New Income Tax Act 2025: अगर आप भी अपनी सैलरी और टैक्स बचत को लेकर फिक्रमंद हैं, तो यह खबर आपके बड़े काम की है. 6 दिन बाद नया वित्त वर्ष शुरू हो रहा है और 1 अप्रैल से देश में इनकम टैक्स एक्ट, 2025 लागू होने जा रहा है. इस नए कानून के आने के बाद हर टैक्सपेयर के सामने एक बड़ा सवाल होगा कि क्या 'नई टैक्स व्यवस्था' (New Tax Regime) के साथ बने रहें या फिर 'पुरानी व्यवस्था' (Old Tax Regime) की ओर रुख करें?
गुरुग्राम की एक फर्म में ACFO के तौर पर कार्यरत CA अमित कुमार ने बताया कि हाल के बजट के बाद ऐसा लग रहा था कि नई व्यवस्था ही सबसे बेस्ट है, क्योंकि इसमें कागजी कार्रवाई कम और छूट ज्यादा थी. लेकिन नए नियमों ने पुरानी व्यवस्था में कुछ ऐसे बदलाव किए हैं, जो इसे एक बार फिर से आकर्षक बना रहे हैं.
नई टैक्स व्यवस्था: कम झंझट और सिंपल दरें
सीए अमित कुमार के अनुसार नई व्यवस्था उन लोगों के लिए बेहतरीन है जो निवेश के झंझटों (जैसे LIC, PPF आदि) में नहीं पड़ना चाहते. इसमें टैक्स की दरें कम हैं और ₹12 लाख तक की शुद्ध आय पर 'सेक्शन 87A' के तहत पूरी छूट (Rebate) मिलती है. हालांकि दूसरी तरफ इसमें नुकसान की बात करें तो इसमें आपको मकान किराया भत्ता या 80C जैसी बड़ी कटौतियों का फायदा नहीं मिलता. यह उन लोगों के लिए है जो 'फाइल करो और टेंशन फ्री रहो' की नीति पसंद करते हैं.

old tax regime vs new tax regime
पुरानी व्यवस्था में क्या बदला?
इनकम टैक्स एक्ट, 2025 ने पुरानी व्यवस्था को उन लोगों के लिए पावरफुल बना दिया है, जो सोच-समझकर निवेश करते हैं. इसके 3 बड़े बदलाव आपको चौंका सकते हैं.
- HRA का दायरा बढ़ा
पहले बेंगलुरु, पुणे, हैदराबाद और अहमदाबाद जैसे शहरों में बेसिक सैलरी का 40% ही HRA छूट मिलती थी. अब इसे बढ़ाकर दिल्ली-मुंबई की तरह 50% कर दिया गया है. इससे इन शहरों में रहने वाले नौकरीपेशा लोगों की बड़ी बचत होगी.
- छोटे खर्चों पर बड़ी छूट
ऑफिस से मिलने वाले मील कूपन की सीमा ₹50 से बढ़ाकर ₹200 कर दी गई है. वहीं, गिफ्ट पर मिलने वाली छूट ₹5,000 से बढ़ाकर ₹15,000 कर दी गई है. इसके अलावा बच्चों की शिक्षा, हॉस्टल खर्च और मोबाइल लीजिंग जैसे भत्तों पर भी अब ज्यादा छूट मिलेगी.
- बचत का गणित
एक्सपर्ट्स के अनुसार, अगर आपकी सालाना सैलरी ₹20 लाख है और आप इन सभी नई छूटों (HRA, मील कूपन, गिफ्ट आदि) का सही इस्तेमाल करते हैं, तो आप नई व्यवस्था की तुलना में पुरानी व्यवस्था में ₹1.25 लाख तक ज्यादा बचा सकते हैं.
आपके लिए क्या सही है?
सीए अमित कुमार ने बताया कि यह फैसला पूरी तरह आपकी सैलरी और आपके निवेश पर निर्भर करता है. अगर आप निवेश नहीं करते और सैलरी कम है, तो नई व्यवस्था सरल है. लेकिन अगर आपकी सैलरी ज्यादा है, आप होम लोन चुका रहे हैं या बड़े शहरों में किराए पर रहते हैं, तो पुरानी व्यवस्था आपके बैंक बैलेंस के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है.
CA अमित कुमार ने करदाताओं को सलाह देते हुए कहा कि 1 अप्रैल से पहले टैक्सपेयर अपने सीए से जाकर मिलें, उनसे सलाह लें, टैक्स कैलकुलेटर का इस्तेमाल जरूर करें. उन्होंने कहा, 'याद रखें, सही चुनाव ही आपकी मेहनत की कमाई को टैक्स की मार से बचा सकता है.'
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