Mutual Fund SIP Investment Tips: म्यूचुअल फंड में सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के जरिए हर महीने थोड़ा-थोड़ा पैसा लगाना छोटे और बड़े निवेशकों के लिए सबसे पसंदीदा और सुरक्षित तरीका बन चुका है. हालांकि, SIP चालू कर देना ही आपको करोड़पति बनाने के लिए काफी नहीं है.
दरअसल, SIP शुरू करने के बाद अक्सर लोग कुछ ऐसी बुनियादी गलतियां कर बैठते हैं, जो उनके लॉन्ग टर्म रिटर्न पर पानी फेर देते हैं और उनकी वेल्थ क्रिएशन की रफ्तार को बहुत धीमा कर देते हैं. यदि आप भी म्यूचुअल फंड में निवेश कर रहे हैं, तो इन बड़ी गलतियों से हमेशा बचें.
एक ही फंड में सारा पैसा लगा देना
निवेशक अक्सर ये गलती करते है कि किसी म्यूचुअल फंड में पूर्व में मिले रिटर्न को देखकर उसमें निवेश कर देते हैं. हद तो तब हो जाती है, जब सारा पैसा एक ही फंड में निवेश कर देते हैं. ऐसा करने से आप अपने गोल को हासिल करने में पीछे रह सकते हैं. दरअसल, ये कोई जरूरी नहीं है कि किसी फंड ने पास्ट में अच्छा रिटर्न दिया है, तो वह भविष्य में भी अच्छा रिटर्न दें. बल्कि, इसके उलट आपका रिटर्न कम भी हो सकता है. इससे बचने और सामान्य रिटर्न पाने के लिए अपने निवेश को डायवर्सिफाई करें यानी अपने पैसे को कई अलग-अलग फंड्स में निवेश करें. ऐसा करने से आप बेहतर औसत रिटर्न पा सकते हैं.
निवेश की राशि को फिक्स कर देना
आम तौर पर ये देखा जाता है कि लोग एक बार जितने रकम की SIP शुरू करते हैं, अतं तक उसी रकम को बनाए रखते हैं. यानी हर साल लोगों की सैलरी, प्रमोशन या बिजनेस की कमाई बढ़ती है, लेकिन लोग अपनी SIP की रकम को वही 2,000 रुपये या 5,000 रुपये ही बनाए रखते हैं, जिससे लोग अपने बड़े लक्ष्य को हासिल करने से चूक जाते हैं. इसके उलट जो लोग फिक्स SIP के मुकाबले हर साल अपनी निवेश राशि में केवल 10% की वार्षिक बढ़ोतरी करते हैं, तो 20 साल बाद आपका कुल तैयार कॉर्पस सामान्य SIP से लगभग दोगुना हो सकता है.
मार्केट में गिरावट देखकर SIP को बीच में ही रोक देना
शेयर बाजार में बिकवाली, गिरावट या क्रैश का माहौल देखकर अक्सर निवेशक घबरा जाते हैं और अपनी चालू SIP को पॉज या पूरी तरह बंद कर देते हैं. जबकि, मंदी या बाजार की गिरावट ही असल में सबसे सस्ते में खरीदारी करने का समय होती है. जब मार्केट नीचे गिरता है, तो आपको Rupee Cost Averaging का फायदा मिलता है, यानी उसी SIP की रकम में आपको म्यूचुअल फंड की अधिक यूनिट्स आवंटित होती हैं. SIP रोकने से आप सस्ते में ज्यादा यूनिट्स खरीदने का यह शानदार मौका गंवा देते हैं.
निवेश करने में बहुत ज्यादा देरी करना
लोग निवेश करने का फैसला लेने में बहुत देर कर देते हैं. अक्सर लोग सोचते हैं कि जब बड़ी सैलरी मिलेगी, बहुत सारा बोनस आएगा या जब बाजार का सही समय होगा, तभी SIP शुरू करेंगे. जबकि, म्यूचुअल फंड में असली जादू कंपाउंडिंग की ताकत से होता है, और कंपाउंडिंग का सीधा संबंध समय से है, पैसे से नहीं. इसे ऐसे समझिए कि 20-22 साल की उम्र में शुरू की गई 5,000 रुपये महीना की SIP 30-32 साल की उम्र में शुरू की गई 10,000 रुपये की भारी-भरकम SIP से कहीं ज्यादा बड़ा रिटर्न और फंड बनाकर दे सकती है.
बार बार पोर्टफोलियो चेक करना और फंड्स बदलना
अक्सर निवेशक ये गलती करते हैं कि हर महीने अपने म्यूचुअल फंड ऐप को खोलकर रिटर्न देखते रहते और 6 महीने या 1 साल में थोड़ा कम प्रदर्शन करने वाले फंड से निकलकर किसी दूसरे नए फंड में चले जाते हैं. जबकि, इक्विटी म्यूचुअल फंड्स को अच्छा रिटर्न देने के लिए कम से कम 5 से 7 साल का समय चाहिए होता है. शॉर्ट टर्म उतार-चढ़ाव देखकर बार-बार स्कीम्स बदलने से आपके ऊपर एग्जिट लोड और कैपिटल गेंस टैक्स की अतिरिक्त मार पड़ती है, जिससे आपका मुनाफा घट जाता है.
बिना किसी फाइनेंशियल गोल के निवेश करना
कई बार निवेशक सिर्फ टैक्स बचाने के लिए किसी सहकर्मी की देखा-देखी या सोशल मीडिया टिप्स के आधार पर बिना किसी सोच-विचार के रैंडम स्कीम्स में पैसा लगा देते हैं. ऐसे में जब आपके निवेश के पीछे कोई स्पष्ट लक्ष्य जैसे नया घर खरीदना, बच्चों की उच्च शिक्षा या रिटायरमेंट फंड नहीं होता है, तो आप छोटी-मोटी जरूरतों या लालच में आकर बीच में ही पैसे निकाल लेते हैं. बिना गोल बेस्ट इन्वेस्टिंग के आप कभी भी अनुशासित होकर बड़ा और स्थाई फंड नहीं बना सकते.
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म्यूचुअल फंड SIP कोई अलादीन का चिराग नहीं है, जो रातों-रात अमीर बना देगा. यह एक अनुशासित और लंबी रेस का घोड़ा है. सही समय पर शुरुआत करें, हर साल अपनी कमाई के साथ SIP की रकम बढ़ाएं और बाजार के उतार-चढ़ाव से डरे बिना अपने वित्तीय लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित रखें.
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