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क्‍या महंगा होने वाला है पेट्रोल-डीजल? होर्मुज संकट और क्रूड ऑयल में तेजी के बीच एक्‍सपर्ट से समझें पूरा माजरा

PTI की रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारियों का कहना है कि अगर तेल आपूर्ति का मुख्य समुद्री रास्ता 'हॉर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) बंद भी हो जाता है, तो भारत को तुरंत कोई बड़ी परेशानी नहीं होगी. लेकिन तनाव लंबा खिंचा तो दिक्‍कत हो सकती है.

क्‍या महंगा होने वाला है पेट्रोल-डीजल? होर्मुज संकट और क्रूड ऑयल में तेजी के बीच एक्‍सपर्ट से समझें पूरा माजरा
Petrol Diesel Price Hike News: पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर ईरान पर हमले के बाद क्‍या असर होगा?
  • ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमले में सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई और तनाव बढ़ गया है
  • होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने की घोषणा से वैश्विक तेल सप्लाई का करीब 30 प्रतिशत हिस्सा प्रभावित हो सकता है
  • ईरान के पास वैश्विक तेल भंडार का करीब 12% हिस्सा है और वो हर दिन 1.3 से 1.5 मिलियन बैरल तेल निर्यात करता है
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ईरान पर अमेरिका और इजरायल का हमला, सुप्रीम लीडर खामेनेई की मौत और इधर फिर से वही सवाल तैरने लगा कि तेल की सप्‍लाई पर क्‍या असर होगा. न्‍यूज देखते-सुनते हुए घरों से लेकर नुक्‍कड़ तक, कई जगहों पर लोग ये चर्चा करते दिख रहे हैं कि क्‍या क्रूड ऑयल महंगा होने पर पेट्रोल-डीजल भी महंगा हो सकता है? हालांकि इसका तुरंत असर नहीं पड़ने वाला, लेकिन ये समझना जरूरी है कि इस तनाव भरे माहौल में तेल सप्‍लाई किस कदर प्रभावित होगी और क्‍या इसका असर भारत में भी दिखेगा. 

दरअसल, ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हमलों और उसके बाद की सैन्य कार्रवाई ने ग्‍लोबल टेंशन बढ़ा दी है. हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई है और ईरान ने भी सैन्‍य कार्रवाई तेज करने की चेतावनी दी है. इन घटनाक्रमों के बीच तेल स्‍पलाई को लेकर चिंता बढ़ी है. पश्चिम एशिया से जब भी युद्ध की खबरें आती हैं, कच्चे तेल की कीमतें चढ़ने की आशंका बढ़ने लगती है.   

पहले से ही चढ़ने लगा क्रूड

युद्ध की आशंका भर से कच्चे तेल के दाम उछलने लगे थे. रिपोर्ट्स के अनुसार, बीते शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड करीब 2.87% चढ़कर 73 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया. अब जब हालात और गंभीर हो गए हैं, तो एक्सपर्ट्स अगले हफ्ते तेज उछाल की आशंका जता रहे हैं.

CSIS यानी सेंटर फॉर स्‍ट्रैटजिक एंड इंटरनेशनल स्‍टडीज (Center for Strategic and International Studies) के मुताबिक, अगर ईरान टैंकर ट्रैफिक में रुकावट डालता है, तो ब्रेंट क्रूड 90 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जा सकता है. वहीं JP मॉर्गन चेज के एनालिसिस के अनुसार, मिडिल ईस्ट में गंभीर रुकावटें हुईं तो कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल का स्तर भी पार कर सकता है.

होर्मुज स्ट्रेट बाधित करने से तनाव  

तनाव का सबसे बड़ा केंद्र है Strait of Hormuz. रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने इस जलमार्ग को जहाजों के लिए बंद करने का ऐलान किया है. यह वही संकरा समुद्री रास्ता है, जिससे हर दिन वैश्विक तेल सप्लाई का लगभग 20–30% गुजरता है.

सऊदी अरब, इराक, यूएई, कुवैत और कतर जैसे बड़े उत्पादक देशों का तेल इसी रास्ते से एशियाई बाजारों- भारत, चीन, जापान और दक्षिण कोरिया- तक पहुंचता है. ऐसे में यहां किसी भी तरह की रुकावट का असर सीधे अंतरराष्ट्रीय दामों पर पड़ता है.

ईरान- तेल का बड़ा खिलाड़ी

आंकड़ों के मुताबिक, ईरान के पास 208–209 अरब बैरल का सिद्ध तेल भंडार है, जो वैश्विक रिजर्व का करीब 12% है. OPEC के आंकड़ों के अनुसार, ईरान रोजाना लगभग 3.1 से 3.5 मिलियन बैरल कच्चा तेल उत्‍पादन करता है और  प्रतिबंधों के बावजूद 1.3 से 1.5 मिलियन बैरल का निर्यात जारी रखता है.

कंसल्टेंसी फर्म FGE के अनुसार, ईरान की घरेलू रिफाइनिंग क्षमता करीब 2.6 मिलियन बैरल प्रतिदिन है और 2025 में उसने लगभग 8.2 लाख बैरल प्रतिदिन ईंधन उत्पादों का निर्यात किया. 2023 में ईरान का शुद्ध तेल निर्यात राजस्व 53 अरब डॉलर आंका गया, जो 2021 के 37 अरब डॉलर से काफी ज्यादा है.

चीन को लग सकता है बड़ा झटका!

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान के तेल निर्यात का 85-90% हिस् फिलहाल चीन को जाता है. ये आंकड़ा हर दिन करीब 10 लाख बैरल से ज्‍यादा का है. ऐसे में सप्लाई रुकने का सबसे बड़ा असर चीन पर पड़ सकता है, जिससे वैश्विक बाजारों में और अस्थिरता बढ़ सकती है.  जानकारों के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय कीमतों में तेज उछाल लंबे समय तक रहा तो पेट्रोल-डीजल महंगा होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता. हालांकि आखिरी फैसला टैक्स स्ट्रक्चर और सरकारी नीति पर निर्भर करता है. फिलहाल युद्ध की आग धधक रही है और तेल बाजार की हलचल पर विश्‍लेषकों की नजर बनी हुई है. 

तनाव लंबा खिंचा तो हो सकती है दिक्‍कत? 

समाचार एजेंसी PTI की रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारियों का कहना है कि अगर तेल आपूर्ति का मुख्य समुद्री रास्ता 'हॉर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) बंद भी हो जाता है, तो भारत को तुरंत कोई बड़ी परेशानी नहीं होगी. भारत के पास फिलहाल 10 दिनों की जरूरत का कच्चा तेल और 5 से 7 दिनों का अतिरिक्त ईंधन स्टॉक मौजूद है. 

हालांकि, इस तनाव का सीधा असर तेल की कीमतों पर दिखेगा. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत पहले ही 16% बढ़कर 73 डॉलर प्रति बैरल के पास पहुंच गई है और सप्लाई रुकने के डर से यह जल्द ही 80 डॉलर तक जा सकती है. भारत अपनी जरूरत का 88 प्रतिशत कच्चा तेल और लगभग आधी प्राकृतिक गैस विदेशों से मंगवाता है. दिलचस्प बात यह है कि भारत का 50 प्रतिशत कच्चा तेल और 60% गैस इसी हॉर्मुज रास्ते से होकर आती है, जो मुख्य रूप से इराक, सऊदी अरब और यूएई जैसे देशों से खरीदी जाती है.

अगर यह रास्ता थोड़े समय के लिए बंद होता है तो इसका खास असर नहीं पड़ेगा, लेकिन अगर रुकावट लंबी खिंचती है, तो भारत रूस जैसे अन्य देशों से तेल की खरीदारी बढ़ाकर अपनी जरूरतों को पूरा कर सकता है.

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