बद्रीनाथ में DJ पर फूटा मुरली मनोहर जोशी का गुस्सा तो स्थानीय लोगों ने दी चेतावनी-यहां भगवान विष्णु कर रहे तप

जिस बद्रीधाम में शंख बजाना वर्जित है, वहां भारी मशीनें और हेलिपैड शोर मचा रहे हैं. इसके साथ ही, पर्यटक गंदगी भी फैला रहे हैं, जो धर्म के खिलाफ है.

बद्रीनाथ में DJ पर फूटा मुरली मनोहर जोशी का गुस्सा तो स्थानीय लोगों ने दी चेतावनी-यहां भगवान विष्णु कर रहे तप
बद्रीनाथ में डीजे कल्चर को लेकर लोगों में नाराजगी है. (Photo: IANS)

उत्तराखंड के बद्रीनाथ के टूरिस्ट अराइवल प्लाजा पर 19 और 20 सितंबर 2026 को दो दिवसीय 'देवभूमि सांस्कृतिक महोत्सव' का आयोजन किया गया था. इस महोत्सव के दौरान तेज संगीत, डीजे और लोगों के नाचने के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए, जिसके बाद विवाद छिड़ गया. हिमालय प्रेमी और बद्रीनाथ के प्रति श्रद्धा रखने वाले लोगों ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है. बीजेपी के सीनियर नेता मुरली मनोहर जोशी ने सोशल मीडिया पर इस आयोजन की तीखी आलोचना करते हुए लिखा, "बद्रीनाथ धाम में संगीत समारोह (DJ Concert) को छूट दिया जाना न सिर्फ सांस्कृतिक मर्यादाओं का उल्लंघन है बल्कि धाम की पवित्रता पर भी सीधा आघात है. आदि गुरु शंकराचार्य महाराज जी द्वारा इस धाम की स्थापना हिमालयी पर्यावरण में शांतिपूर्ण तरीके से भगवत भजन के लिए की थी. गौर करने वाली है कि इस जगह पर शंख बजाना भी मना है लेकिन हम उसे भूलकर शोर शराबे वाले संगीत कार्यक्रमों का आयोजन कर भारतीय आध्यात्मिक, सांस्कृतिक, पर्यावरणीय मूल्यों की घोर उपेक्षा तो कर ही रहे हैं, साथ में इतनी ऊंचाई पर हजारों लोगों के नाचने से उनके स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों की भी उपेक्षा कर रहे हैं. यह इस बात का प्रतीक है कि अब देवभूमि को बाजारू संस्कृति के रूप में परिणीत किया जा रहा है."

मुरली मनोहर जोशी कहते हैं, "मैं भारतीय संस्कृति के अनुयायियों तथा विशेषकर पूजनीय शंकराचार्यों तथा महात्माओं से यह अनुरोध करता हूं कि वह संस्कृति के इस क्षरण को रोकने के लिए प्रभावी आवाज उठाएं, मैं केंद्र एवं राज्य सरकार से भी आग्रह करूंगा कि वह ऐसे आयोजनों पर प्रतिबंध लगा कर देवभूमि की मर्यादा को बनाए रखें. हिमालय देवात्मा है भगवान शंकर का निवास मां गंगा का उद्गम है, इसे नाच ग्रह बनाना करोड़ों भारतीयों की आस्था पर गहरा आघात है."

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मास्टर प्लान की मशीनों और हेली सेवा के शोर का क्या!

विवाद के बाद हमने बद्रीनाथ क्षेत्र के कुछ लोगों से बात की. माणा गांव के पूर्व प्रधान पीताम्बर सिंह मोलफा कहते हैं, "हमारा इलाका बहुत ही संवेदनशील है. यहां धार्मिक परंपराओं और स्थानीय लोगों की भावनाओं को समझे बिना कोई भी बड़ा कार्यक्रम करना ठीक नहीं है. बद्रीनाथ के अंदर तेज आवाज में भी शंख बजाना वर्जित है क्योंकि यहां भगवान विष्णु तपोवृत हैं, इसलिए तेज संगीत और डीजे के आयोजन को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है."

मोलफा कहते हैं कि चिपको आंदोलन से जुड़े चंडी प्रसाद भट्ट जी जैसे पर्यावरणविदों ने इस क्षेत्र के लिए काफी सुझाव दिए हैं, लेकिन मास्टरप्लान तैयार करते समय उनकी बातों को दरकिनार किया गया. मास्टर प्लान के तहत बड़ी-बड़ी मशीनें दिन-रात शोर कर रही हैं, हेली सेवा से जो शोर होता है, उस पर कोई बात नहीं करता.

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पीताम्बर सिंह मोलफा आगे कहते हैं कि अभी सेना को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है कि यह सांस्कृतिक कार्यक्रम उन्होंने किया. उनके मुताबिक सेना ने क्षेत्र के सुधार के लिए यह कार्यक्रम किया था और उसकी मंशा पर सवाल उठाने के बजाय यह देखना चाहिए कि कार्यक्रम के लिए जगह और उसका स्वरूप तय करने में जिम्मेदार लोगों की भूमिका क्या थी.

वे कहते हैं कि अगर इस कार्यक्रम को माणा में शांत तरीके से किया जाता तो शायद इतना बवाल नहीं होता. प्रियंका महर जैसी क्षेत्रीय कलाकार को भी इस विवाद के बाद सोशल मीडिया पर ट्रॉल किया जा रहा है. मोलफा का कहना है कि कलाकार को इस तरह निशाना बनाना ठीक नहीं है.

पीताम्बर के मुताबिक सेना की मंशा युवाओं और स्थानीय लोगों को जोड़ने की रही होगी, लेकिन कमी इस बात में रही कि कार्यक्रम से पहले प्रशासन ने स्थानीय लोगों के साथ पर्याप्त समन्वय नहीं किया. उनका कहना है कि स्थानीय लोगों से बातचीत होती और कार्यक्रम के स्थान, ध्वनि तथा स्वरूप को लेकर पहले ही सहमति बनाई जाती तो स्थिति इस तरह नहीं बिगड़ती.

वे कहते हैं कि बद्रीनाथ में सांस्कृतिक कार्यक्रम होने चाहिए, लेकिन उनका स्वरूप इस जगह की धार्मिक और पर्यावरणीय संवेदनशीलता के अनुरूप होना चाहिए. स्थानीय संस्कृति को सामने लाने के लिए स्थानीय कलाकारों और लोगों की भागीदारी बढ़ाई जानी चाहिए. इससे कार्यक्रम भी होगा और बद्रीनाथ की अपनी पहचान और मर्यादा भी बनी रहेगी.

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प्रशासन ने क्या कहा?

एएनआई के मुताबिक, चमोली के डीएम गौरव कुमार ने कहा कि भविष्य में बद्रीनाथ में ऐसे किसी भी कार्यक्रम पर रोक लगाई गई है. तीर्थस्थल की सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं के अनुकूल किसी भी कार्यक्रम के लिए एसडीएम से पूर्व अनुमति लेना जरूरी कर दिया गया है.

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अब केदारनाथ में कचरे का सवाल!

प्रदूषण का यह सवाल बद्रीनाथ तक ही नहीं रुकता है, बद्रीनाथ से केदारनाथ पहुंचते यह ध्वनि प्रदूषण से वायु प्रदूषण के रूप में दुष्प्रभाव छोड़ता जाता है. केदारनाथ क्षेत्र में स्थानीय लोग लंबे समय से पर्यावरण और बढ़ते पर्यटन के दबाव से जुड़ी समस्याओं की ओर ध्यान दिलाते रहे हैं. वहां सबसे बड़ी चिंताओं में कचरा प्रबंधन शामिल है.

विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, धाम के आसपास और यात्रा मार्ग पर साल-दर-साल रिकॉर्ड स्तर पर कचरा बढ़ रहा है. यह इस संवेदनशील हिमालयी क्षेत्र के पर्यावरण के लिए एक गंभीर चेतावनी है. स्थानीय निवासी खुलकर कचरा प्रबंधन पर अपनी बात रखते हैं.

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राजेश भट्ट त्रियुगीनारायण वन पंचायत के सरपंच हैं और उनका सोनप्रयाग में होटल भी है. उन्होंने कहा कि अभी कूड़ा उठाने की जो भी व्यवस्था प्रशासन ने की है, वह नाकाफी साबित हो रही है. होटल स्वामी अपने आसपास के कचरे को स्वयं साफ करते हैं. उन्होंने कहा कि त्रियुगीनारायण में कचरे के ढेर की बदबू मंदिर तक आने लगी है.

खाई में फेंके हुए कूड़े को उठाना असंभव है

जगत सिंह ग्राम पंचायत तोशी के पूर्व ग्राम प्रधान हैं और सीतापुर में एक होटल के मालिक भी. वे कहते हैं कि केदारनाथ क्षेत्र में सबसे बड़ी समस्या यह है कि लोग अपने सामान, जैसे पानी की बोतल को सीधे नीचे फेंक देते हैं. खाई में जाने पर उसे वापस इकट्ठा करना असंभव हो जाता है. बोतल के साथ खाने के सामान की पन्नी भी इस कूड़े में शामिल रहती है.

प्रशासन जितनी भी कोशिश कर ले, वह खाई में जाकर इस कूड़े को एकत्र नहीं कर सकता है. अगर ये सब ठीक करना है तो यात्रियों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करना जरूरी है और इसके बाद भी वे कूड़ा करें तो उन पर भारी जुर्माना लगाए जाने का प्रावधान होना चाहिए.

क्षेत्र में पहले से चली आ रही रिसाइकिल प्रक्रिया पर वह कहते हैं कि कूड़ा इतना हो जाता है कि रिसाइकिल से जुड़े कर्मचारी भी इस प्रक्रिया को निभाने में असमर्थ हो जाते हैं. अगर पहाड़ बचाने हैं तो तीर्थयात्रियों का अपने पर्यावरण को लेकर जागरूक होना ही सबसे जरूरी है.

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