Multibagge Share: एक अप्रैल 2026 को कीमत 350 रुपये प्रति शेयर के करीब थी और आज 30 सितंबर को शेयर प्राइस 1,200 रुपये के पार पहुच गई है. आज 30 सितंबर को शेयर ने 1,234 रुपये का हाई लेवल टच किया. ये 252.57% की भारी ग्रोथ दिखाता है. यानी महज 6 महीने पहले आपने इस शेयर में आपने एक लाख रुपये लगा दिए होते तो आज ये रकम साढ़े तीन लाख से ज्यादा हो जाती.
हम बात कर रहे हैं, रेमंड के शेयरों (Raymond Shares) की. एक अप्रैल को अगर किसी ने इसके 300 शेयर खरीदे हों यानी 1.05 लाख रुपये लगाए हों तो आज इस निवेश की वैल्यू 3.70 लाख रुपये हो गई होगी. यानी सीधे तौर पर 2.65 लाख रुपये का फायदा.
चलिए अब इस ग्रोथ के पीछे की स्टोरी भी समझ लेते हैं.
रेमंड के कारोबार में बदलाव
इस तेजी के पीछे कंपनी के कारोबार में हो रहा बदलाव अहम है. रेमंड अब पारंपरिक ऑटो कंपोनेंट्स और प्रिसिजन टेक्नोलॉजी के साथ-साथ एयरोस्पेस और डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग में तेजी से विस्तार कर रही है.
कंपनी के एयरोस्पेस कारोबार की ग्रोथ और ज्यादा मार्जिन ने निवेशकों का ध्यान खींचा है. इसके साथ मजबूत तिमाही नतीजे और मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाने की योजना भी कंपनी की ग्रोथ स्टोरी का हिस्सा है.
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1,000 करोड़ रुपये का कैपेक्स प्लान
रेमंड ने अगले पांच साल के लिए करीब 1,000 करोड़ रुपये के कैपेक्स की योजना बनाई है. इसमें करीब 510 करोड़ रुपये एयरोस्पेस और डिफेंस के लिए और लगभग 430 करोड़ रुपये प्रिसिजन टेक्नोलॉजी और ऑटो कंपोनेंट्स के लिए रखे गए हैं.
कंपनी की मौजूदा मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स करीब 85-90% क्षमता पर चल रही हैं. ऐसे में आगे की वॉल्यूम ग्रोथ के लिए नई क्षमता जरूरी होगी.
कंपनी बेंगलुरु एयरपोर्ट के पास एक ग्रीनफील्ड फैसिलिटी भी विकसित कर रही है, जिसमें कमर्शियल प्रोडक्शन 2027 के अंत तक शुरू होने का लक्ष्य है.
Share Chart: अब चार्ट में देख लीजिए रेमंड के शेयर कैसे चढ़ते गए
एयरोस्पेस कारोबार 40% बढ़ा
Q1 FY27 में रेमंड के एयरोस्पेस और डिफेंस कारोबार का रेवेन्यू सालाना आधार पर 40% बढ़कर 123 करोड़ रुपये हो गया.
- इस कारोबार का EBITDA 25% बढ़कर 26 करोड़ रुपये रहा, जबकि EBITDA मार्जिन 21.2% रहा.
- इसके मुकाबले प्रिसिजन टेक्नोलॉजी और ऑटो कंपोनेंट्स कारोबार का EBITDA मार्जिन 13.8% था.
- यानी एयरोस्पेस कारोबार अभी छोटा है, लेकिन इसकी ग्रोथ और मार्जिन दोनों ज्यादा हैं.
अगर इस सेगमेंट की हिस्सेदारी बढ़ती है तो कंपनी के कुल अर्निंग्स मिक्स में भी बदलाव आ सकता है.
दुनिया के बड़े एयरक्राफ्ट इंजिन मेकर्स को सप्लाई
रेमंड के मुताबिक, कंपनी दुनिया के तीन सबसे बड़े एयरक्राफ्ट इंजन मैन्युफैक्चरर्स को कंपोनेंट्स सप्लाई करती है. ये तीन कंपनियां मिलकर ग्लोबल एयरक्राफ्ट इंजन मार्केट का 88% हिस्सा रखती हैं.
- कंपनी ने अब तक 1,300 से ज्यादा प्रिसिजन एयरो-इंजन पार्ट्स विकसित किए हैं.
- इनमें LEAP इंजन के अलग-अलग वेरिएंट के लिए 350 से ज्यादा कंपोनेंट्स शामिल हैं.
- एयरोस्पेस कारोबार में इंजन-क्रिटिकल पार्ट्स सेगमेंट का योगदान 75% से ज्यादा है.
- वहीं, कमर्शियल एविएशन से 86% रेवेन्यू आता है, जबकि डिफेंस और दूसरे एविएशन कारोबार की हिस्सेदारी 14% है.
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5,960 करोड़ रुपये का ऑर्डर बुक
- रेमंड के एयरोस्पेस कारोबार के पास 5,960 करोड़ रुपये से ज्यादा का ऑर्डर बुक है, जो करीब 10 साल में फैला हुआ है.
- इसके अलावा कंपनी के पास 1,632 करोड़ रुपये की RFQ यानी Request for Quotation पाइपलाइन है.
- कंपनी के तीन सबसे बड़े इंजन OEM ग्राहक उसके ऑर्डर बुक का करीब 40-45% हिस्सा रखते हैं.
- एयरोस्पेस प्रोग्राम की लंबी अवधि के कारण एक बार किसी कंपोनेंट को क्वालिफाई करके रेगुलर प्रोडक्शन में शामिल कर लिया जाता है, तो उससे कई साल तक रेवेन्यू मिल सकता है.
डिफेंस में भी बढ़ रहा फोकस
रेमंड भारत की डिफेंस सप्लाई चेन में भी अपनी मौजूदगी बढ़ा रही है. कंपनी ने प्रिसिजन डिफेंस कंपोनेंट्स का मास प्रोडक्शन शुरू कर दिया है और प्रमुख डिफेंस एयरोस्पेस OEMs से अपने पहले बिल्ड-टू-स्पेसिफिकेशन ऑर्डर भी हासिल किए हैं.
इससे कंपनी के दोनों इंजीनियरिंग कारोबार के लिए एक और ग्रोथ चैनल खुल सकता है.
ऑटो कॉम्पोनेंट्स भी मजबूत
रेमंड का दूसरा कारोबार JK Maini Precision Technology है.
- Q1 FY27 में इसका रेवेन्यू 11.5% बढ़कर 444 करोड़ रुपये रहा, जो एक साल पहले 398 करोड़ रुपये था.
- EBITDA 45.5% बढ़कर 61 करोड़ रुपये हो गया और मार्जिन 13.8% रहा.
- कंपनी के मुताबिक, एक्सपोर्ट ग्रोथ, बेहतर प्रोडक्ट मिक्स, ऑपरेटिंग लीवरेज और लागत घटाने के उपायों से मार्जिन में सुधार हुआ.
- इस सेगमेंट के करीब 61% रेवेन्यू इंटरनेशनल मार्केट्स से आया.
- JK Maini के पास भारत के पैसेंजर व्हीकल रिंग गियर मार्केट में 55% हिस्सेदारी और स्टील फाइल्स में 65% हिस्सेदारी है.
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शेयर में 230% तेजी के बाद वैल्युएशन भी अहम
रेमंड के शेयर में छह महीने में 230% से ज्यादा की तेजी के बाद अब निवेशकों के लिए कंपनी की ग्रोथ को वास्तविक अर्निंग्स में बदलना अहम होगा.
कंपनी के शेयर का P/E मल्टीपल 46 गुना बताया गया है, जबकि इसके करीबी पीयर Sansera Engineering का P/E 84 गुना है.
कंपनी के सामने एयरोस्पेस प्रोग्राम की लंबी अवधि, एक्सपोर्ट पर निर्भरता, कुछ बड़े ग्राहकों पर निर्भरता, कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और जियोपॉलिटिकल घटनाक्रम जैसे जोखिम भी हैं.
आगे रेमंड की ग्रोथ इस बात पर निर्भर करेगी कि कंपनी अपने 5,960 करोड़ रुपये के एयरोस्पेस ऑर्डर बुक, डिफेंस के नए अवसरों और करीब 1,000 करोड़ रुपये के कैपेक्स को कितनी तेजी से रेवेन्यू और अर्निंग्स में बदल पाती है.
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