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Who was Vijaypat Singhania: रेमंड के 'कंप्‍लीट मैन', पद्म विभूषण, गगनचुंबी विश्व रिकॉर्ड! शख्‍स नहीं शख्सियत विजयपत सिंघानिया की कहानी

Vijaypat Singhania Death News: विजयपत सिंघानिया सिर्फ बोर्डरूम के सुल्तान नहीं थे; उनके भीतर एक ऐसा परिंदा था जिसे ऊंचाइयों से प्यार था. जब वे व्यापार से थकते, तो आसमान का रुख करते. जब उड़े तो विश्व रिकॉर्ड ही कायम कर दिया.

Who was Vijaypat Singhania: रेमंड के 'कंप्‍लीट मैन', पद्म विभूषण, गगनचुंबी विश्व रिकॉर्ड! शख्‍स नहीं शख्सियत विजयपत सिंघानिया की कहानी
Raymond Founder Vijaypat Singhania Story: विजयपत सिंघानिया की पूरी कहानी

Vijaypat Singhania Raymond Founder Passes Away: जिनकी बुनी हुई पोशाक पहनकर भारतीय पुरुषों ने खुद को 'द कंप्लीट मैन' महसूस करना शुरू किया, आज उस शख्सियत की जीवन-यात्रा का अंतिम अध्याय पूरा हो गया. रेमंड (Raymond) को एक ब्रांड नहीं, बल्कि भारतीय परिवारों की विरासत बनाने वाले पद्म भूषण डॉ विजयपत सिंघानिया अब हमारे बीच नहीं रहे. शनिवार रात 87 वर्ष की आयु में उन्होंने अंतिम सांस ली. उनके बेटे गौतम सिंघानिया ने एक भावुक पोस्ट के जरिए इस दुखद खबर की पुष्टि की.

विजयपत सिंघानिया न केवल एक उद्योगपति रहे, बल्कि उनकी जांबाजी के किस्‍से भी खूब चर्चा में रहे. एयरक्राफ्ट से आसमान को भेदने वाले 'सिंघानिया साब' के नाम हॉट एयर बैलून में भी सबसे ऊंची उड़ान भरने का विश्वरिकॉर्ड दर्ज है. आज हम और आप, जो रेमंड के कपड़े पहनकर और पार्क एवेन्‍यू की परफ्यूम मारकर निकलते हैं, तो इस कॉन्फिडेंस के पीछे की दशकों की कहानी भी जान लेनी चाहिए. ताकि  शख्‍स से शख्सियत बने विजयपत सिंघानिया की कामयाबी के किस्‍से हमारे जेहन में रह जाए. 

कंबल की मिल से 'साम्राज्य' तक का सफर

विजयपत सिंघानिया की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है. ये कहानी शुरू होती है साल 1900 में ठाणे की एक छोटी सी वुलन मिल से, जहां कभी सेना के लिए कंबल बनते थे. राजस्थान से कानपुर और फिर मुंबई आए सिंघानिया परिवार ने जब इस मिल को खरीदा, तो किसी ने नहीं सोचा था कि एक दिन यह दुनिया का सबसे बड़ा सूट निर्माता बनेगा.

1980 में जब विजयपत सिंघानिया ने कमान संभाली, तो उन्होंने इसे पारंपरिक मिल से निकालकर एक ग्लोबल ब्रांड में बदल दिया. 'फील्स लाइक हैवन' और 'द कंप्लीट मैन' जैसे विज्ञापनों ने रेमंड को सिर्फ कपड़ा नहीं, बल्कि एक 'इमोशन' बना दिया. 1986 में उन्होंने 'पार्क एवेन्यू' लॉन्च कर पुरुषों के फैशन की परिभाषा बदल दी और 1990 में भारत के बाहर पहला शोरूम खोलकर विदेशी कपड़ों को टक्कर दी.

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जब आसमान बना उनका दूसरा घर

विजयपत सिंघानिया सिर्फ बोर्डरूम के सुल्तान नहीं थे; उनके भीतर एक ऐसा परिंदा था जिसे ऊंचाइयों से प्यार था. जब वे व्यापार से थकते, तो आसमान का रुख करते. 1988 में उन्होंने अकेले (Solo) माइक्रोलाइट एयरक्राफ्ट से लंदन से अहमदाबाद तक 9,000 किलोमीटर का सफर तय कर दुनिया को दांतों तले उंगली दबाने पर मजबूर कर दिया.

साहस का यह सिलसिला यहीं नहीं रुका. 2005 में, 67 साल की उम्र में उन्होंने हॉट एयर बैलून के जरिए 69,852 फीट की ऊंचाई छूकर विश्व रिकॉर्ड बना दिया. वे सचमुच अंतरिक्ष की दहलीज तक होकर आए थे. उनके इसी शौर्य के कारण भारतीय वायुसेना ने उन्हें 'ऑनरेरी एयर कमोडोर' की उपाधि दी थी.

विजयपत सिंघानिया को उनके औद्योगिक और साहसिक योगदान के लिए देश के तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म भूषण से सम्मानित किया गया. 

उतार-चढ़ाव और संघर्ष का दौर

जीवन के आखिरी पड़ाव में विजयपत सिंघानिया की दुनिया में कुछ वैचारिक और संपत्ति संबंधी तूफान भी आए. साल 2015 में जब उन्होंने अपना पूरा 37% हिस्सा बेटे के नाम किया, तो उसके बाद उपजे संपत्ति विवाद ने पूरे देश का ध्यान खींचा. उन्होंने अपनी बायोग्राफी 'An Incomplete Life' (एक अधूरी जिंदगी) में भी इन संघर्षों का जिक्र किया था. हालांकि, समय के साथ कड़वाहट कम हुई और बेटे गौतम सिंघानिया के साथ उनके रिश्तों में सुधार आया और विवाद सुलझ गए.

आज जब उनका पार्थिव शरीर मुंबई के चंदनवाड़ी श्मशान घाट पर पंचतत्व में विलीन होगा, तो पीछे छूट जाएगी उनकी वो विरासत, जो हर उस धागे में महसूस की जाएगी जिसे पहनकर कोई इंसान खुद को 'कंप्लीट' महसूस करता है. वह 'कंप्लीट मैन' अब बादलों के पार अपनी अगली अनंत यात्रा पर निकल चुका है.

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