विज्ञापन

एयर इंडिया से इंडिगो तक, ऐसे दूर होगी पायलटों की कमी! 200 की बजाय 100-120 घंटे की ट्रेनिंग, प्रस्‍ताव में और क्‍या?

Airlines Pilots Rules Draft: देश में पायलटों की कमी दूर करने के लिए एक बड़े एक्‍शन प्‍लान पर काम हो रहा है. पायलटों के प्रशिक्षण संबंधी नियमों में कुछ हद तक ढील देने का प्रस्‍ताव है. केंद्र सरकार की हाई लेवल कमिटी ने ड्राफ्ट तैयार कर लिया है. मंजूरी मिलने पर आपको भी फायदा होगा, कैसे... ये अंदर जानिए.

एयर इंडिया से इंडिगो तक, ऐसे दूर होगी पायलटों की कमी! 200 की बजाय 100-120 घंटे की ट्रेनिंग, प्रस्‍ताव में और क्‍या?
Ease of Pilot Rules Proposal: पायलटों के लिए नियमों में बदलाव का प्रस्‍ताव तैयार!
NDTV इंडिया ग्राफिक्‍स

देश की तमाम एयरलाइंस में पायलटों की कमी जगजाहिर है. इस कमी को दूर करने के लिए केंद्र की एक हाई लेवल कमिटी ने सिम्युलेटर-आधारित पायलट लाइसेंस का प्रस्ताव दिया है. NDTV के पास इस ड्राफ्ट रिपोर्ट की कॉपी है, जिसमें प्रस्‍ताव दिया गया है कि पायलटों के लिए 200 घंटे की बजाय 100 से 120 घंटों की ट्रेनिंग ही जरूरी हो. 'मल्टी-क्रू पायलट लाइसेंस' (MPL) की भी बात है और कुछ और नियमों में भी ढील दिए जाने का प्रस्‍ताव दिया गया है. इंडिगो, एयर इंडिया, अकासा एयर, स्‍पाइसजेट और अन्‍य एयरलाइंस से इस ड्राफ्ट पर प्रतिक्रिया देने को कहा गया है. इसके बाद समिति, DGCA रेगुलेटर के प्रमुख को अंतिम रिपोर्ट सौंप सकती है.

पिछले साल (दिसंबर 2025 में) जब इंडिगो में पायलट संकट हुआ तो हजारों लोगों को खामियाजा भुगतना पड़ा था. एविएशन रेगुलेटर DGCA ने पायलटों की थकान और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए नए FDTL (फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन) नियम लागू किए थे, जिसकी समय रहते तैयारी नहीं करने के चलते इंडिगो एयरलाइन ने 2,000 से ज्‍यादा फ्लाइट्स कैंसिल कर दी थी.

नियमों के तहत पायलटों का साप्ताहिक आराम 36 घंटे से बढ़ाकर 48 घंटे कर दिया गया था और रात की लैंडिंग सीमित कर दी गई. इससे इंडिगो के पास उड़ानों के‍ लिए पायलट पूरे नहीं पड़ रहे थे. साल 2024 में विस्‍तारा एयरलाइन को भी ऐसी ही दिक्‍कत झेलनी पड़ी थी. 

केंद्रीय कमिटी ने क्‍या दिया है प्रस्‍ताव? 

केंद्रीय समिति ने पायलट लाइसेंस का एक नया विकल्प प्रस्तावित किया है, जिसका मकसद पायलटों की कमी को दूर करना है. इस ड्राफ्ट रिपोर्ट के अनुसार, कमिटी ने क्रू की कमी को दूर करने के लिए सिम्युलेटर-आधारित पायलट लाइसेंस का प्रस्ताव दिया है. इस नए विकल्प के तहत ज्‍यादातर ट्रेनिंग सिम्युलेटर में होगी और कैडेट्स का असली विमान उड़ाने में लगने वाला समय कम हो जाएगा. 

आमतौर पर एक पायलट को कमर्शियल पायलट का लाइसेंस (CPL) पाने के लिए असली छोटे ट्रेनिंग फ्लाइट्स को आसमान में उड़ाते हुए टोटल कम से कम 200 घंटे का अनुभव पूरा करना जरूरी होता है, लेकिन नए सिम्युलेटर-आधारित (MPL) मॉडल के तहत, इसे घटाकर सिर्फ 100 से 120 घंटे कर दिया जाएगा. बाकी बचे हुए जरूरी घंटों की ट्रेनिंग आसमान के बजाय जमीन पर उन्नत कमर्शियल जेट सिम्युलेटर (Advanced Flight Simulators) के अंदर दी जाएगी. 

जिस 'मल्टी-क्रू पायलट लाइसेंस' (MPL) पर चर्चा हो रही है, उसे 2006 में संयुक्त राष्ट्र के 'इंटरनेशनल सिविल एविएशन ऑर्गनाइज़ेशन' ने शुरू किया था. पारंपरिक पायलट-ट्रेनिंग के तरीकों के अलावा यूरोप, एशिया और मध्य पूर्व के कई देशों ने इस सिस्‍टम को अपनाया है.

क्‍या होता है  MPL और सिम्युलेटर-आधारित लाइसेंस सिस्‍टम? 

विमानन नियामक DGCA की एक समिति ने जिस सिम्युलेटर-आधारित पायलट लाइसेंस का प्रस्ताव दिया है, उसे तकनीकी भाषा में मल्टी-क्रू पायलट लाइसेंस (MPL) भी कहा जाता है, जो पूरी तरह योग्यता (Competency) और सिम्युलेटर ट्रेनिंग पर केंद्रित होता है.  

फ्लाइट सिम्युलेटर एक हाई-टेक मशीन या केबिन होता है, जो हवा में नहीं, बल्कि जमीन पर ही बिल्कुल असली कमर्शियल फ्लाइट (जैसे एयरबस A320 या बोइंग 737) के कॉकपिट जैसा दिखता और महसूस होता है. इसमें बड़ी स्क्रीन, मोशन सिस्टम (हिलने-डुलने की तकनीक) और असली कंट्रोल लगे होते हैं. इसमें ट्रेनी पायलट को असली उड़ान जैसा अनुभव होता है और वो खराब मौसम, इंजन फेल होना या इमरजेंसी लैंडिंग जैसी जटिल स्थितियों का बिना किसी खतरे के प्रैक्टिस कर सकता है और प्रशिक्षित हो सकता है. 

मंजूरी मिली तो क्‍या फायदे होंगे? 

इस प्रस्ताव के पीछे का मुख्य उद्देश्य ट्रेनिंग का समय कम करना और देश में पायलटों की कमी दूर करना है. दरअसल, असली विमान उड़ाने के घंटों की अनिवार्यता कम होने से नए कैडेट कम समय में तैयार होकर सीधे एयरलाइंस को सेवा दे पाएंगे. वे कॉकपिट (कमर्शियल विमानों) में जाने के योग्य हो जाएंगे. 

एयरलाइंस की जरूरत के मुताबिक ये तैयारी फायदेमंद होगी. पारंपरिक CPL यानी कमर्शियल पायलट लाइसेंस में पायलट एकल (Single-pilot) विमान उड़ाना सीखता है. जबकि MPL मॉडल को सीधे एयरलाइंस के बड़े विमानों में दो पायलटों (Multi-crew) के तौर पर एक साथ काम करने के लिए ही डिजाइन किया गया है. 

एयर इंडिया और इंडिगो जैसी बड़ी एयरलाइंस लगातार सैकड़ों नए विमान खरीद रही हैं, लेकिन देश के फ्लाइंग स्कूल हर साल पर्याप्त संख्या में पायलट तैयार नहीं कर पा रहे हैं. इस प्रस्‍ताव को मंजूरी मिलने से पायलटों की पाइपलाइन तेज होगी. 

आखिर में फायदा आपका भी है. पायलटों की कमी की वजह से फ्लाइट कैंसिल होने जैसी स्थिति पैदा नहीं होगी और एयर पैसेंजर्स को परेशान नहीं होना पड़ेगा. 

खबर अपडेट हो रही है. 

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Pilot Training, Pilot Training Simulator, Pilot Training Manual, DGCA, Aviation Ministry
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com