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Onion Price: 35 रुपये में 1 किलो प्‍याज, दिल्‍ली में 115 दुकानों पर मिलेगा, चेन्नई, गुवाहाटी, मदुरै भी पहुंचेगी कांदा एक्‍सप्रेस

प्याज की कीमतों में हर साल अगस्त-सितंबर में तेजी देखी जाती है, लेकिन इस बार दरें कुछ ज्‍यादा ही हैं. इसके पीछे त्योहारी मांग, मौसमी दिक्‍कतें, सप्लाई चेन जैसे कारण बताए गए. अब सरकार 35 रुपये किलो के भाव प्‍याज बेचेगी.

Onion Price: 35 रुपये में 1 किलो प्‍याज, दिल्‍ली में 115 दुकानों पर मिलेगा, चेन्नई, गुवाहाटी, मदुरै भी पहुंचेगी कांदा एक्‍सप्रेस
Onion Price: कहां-कहां मिलेगा सस्‍ता प्‍याज?
(NDTV File Photo)

प्याज की बढ़ती कीमतों के बीच सरकार ने कुछ बड़े कदम उठाए हैं. बाजार में प्‍याज की कमी न हो, इसके लिए सरकार ने अपना बफर स्‍टॉक निकालने का फैसला लिया है. कुछ शहरों में, जहां प्‍याज की कीमतें आसमान छू रही है, वहां ट्रेन के जरिये प्‍याज भेजा जा रहा है.  इनमें दिल्ली, चेन्नई, मदुरै, एर्नाकुलम और गुवाहाटी जैसे शहर शामिल हैं. क‍ृषि सहकारी संस्‍थाओं NAFED और NCCF के माध्‍यम से प्‍याज 35 रुपये/किलो के भाव बेचा जाएगा. 

उपभोक्ता मामलों की सचिव निधि खरे ने बताया कि प्‍याज की बढ़ती कीमतों पर काबू पाने के लिए केंद्र सरकार ने महाराष्ट्र के नासिक से प्रमुख खपत केंद्रों तक रेलवे रेक के जरिए प्याज का थोक परिवहन शुरू किया है. ‘कांदा एक्सप्रेस' के नाम से चल रही इस व्यवस्था के तहत बफर स्टॉक को बड़े शहरों में भेजा जा रहा है.सोमवार को यह जानकारी दी.

उन्होंने बताया कि इन रैक में लदा प्याज बुधवार तक चिह्नित केंद्रों पर पहुंचने की उम्मीद है. शुरुआती चरण में प्याज चेन्नई, मदुरै, दिल्ली, एर्नाकुलम और गुवाहाटी भेजा जाएगा. बाजार की जरूरत के अनुसार बाद में अन्य शहरों को भी इसमें शामिल किया जा सकता है.

35 रुपये किलो में बेचा जाएगा प्‍याज

नासिक में रखे सरकारी बफर स्टॉक को रेलवे रेक के जरिए थोक में खपत केंद्रों तक पहुंचाया जाएगा. वहां इसे थोक और खुदरा दोनों बाजारों में उतारा जाएगा. सरकारी एजेंसियां NCCF और NAFED खुदरा बाजार में प्याज को 35 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बेचेंगी.

निधि खरे ने कहा कि सरकार कीमतों पर लगातार नजर रख रही है और जरूरत पड़ने पर आगे भी कदम उठाए जाएंगे. उन्होंने कहा कि नासिक की मंडी में प्याज के भाव दिल्ली से ज्यादा चल रहे हैं, जबकि सामान्य तौर पर स्थिति इसके उलट होनी चाहिए. उनके मुताबिक, इसमें कार्टेलाइजेशन और सट्टेबाजी की भूमिका से इनकार नहीं किया जा सकता.

दिल्‍ली में 115 दुकानों में मिलेगा सस्‍ता प्‍याज 

इसी हफ्ते से दिल्ली और आसपास के इलाकों में 35 रुपये प्रति किलो के सस्ते रेट पर प्याज की बिक्री शुरू होगी.  सूत्रों के मुताबिक NCCF शुरुआत में दिल्ली और आसपास के इलाकों में अपने 10 रिटेल आउटलेट्स पर सस्ते रेट पर प्याज की बिक्री शुरू करेगा. साथ ही, भारत ब्रांड के 105 रिटेल शॉप्स पर भी NCCF इसी भाव पर प्‍याज उपलब्‍ध कराएगा. 

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एक साल में 59% महंगा हुआ प्याज

उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 24 अगस्त को देश में प्याज का औसत खुदरा भाव सालाना आधार पर 59 प्रतिशत बढ़कर 43.53 रुपये प्रति किलोग्राम हो गया. पिछले साल इसी अवधि में यह 27.37 रुपये प्रति किलोग्राम था.

इसी अवधि में प्याज का औसत थोक भाव 68 प्रतिशत बढ़कर 35.58 रुपये प्रति किलोग्राम हो गया, जबकि एक साल पहले यह 21.23 रुपये प्रति किलोग्राम था.

प्रमुख शहरों में सोमवार को चेन्नई में प्याज 60 रुपये प्रति किलोग्राम बिका. पिछले साल इसी समय चेन्नई में भाव 33 रुपये प्रति किलोग्राम था. दिल्ली में प्याज का खुदरा भाव 55 रुपये प्रति किलोग्राम रहा, जबकि एक साल पहले यह 35 रुपये था. कोलकाता में प्याज 53 रुपये प्रति किलोग्राम बिका.

1.21 लाख टन का बफर स्टॉक

प्याज का बफर स्टॉक केंद्र सरकार का रणनीतिक भंडार है. इसका इस्तेमाल आपूर्ति कम होने या कीमतों में तेज बढ़ोतरी के दौरान बाजार में हस्तक्षेप के लिए किया जाता है. यह स्टॉक मुख्य रूप से मूल्य स्थिरीकरण कोष के तहत NAFED और NCCF जैसी एजेंसियों के जरिए खरीदा जाता है.

सरकार के पास चालू वर्ष के लिए 1.21 लाख टन प्याज का बफर स्टॉक है. सरकार का कहना है कि यह घरेलू मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त है.

निधि खरे के अनुसार, आने वाले महीनों में घरेलू मांग को पूरा करने के लिए प्याज की उपलब्धता संतोषजनक बनी हुई है. वर्ष 2025-26 में प्याज का उत्पादन 307.37 लाख टन रहने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष के 307.67 लाख टन के लगभग बराबर है.

सरकार राज्यों में कीमतों, मंडी आवक और उपलब्धता की लगातार निगरानी कर रही है. मंत्रालय के अनुसार, स्थिर उत्पादन, बफर स्टॉक और समय पर बाजार हस्तक्षेप से मौसमी महंगाई का दबाव कम करने में मदद मिलेगी. साथ ही, सरकार उपभोक्ताओं और किसानों—दोनों के हितों के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश कर रही है.

अगस्त-सितंबर में बढ़ती है कीमत

प्याज की कीमतों में आम तौर पर अगस्त-सितंबर के दौरान तेजी देखी जाती है. इसके पीछे त्योहारी मांग, मौसम संबंधी व्यवधान, सप्लाई चेन में बदलाव और मांग के पैटर्न में बदलाव जैसे कारण होते हैं.

सरकार इस अवधि में बफर स्टॉक को थोक मंडी बिक्री और चुनिंदा शहरों में लक्षित खुदरा बिक्री के जरिए जारी करती है. किस शहर में कितना प्याज भेजना है, इसका फैसला बाजार भाव, आवक और स्थानीय मांग की लगातार निगरानी के आधार पर किया जाता है.

14 रैक से बढ़कर 86 हुई संख्या

‘कांदा एक्सप्रेस' पहल का उद्देश्य बड़े पैमाने पर प्याज की ढुलाई को अधिक तेज और प्रभावी बनाना है. इसे वित्त वर्ष 2024-25 में शुरू किया गया था. उस वर्ष करीब 12,000 टन प्याज वाले 14 रेलवे रेक पांच शहरों में भेजे गए थे.

वित्त वर्ष 2025-26 में इस व्यवस्था का विस्तार किया गया. इस दौरान करीब 88,000 टन प्याज लेकर 86 रेलवे रेक देश के 16 प्रमुख शहरों में भेजे गए.

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