5 अक्टूबर से चली मॉनिटरी पॉलिसी मीटिंग के बाद भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की कमिटी ने ब्याज दरों पर बड़ा फैसला लिया है. तीन दिन तक चली मीटिंग के बाद RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि ब्याज दरों में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी का फैसला लिया गया है. अब ब्याज दर 5.25 से बढ़कर 5.50 फीसदी हो गई है.
उन्होंने बताया कि ब्याज दरों में बढ़ोतरी के फैसले को एमपीसी के छह सदस्यों में से चार का समर्थन प्राप्त है. ब्याज दरों में बढ़ोतरी के अलावा, RBI मौद्रिक नरमी के अपने रुख से भी पीछे हटा है. केंद्रीय बैंक ने अपना रुख बदलकर 'संतुलित सख्ती' कर लिया है.
साढ़े 3 साल बाद बढ़ी ब्याज दरें
फरवरी 2023 के बाद केंद्रीय बैंक ने पहली बार रेपो रेट में बढ़ोतरी की है. आरबीआई ने यह कदम वैश्विक अनिश्चितताओं और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच देश की अर्थव्यवस्था और महंगाई को काबू में रखने के लिए उठाया है.
केंद्रीय बैंक ने बताया कि स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी (एसडीएफ) दर को बढ़ाकर 5.25 प्रतिशत कर दिया गया है, जबकि मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (एमएसएफ) दर और बैंक रेट को 5.75 प्रतिशत पर समायोजित किया गया है.
रेपो रेट में इस बढ़ोतरी से बैंकों के लिए कर्ज लेना महंगा हो जाएगा, जिसका सीधा असर आम जनता पर पड़ेगा, क्योंकि होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की ब्याज दरें बढ़ने से मासिक किस्तें (EMI) महंगी हो सकती हैं.
GDP ग्रोथ तेज होगी पर महंगाई भी बढ़ेगी
RBI के मुताबिक, वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भी घरेलू आर्थिक गतिविधियां मजबूत बनी हुई हैं. GDP ग्रोथ के मोर्चे पर अच्छी खबर ये है कि FY 2027 में देश की ग्रोथ 7.1 फीसदी रह सकती है. हालांकि महंगाई के मोर्चे पर आम लोगों को झटका लग सकता है. गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि देश में महंगाई बढ़ सकती है.
वित्त वर्ष 2027 के लिए रियल GDP ग्रोथ 7.1% रहने का अनुमान जताया गया है, जो पहले 6.7% आंकी गई थी. वहीं CPI महंगाई चिंता का विषय बनी हुई है. पूरे वित्त वर्ष के लिए CPI महंगाई 5.2% रहने का अनुमान है.
मौद्रिक नीति की घोषणा करते हुए गवर्नर मल्होत्रा ने कहा कि वैश्विक स्तर पर महंगाई में दोबारा तेजी आने की आशंका है, जिसके कारण दुनिया के कई प्रमुख केंद्रीय बैंक मौद्रिक नीति को और सख्त करने की दिशा में कदम उठा रहे हैं.
यह बढ़ोतरी ऐसे समय में की गई है जब भारत सहित दुनिया भर में महंगाई को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं. पश्चिम एशिया में जारी तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई हैं, जिससे वैश्विक और घरेलू महंगाई पर दबाव बढ़ा है.
महंगाई के आंकड़े भी RBI की चिंता बढ़ा रहे हैं. अगस्त में CPI महंगाई बढ़कर 4.82 प्रतिशत हो गई थी, जो जुलाई में 4.45 प्रतिशत थी. इसके अलावा अल नीनो प्रभाव और कम वर्षा के कारण रबी फसल उत्पादन पर भी जोखिम बना हुआ है.
आगे भी ब्याज दरों में कटौती की संभावना नहीं
आरबीआई गवर्नर ने कहा कि बाहरी चुनौतियों और बढ़ती महंगाई के जोखिमों को देखते हुए निकट भविष्य में ब्याज दरों में कटौती की कोई संभावना नहीं है. उन्होंने कहा कि ब्याज दरें तय करने वाली समिति या तो दरों को स्थिर रखेगी या उन्हें बढ़ाने का फैसला करेगी, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि व्यापक आर्थिक परिस्थितियां कैसे बदलती हैं.
होम लोन पर असर को लेकर क्या बोले जानकार?
काउंटी ग्रुप के निदेशक अमित मोदी के अनुसार, त्योहारी मौसम में ब्याज दरों का स्थिर रहना घर खरीदने वालों के भरोसे के लिए महत्वपूर्ण होता है. रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी से होम लोन की ईएमआई बढ़ जाएगी. इसका असर खास तौर पर पहली बार घर खरीदने वाले और कीमत को लेकर अधिक संवेदनशील लोगों पर पड़ सकता है.
कुशाग्र अंसल, डायरेक्टर, अंसल हाउसिंग ने कहा, 'रेपो रेट बढ़ने का सीधा असर होम लोन की लागत पर पड़ता है. कुछ लोग घर खरीदने का फैसला कुछ समय के लिए टाल सकते हैं. लेकिन अगर बढ़ोतरी सीमित है तो इसका असर पूरे रियल एस्टेट बाजार पर बहुत अधिक नहीं होगा. जिन बाजारों में घरों की मांग मजबूत है, वहां खरीदार मामूली बढ़ोतरी के बावजूद खरीदारी जारी रख सकते हैं.'
मिगसन ग्रुप के निदेशक यश मिगलानी ने कहा, 'ब्याज दर रियल एस्टेट में मांग को प्रभावित करने वाला एक महत्वपूर्ण कारक है, लेकिन यह अकेला कारक नहीं है. आज खरीदार बेहतर स्थान, अच्छी कनेक्टिविटी, आधुनिक सुविधाओं और भरोसेमंद डेवलपर को भी महत्व दे रहे हैं. इसलिए रेपो रेट में सीमित बढ़ोतरी से बाजार की रफ्तार कुछ धीमी हो सकती है, लेकिन मांग में बड़ी गिरावट जरूरी नहीं है.'
'मकान की कीमतें संतुलित रखें डेवलपर्स'
सिक्का ग्रुप के चेयरमैन हरविंदर सिंह सिक्का के अनुसार, 'ब्याज दर बढ़ने से डेवलपर्स के लिए कीमतों को संतुलित रखना जरूरी होगा. इसके साथ आसान भुगतान योजना और खरीदारों के लिए सुविधाजनक विकल्प दिए जा सकते हैं. इससे बढ़ी हुई ईएमआई का कुछ असर कम किया जा सकता है. मजबूत वित्तीय स्थिति वाले डेवलपर्स के लिए ऐसी स्थिति को संभालना अपेक्षाकृत आसान होगा.'
अमोघ बंसल, एमडी, MUREC ने कहा, 'रियल एस्टेट में खरीदारों की पसंद लगातार बदल रही है. अब अच्छी तरह से योजनाबद्ध प्रोजेक्ट, बड़े और बेहतर डिजाइन वाले घर, गुणवत्ता और बेहतर जीवनशैली से जुड़ी सुविधाओं की मांग बढ़ रही है.'
वहीं, रजत गोयल, मैनेजिंग डायरेक्टर, MRG Group ने कहा, 'महंगाई को नियंत्रित करने और आर्थिक गतिविधियों को बनाए रखने के बीच संतुलन रखना जरूरी है. रियल एस्टेट के लिए कर्ज की लागत में स्थिरता और स्पष्टता महत्वपूर्ण है, क्योंकि घर खरीदना लंबे समय का फैसला होता है और खरीदारों की पसंद भी लगातार बदल रही है. डेवलपर्स को आज के होमबायर्स की जरूरतों के अनुसार बेहतर और सुनियोजित प्रोजेक्ट विकसित करने पर ध्यान देने में मदद मिलेगी.'
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