Noida Protest Latest News: नोएडा के औद्योगिक गलियारों में मजदूरों ने सोमवार को खूब बवाल काटा, तोड़फोड़ की, पुलिस की गाडि़यां फूंक दी. इस हिंसात्मक प्रदर्शन के पीछे मजदूर कम सैलरी समेत कई सारी मांगों का हवाला दे रहे हैं. नोएडा फेज-2 स्थित होजरी कॉम्प्लेक्स से लेकर ईकोटेक-3 के औद्योगिक विहार तक, 500 से अधिक कंपनियों के हजारों मजदूर सड़कों पर उतर आए हैं. फैक्ट्रियों में काम बंद और सड़क पर प्रदर्शन जारी, लेकिन इस पूरे बवाल के बीच एक बड़ा सवाल तैर रहा है, क्या केंद्र का 'न्यू लेबर कोड' (New Labour Code) लागू होता, तो नोएडा को ये दिन देखना पड़ता? जानकारों का मानना है कि मजदूरों की जो मांगें आज हिंसा और प्रदर्शन का कारण बनी हैं, उनमें से अधिकांश का समाधान नए श्रम कानूनों के प्रावधानों में पहले से ही मौजूद है. यदि नोएडा में ये कोड प्रभावी होता तो मजदूरों को न्यूनतम वेतन, 8 घंटे के बाद दोगुनी दर पर ओवरटाइम और हर महीने की 7 तारीख तक बैंक खाते में सैलरी की कानूनी गारंटी मिलती.
तो क्या नोएडा की इन कंपनियों में न्यू लेबर कोड लागू नहीं हैं? क्या उत्तर प्रदेश में नए श्रम कानून लागू नहीं हैं?
नोएडा, यूपी या दूसरे प्रदेशों के संदर्भ में 'न्यू लेबर कोड' की स्थिति को लेकर एक तकनीकी मोड़ है, जिसे समझने के लिए हमें 'कानून का बनना' और 'कानून का लागू होना' के बीच का अंतर देखना होगा. श्रम मंत्रालय के एक अधिकारी, पिछले दिनों NDTV से बातचीत में इस तकनीकी पेच के बारे में बता चुके हैं. मौजूदा समय में देखें तो न्यू लेबर कोड को आधिकारिक तौर पर लागू करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका क्रियान्वयन अभी बदलाव (Transition) के दौर में है.

सड़कों पर क्यों उतरे 'मजदूर'?
नोएडा की सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे मजदूरों की कुछ मांगें मान ली गई हैं. गौतमबुद्ध नगर की जिलाधिकारी मेधा रूपम ने शनिवार शाम को इस बारे में जानकारी भी दी थी. हालांकि मजदूरों का आरोप है कि उनकी कई मांगें नहीं मानी गई हैं. जैसे-
- सम्मानजनक वेतन: मजदूरों ने NDTV संवाददाता को बताया कि उनकी मांगों में न्यूनतम वेतन को बढ़ाकर 26,000 रुपये करने की मांग शामिल है, जबकि उन्हें 200-300 की दिहाड़ी पर गुजारा करना पड़ रहा है.
- काम के घंटे और ओवरटाइम: मजदूरों का आरोप है कि उनसे 10-12 घंटे काम लिया जाता है, लेकिन ओवरटाइम का भुगतान या तो नहीं होता या बहुत कम होता है.
- समय पर भुगतान और छुट्टी: मजदूरों का आरोप है कि उन्हें समय से वेतन नहीं मिलता. कई बार तो महीना पूरे हुए 15 दिन से ज्यादा बीत जाते हैं. मांग है कि सैलरी समय पर सीधे बैंक खाते में आए और हफ्ते में एक दिन की अनिवार्य छुट्टी मिले.
- कानून का सख्त पालन: मजदूरों का कहना है कि कागजों पर कानून बदल गए, लेकिन फैक्ट्री के गेट के अंदर आज भी ठेकेदारों की मनमानी चलती है. ठेकेदार मजदूरों का शोषण करते हैं.
न्यू लेबर कोड में कैसे छिपा है समाधान?
पॉलिसी एक्सपर्ट प्रभात सिन्हा और सीनियर रिसर्च फेलो अविनाश चंद्रा ने बताया कि यदि कंपनियां 'न्यू लेबर कोड' के प्रावधानों को पूरी ईमानदारी से अपना लें, तो बवाल की नौबत नहीं आती! सिन्हा ने बताया कि नए लेबर कोड को लागू करने की प्रक्रिया अभी ज्यादातर जगहों पर ट्रांजिशन फेज में है, इसलिए दिक्कतें आ रही हैं. चंद्रा ने कहा कि नए लेबर कोड के प्रावधान, मजदूरों की ज्यादातर शिकायतें दूर कर सकते हैं.
1. समय पर सैलरी और एकरूपता (Wage Code)
मजदूरों की सबसे बड़ी शिकायत वेतन में देरी और कम भुगतान की है. 'वेतन संहिता' (Wage Code) के तहत अब यह अनिवार्य है कि वेतन का भुगतान अगले महीने की 7 तारीख तक हो जाना चाहिए. साथ ही, भुगतान डिजिटल माध्यम से होने से बिचौलियों और ठेकेदारों द्वारा की जाने वाली 'कटौती' पर लगाम लगेगी.
2. ओवरटाइम का 'डबल' फायदा
नोएडा के मजदूरों की एक बड़ी मांग 'काम के घंटे तय करने' की है. नया लेबर कोड स्पष्ट कहता है कि 8 घंटे की शिफ्ट के बाद किया गया एक-एक मिनट का अतिरिक्त काम 'ओवरटाइम' माना जाएगा और उसका भुगतान सामान्य मजदूरी से दोगुनी दर (200%) पर करना होगा. यह प्रावधान लागू होते ही कंपनियों की 12-12 घंटे काम कराने की मनमानी खत्म हो जाएगी.
3. साप्ताहिक अवकाश और काम का दबाव
मजदूरों का आरोप है कि उन पर अतिरिक्त काम का दबाव रहता है और छुट्टियां नहीं मिलतीं. न्यू लेबर कोड (OSH Code) के तहत सप्ताह में 48 घंटे से अधिक काम लेना गैरकानूनी है और हर श्रमिक को सप्ताह में एक दिन का सवैतनिक अवकाश (Paid Leave) मिलना अनिवार्य है.
4. सामाजिक सुरक्षा का दायरा
ईकोटेक-3 के मजदूरों की शिकायत है कि उन्हें बोनस या बीमारी में कोई मदद नहीं मिलती. 'सोशल सिक्योरिटी कोड' के तहत अब असंगठित क्षेत्र और ठेका मजदूरों को भी ईएसआई (ESI) और पीएफ (PF) जैसी सुविधाओं से जोड़ना कंपनियों की कानूनी जिम्मेदारी है.

कानून है पर कंपनियों में सख्ती से पालन जरूरी
उत्तर प्रदेश सरकार ने न्यू लेबर कोड के लिए नियमावली (Rules) पहले ही तैयार कर ली है और इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है. लेकिन नोएडा का वर्तमान संकट यही दर्शाता है कि कानून का 'नोटिफाई' होना और 'इन्फोर्स' (Enforce) होना दो अलग बातें हैं. मजदूरों की मांगें और काम कराने के ढर्रे को लेकर लगाए जा रहे आरोप ये स्पष्ट करते हैं कि नोएडा में न्यू लेबर कोड पूरी सख्ती से लागू नहीं है. न्यू लेबर कोड के जमीन पर पूरी तरह से लागू होने की प्रक्रिया अभी ट्रांजिशन के दौर में है. न्यूनतम वेतन को लेकर भी राज्य और केंद्र के बीच के 'फ्लोर वेज' के आंकड़ों पर स्पष्टता की कमी है. कंपनियां अभी भी पुराने वेतन ढांचे पर चल रही हैं.
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