाएगा. अगर तेल कंपनियों की लागत बढ़ती है, तो आने वाले समय में पेट्रोल-डीजल के दामों में बढ़ोतरी की आशंका बनी रहती है. वहीं दूसरी ओर विदेश में पढ़ाई कर रहे छात्रों और वहां घूमने जाने वाले लोगों का खर्च बढ़ जाएगा क्योंकि अब $1 के बदले उन्हें ज्‍यादा पैसे देने होंगे.

आगे क्या है अनुमान?

बाजार के जानकारों का अनुमान है कि आने वाले समय में रुपया 93.25 से 94.25 के दायरे में रह सकता है. हालांकि ट्रंप ने ईरान के साथ 'सकारात्मक बातचीत' का दावा किया है, लेकिन ईरान की संसद के स्पीकर ने किसी भी बातचीत से इनकार किया है. इस विरोधाभास ने बाजार में अनिश्चितता बढ़ा दी है.

RBI की भूमिका पर नजर

बाजार सूत्रों का कहना है कि रुपये को और ज्यादा गिरने से रोकने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) दखल दे सकता है. आरबीआई अपने विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) से डॉलर बेचकर रुपये की गिरावट को थामने की कोशिश कर सकता है. हालांकि, मौजूदा वैश्विक अनिश्चितता को देखते हुए रुपया फिलहाल दबाव में ही रहने का अनुमान है.

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