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RBI के फैसले से झटका, आपके होम लोन और कार लोन तक बढ़ेगी EMI, साढ़े तीन साल बाद बड़ा फैसला

RBI ने 2025 में कुल 125 बेसिस पॉइंट की चार कटौतियां की थीं. इसके बाद लंबे समय तक दरों को स्थिर रखा गया. ये साढ़े तीन साल बाद पहली बढ़ोतरी है. पॉलिसी रेपो दर अब 5.25 से बढ़कर 5.50 फीसदी हो गई है.

RBI के फैसले से झटका, आपके होम लोन और कार लोन तक बढ़ेगी EMI, साढ़े तीन साल बाद बड़ा फैसला
RBI MPC Meeting: गवर्नर संजय मल्‍होत्रा ने फैसलों के बारे में बताया

5 अक्‍टूबर से चली मॉनिटरी पॉलिसी मीटिंग के बाद भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की कमिटी ने ब्‍याज दरों पर बड़ा फैसला लिया है. तीन दिन तक चली मीटिंग के बाद RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि ब्‍याज दरों में 25 बेसिस प्‍वाइंट की बढ़ोतरी का फैसला लिया गया है. अब ब्‍याज दर 5.25 से बढ़कर 5.50 फीसदी हो गई है.

आपके लिए इसका साफ मतलब ये हुआ कि रेपो रेट से लिंक्‍ड होम लोन, कार लोन या अन्‍य तरह के कर्ज की EMI बढ़ जाएगी. नया कर्ज लेना भी लोगों के लिए महंगा हो जाएगा. 

उन्‍होंने बताया कि ब्याज दरों में बढ़ोतरी के फैसले को एमपीसी के छह सदस्यों में से चार का समर्थन प्राप्त है. ब्याज दरों में बढ़ोतरी के अलावा, RBI मौद्रिक नरमी के अपने रुख से भी पीछे हटा है. केंद्रीय बैंक ने अपना रुख बदलकर 'संतुलित सख्ती' कर लिया है. 

GDP ग्रोथ तेज होगी पर महंगाई भी बढ़ेगी

RBI के मुताबिक, वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भी घरेलू आर्थिक गतिविधियां मजबूत बनी हुई हैं. GDP ग्रोथ के मोर्चे पर अच्‍छी खबर ये है कि FY 2027 में देश की ग्रोथ 7.1 फीसदी रह सकती है. हालांकि महंगाई के मोर्चे पर आम लोगों को झटका लग सकता है. गवर्नर संजय मल्‍होत्रा ने बताया कि देश में महंगाई बढ़ सकती है.

वित्त वर्ष 2027 के लिए रियल GDP ग्रोथ 7.1% रहने का अनुमान जताया गया है, जो पहले 6.7% आंकी गई थी. वहीं CPI महंगाई चिंता का विषय बनी हुई है. पूरे वित्त वर्ष के लिए CPI महंगाई 5.2% रहने का अनुमान है.

आगे भी ब्‍याज दरों में कटौती की संभावना नहीं 

आरबीआई गवर्नर ​​ने कहा कि बाहरी चुनौतियों और बढ़ती महंगाई के जोखिमों को देखते हुए निकट भविष्य में ब्याज दरों में कटौती की कोई संभावना नहीं है. उन्होंने कहा कि ब्याज दरें तय करने वाली समिति या तो दरों को स्थिर रखेगी या उन्हें बढ़ाने का फैसला करेगी, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि व्यापक आर्थिक परिस्थितियां कैसे बदलती हैं.

बता दें कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और ऊंची कच्चे तेल की कीमतें भी महंगाई के लिए जोखिम बढ़ा रही हैं. महंगा क्रूड भारत की महंगाई पर दबाव डालने के साथ चालू खाते के घाटे को भी प्रभावित कर सकता है. भारत की खुदरा महंगाई अगस्त में बढ़कर 4.82% हो गई, जबकि जुलाई में ये 4.45% थी. सरकार ने RBI को CPI आधारित खुदरा महंगाई को 4% के लक्ष्य के आसपास रखने की जिम्मेदारी दी है, जिसमें 2% ऊपर या नीचे की गुंजाइश रहती है.

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