Rice Sowing: इस साल दक्षिण-पश्चिम मॉनसून सीजन के दौरान धान की बुआई में आई गिरावट को लेकर चिंता बढ़ रही है. कृषि मंत्रालय ने शुक्रवार, 18 सितंबर को खरीफ फसलों की बुआई की ताजा स्थिति जारी की है. आंकड़ों के मुताबिक देश में सबसे बड़ी गिरावट चावल यानी धान की बुआई के रकबे में दर्ज की गई है.
पिछले साल 18 सितंबर तक देशभर में 445.92 लाख हेक्टेयर इलाके में धान की बुआई हो चुकी थी. इस साल इसी तारीख तक ये घटकर 429.28 लाख हेक्टेयर रह गई है.
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यानी एक साल में धान की बुआई का क्षेत्रफल 16.64 लाख हेक्टेयर या 3.73% कम हुआ है.
किन राज्यों में धान की बुआई सबसे ज्यादा घटी?
कृषि मंत्रालय के मुताबिक धान की बुआई में गिरावट मुख्य रूप से कई बड़े धान उत्पादक राज्यों में रकबा घटने की वजह से आई है.
8 सितंबर 2026 तक उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक कर्नाटक में धान की बुआई में सबसे ज्यादा कमी दर्ज की गई. इसके बाद तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों का नंबर है.
कर्नाटक में 4.28 लाख हेक्टेयर कम हुई बुआई. तेलंगाना में 3.61 लाख हेक्टेयर, आंध्र प्रदेश में 1.91 लाख हेक्टेयर और तमिलनाडु में 1.32 लाख हेक्टेयर कम खेती हुई.
उत्तर प्रदेश में 1.84 लाख हेक्टेयर, मध्य प्रदेश में 1.75 लाख हेक्टेयर, झारखंड में 1.38 लाख हेक्टेयर और महाराष्ट्र में 1.15 लाख हेक्टेयर कम बुवाई हुई है.
इन राज्यों में धान के रकबे में आई कमी का असर देश के कुल बुआई आंकड़े पर पड़ा है.

कम पानी वाली फसलों की ओर शिफ्ट कर रहे किसान?
धान की बुआई में गिरावट को सिर्फ उत्पादन में संभावित कमी के तौर पर देखना सही नहीं होगा. ऑल इंडिया राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के महासचिव अजय भलोटिया ने NDTV से कहा कि खरीफ सीजन में धान प्रमुख फसल है, लेकिन उत्पादन में 3.73% की कमी फिलहाल बड़ी चिंता की बात नहीं है.
उन्होंने कहा कि देश के पास पहले से पर्याप्त बफर स्टॉक है. उनके मुताबिक अगर किसान धान की जगह दूसरी फसलों की बुआई कर रहे हैं, तो इसकी एक वजह ऐसी फसलों की ओर जाना हो सकती है जिनमें कम पानी की जरूरत होती है.
यानी धान के रकबे में गिरावट का एक पहलू फसल पैटर्न में बदलाव भी हो सकता है.

सिर्फ धान ही नहीं, कुल खरीफ बुआई भी घटी
कृषि मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं कि इस साल सिर्फ धान की बुआई ही कम नहीं हुई है. देश में महत्वपूर्ण खरीफ फसलों का कुल बुआई क्षेत्र भी पिछले साल के मुकाबले घटा है.
18 सितंबर 2025 तक देश में कुल 1118.95 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुआई हुई थी. इस साल 18 सितंबर तक ये क्षेत्रफल घटकर 1103.90 लाख हेक्टेयर रह गया.
इस तरह कुल खरीफ फसलों की बुआई में 15.05 लाख हेक्टेयर यानी 1.35% की गिरावट दर्ज की गई है.
हालांकि सभी फसलों में गिरावट नहीं है.
दालों की बुआई बढ़ी, तिलहन लगभग स्थिर
कृषि मंत्रालय के आंकड़ों में दालों की बुआई का रकबा बढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है. इस साल दालों की बुआई में 1.71 लाख हेक्टेयर की बढ़ोतरी दर्ज की गई है.
वहीं तिलहन फसलों का बुआई क्षेत्र लगभग पिछले साल के बराबर रहा है.
इससे संकेत मिलता है कि खरीफ सीजन में कुल बुआई भले ही कम हुई हो, लेकिन फसलों के बीच इसका असर एक जैसा नहीं है.
कम बारिश का कितना असर?
दक्षिण-पश्चिम मॉनसून खरीफ फसलों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. इस साल मॉनसून सीजन के दौरान कुछ राज्यों को छोड़कर कई राज्यों में औसत से कम बारिश दर्ज की गई है.
धान जैसी फसल के लिए पानी की उपलब्धता महत्वपूर्ण होती है. ऐसे में कमजोर बारिश का असर बुआई के फैसले पर पड़ सकता है.
यही वजह है कि इस साल धान की बुआई का रकबा पिछले साल के मुकाबले कम रहा है.
हालांकि, धान की बुआई में 3.73% की कमी का मतलब सीधे तौर पर चावल की सप्लाई में उतनी ही कमी होना नहीं है. उत्पादन पर वास्तविक असर फसल की पैदावार, मौसम की आगे की स्थिति और अन्य कारकों पर भी निर्भर करेगा.
क्या चावल की सप्लाई पर असर पड़ेगा?
ऑल इंडिया राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के महासचिव अजय भलोटिया के मुताबिक फिलहाल धान के रकबे में आई कमी से सप्लाई चेन या किसानों पर बड़ा असर पड़ने की उम्मीद नहीं है. इसकी एक वजह देश में मौजूद बफर स्टॉक भी है.
हालांकि, आगे चलकर खरीफ सीजन के वास्तविक उत्पादन और उपलब्ध स्टॉक की स्थिति महत्वपूर्ण होगी.
फिलहाल कृषि मंत्रालय के आंकड़े यही बताते हैं कि धान की बुआई में 16.64 लाख हेक्टेयर की कमी आई है, जबकि कुल खरीफ फसलों का रकबा भी 15.05 लाख हेक्टेयर कम है.
दूसरी तरफ दालों की बुआई बढ़ी है और तिलहन का रकबा लगभग स्थिर है. ऐसे में इस साल के खरीफ सीजन की तस्वीर सिर्फ कुल बुआई में गिरावट से नहीं, बल्कि अलग-अलग फसलों के बीच बदलते बुआई पैटर्न से भी समझनी होगी.
अब देखिए ये वीडियो:
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