Taxes Hike on Petrol-Diesel: केंद्र सरकार ने पेट्रोल, डीजल और एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) के निर्यात पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स की नई दरें जारी कर दी है. इस विंडफॉल टैक्स में SAED यानी स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी और RIC यानी रोड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर सेस शामिल हैं. वित्त मंत्रालय के रेवेन्यू डिपार्टमेंट की ओर से जारी नोटिफिकेशन के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों की औसत कीमतों की समीक्षा के आधार पर यह संशोधन किया गया है.
सरकार की ओर से एक्सपोर्ट ड्यूटी बढ़ाए जाने के बाद हर किसी के मन में यही सवाल उठता है कि क्या देश के अलग-अलग शहरों में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ जाएंगे, क्या पेट्रोल पंपों पर आप अपनी गाड़ी में तेल भरवाने जाएंगे तो क्या आपको पहले की तुलना में ज्यादा पैसे देने होंगे. इस सवाल का जवाब नीचे समझाया गया है. उससे पहले जान लीजिए, पेट्रोल, डीजल और जेट फ्यूल पर कितना टैक्स तय किया गया है.
पेट्रोल, डीजल और ATF पर कितना टैक्स
- सरकार के अधिसूचित नई दरों के तहत पेट्रोल के निर्यात पर ड्यूटी 1.50 रुपये प्रति लीटर तय की गई है. इसमें SAED 1.50 रुपये और RIC शून्य है.
- वहीं, डीजल के निर्यात पर कुल 25 रुपये प्रति लीटर का टैक्स लगेगा, जिसमें 24 रुपये SAED और 1 रुपये रोड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर सेस (RIC) शामिल है.
- इसके अलावा, विमान ईंधन यानी ATF के निर्यात पर 19 रुपये प्रति लीटर की दर से विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (SAED) तय किया गया है.
घरेलू उपभोक्ताओं पर नहीं पड़ेगा कोई असर
वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि एक्सपोर्ट लेवी में किए गए इस संशोधन का घरेलू बाजार में बिकने वाले पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा.
घरेलू खपत के लिए क्लीयर होने वाले पेट्रोल-डीजल पर लगने वाले मौजूदा केंद्रीय उत्पाद शुल्क में कोई बदलाव नहीं किया गया है, जिससे आम उपभोक्ताओं को कोई ज्यादा पैसे नहीं खर्च करने होंगे. इससे घरेलू परिवहन सेक्टर पर कोई अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं आएगा.
घरेलू बाजार में आपूर्ति सुरक्षित रखने का उद्देश्य
पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक संकट और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में अनिश्चितता को देखते हुए सरकार ने 27 मार्च 2026 से पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर यह लेवी लागू की थी. इस नीति का मुख्य उद्देश्य ये है कि तेल रिफाइनिंग कंपनियां घरेलू बाजार की मांग को अनदेखा न करे और मोटा कमाने के चक्कर में ज्यादा तेल निर्यात न करे. ऐसा करने से घरेलू मांग पूरी नहीं हो पाती है और कमी होने पर दाम में असंतुलन पैदा होता है.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं