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1 सिंतबर से शेयर और MF इंवेस्टर के लिए हो रहा बड़ा बदलाव, जानें अब नॉमिनी नहीं रजिस्टर्ड किया तो क्या होगा

SEBI की नई गाइडलाइंस के तहत, इन्वेस्टर्स नॉमिनेशन वाले हिस्से को खाली नहीं छोड़ सकते. अकाउंट खोलते समय या मौजूदा फोलियो के लिए, उन्हें या तो नॉमिनी की जानकारी देनी होगी.

1 सिंतबर से शेयर और MF इंवेस्टर के लिए हो रहा बड़ा बदलाव, जानें अब नॉमिनी नहीं रजिस्टर्ड किया तो क्या होगा
नॉमिनेशन के नियमों में बदलाव
NDTV इंडिया ग्राफिक्‍स

सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) ने मई महीने में सिंगल-होल्डर डीमैट अकाउंट और म्यूचुअल फंड (MF) फोलियो में नॉमिनेशन के नियमों में बदलाव किया था. अब यह बदलाव का नियम 1 सितंबर, 2026 से लागू हो जाएगा. बीते 29 मई, 2026 के एक सर्कुलर में, SEBI ने कहा कि इस बदलाव से इन्वेस्टर को जोड़ने की प्रक्रिया आसान होगी और नॉमिनेशन की प्रक्रिया भी सरल हो जाएगी. यह नया नियम इसलिए लाया गया है ताकि हर इन्वेस्टर अपनी नॉमिनेशन पसंद को साफ-साफ दर्ज करे. इससे सिक्योरिटीज के ट्रांसफर को आसान बनाने और इन्वेस्टर की मौत के बाद परिवार के सदस्यों या कानूनी वारिसों के लिए मुश्किलों को कम करने में मदद मिलेगी.

1 सितंबर से इन्वेस्टर्स के लिए क्या बदलाव होंगे?

SEBI की नई गाइडलाइंस के तहत, इन्वेस्टर्स नॉमिनेशन वाले हिस्से को खाली नहीं छोड़ सकते. अकाउंट खोलते समय या मौजूदा फोलियो के लिए, उन्हें या तो नॉमिनी की जानकारी देनी होगी या फिर नॉमिनेशन न करने के लिए साइन किया हुआ डिक्लेरेशन जमा करना होगा.

हालांकि, जॉइंट डीमैट अकाउंट या म्यूचुअल फंड फोलियो के लिए नॉमिनेशन ऑप्शनल होगा. ऐसे मामलों में, नॉमिनी का नाम जोड़ने या बदलने के लिए सभी जॉइंट-होल्डर्स की सहमति ज़रूरी होगी.

एक निवेशक ज़्यादा से ज़्यादा तीन नॉमिनी नियुक्त कर सकता है और हर एक को मिलने वाले हिस्से का प्रतिशत तय कर सकता है. अगर कोई खास हिस्सा तय नहीं किया गया है, तो एसेट्स को सभी नॉमिनी के बीच बराबर-बराबर बांट दिया जाएगा. अगर बंटवारे में कोई 'ऑड लॉट' या 'फ़्रैक्शनल बैलेंस' (अधूरा हिस्सा) बचता है, तो डिस्ट्रिब्यूशन के नियमों के अनुसार, बची हुई यूनिट्स या सिक्योरिटीज़ नॉमिनेशन फॉर्म में सबसे पहले लिखे गए नॉमिनी को ट्रांसफर कर दी जाएंगी.

अगर आप नॉमिनी नहीं रखना चाहते हैं तो क्या होगा?

जो निवेशक नॉमिनी नियुक्त नहीं करना चाहते, वे तय डिक्लेरेशन जमा करके औपचारिक रूप से इससे बाहर निकल सकते हैं. आप अपने ब्रोकर, बैंक या म्यूचुअल फ़ंड प्लेटफ़ॉर्म अकाउंट में लॉग इन करके ऐसा कर सकते हैं. आपको बस नॉमिनेशन या नॉमिनी की जानकारी वाले टैब पर जाना है और फिर नॉमिनी जोड़ने के बजाय 'ऑप्ट आउट' (यानी नॉमिनी न चुनने) का विकल्प चुनना है. यह विकल्प फोलियो होल्डर को रेगुलेटरी नियमों का पालन करते हुए अपना फ़ैसला दर्ज करने की सुविधा देता है.

अगर कोई नॉमिनी रजिस्टर्ड नहीं है तो एसेट्स किसे मिलेगा

अगर कोई नॉमिनी रजिस्टर्ड नहीं है, तो होल्डिंग्स को सिक्योरिटीज़ ट्रांसमिशन सुविधा के ज़रिए कानूनी वारिसों को ट्रांसफर कर दिया जाता है. अब तक, इस प्रोसेस में बहुत ज्यादा कागजी कार्रवाई होती थी और इसमें काफी समय लगता था, लेकिन SEBI ने इस प्रक्रिया को कुछ हद तक आसान बना दिया है.

नॉमिनेशन करते समय क्या होती थी आम गलतियां

नॉमिनेशन के मामले में निवेशक अक्सर कुछ गलतियां कर बैठते हैं. 

  • नॉमिनी रजिस्टर न करना.
  • नॉमिनी की गलत जानकारी देना.
  • शादी, तलाक, मौजूदा नॉमिनी की मौत या बच्चे के जन्म जैसी नॉमिनी की जानकारी अपडेट न करना.
  • एक से ज्यादा नॉमिनी के बीच गलत प्रतिशत में हिस्सा तय करना.
  • यह मान लेना कि निवेशक की मौत के बाद नॉमिनी अपने-आप कानूनी मालिक बन जाएगा.

मूल निवेशक की मृत्यु के बाद होल्डिंग्स को ट्रांसफर करने की प्रक्रिया म्यूचुअल फंड, डीमैट शेयर और फिजिकल शेयर सर्टिफिकेट के मामले में अलग-अलग होती है. म्यूचुअल फंड के लिए, एसेट मैनेजमेंट कंपनी या उसके रजिस्ट्रार को ट्रांसमिशन का अनुरोध (रिक्वेस्ट) देना होता है, जो आमतौर पर तय दस्तावेजों के आधार पर इसे प्रोसेस करते हैं. वहीं, डीमैट शेयर निवेशक के डिपॉजिटरी पार्टिसिपेंट के ज़रिए ट्रांसफर किए जाते हैं, जो NSDL या CDSL से जुड़े होते हैं.

फिजिकल शेयर सर्टिफिकेट की प्रक्रिया थोड़ी ज्यादा मुश्किल होती है. इसमें दावा करने वालों को कंपनी के रजिस्ट्रार और ट्रांसफर एजेंट के पास जरूरी ट्रांसमिशन दस्तावेजों के साथ ओरिजिनल सर्टिफिकेट जमा करने होते हैं.

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