Noida Jewar Airport Real Estate Boom: दुनिया भर में जिन शहरों ने सबसे तेज विकास किया है वहां बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स, औद्योगिक विस्तार और व्यापारिक निवेश बड़ी वजहों में शामिल रहे हैं. खासतौर पर एयरपोर्ट अक्सर इस बदलाव की नींव बने हैं, जबकि उनका वास्तविक प्रभाव तब और बढ़ा जब उनके आसपास मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स, लॉजिस्टिक्स नेटवर्क और वैश्विक कंपनियों का निवेश भी बढ़ा. दुबई, सिंगापुर और इस्तांबुल जैसे शहरों ने केवल बेहतर कनेक्टिविटी के कारण नहीं, बल्कि इसलिए भी आर्थिक प्रगति की क्योंकि एयरपोर्ट के आसपास उद्योग, व्यावसायिक केंद्र और रोजगार हब विकसित हुए. अपने नोएडा वाले जेवर को ही देख लीजिए.
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, औद्योगिक पार्कों, लॉजिस्टिक्स हब, मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) के बढ़ते निवेश के साथ मिलकर नोएडा-ग्रेटर नोएडा-यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र की आर्थिक तस्वीर बदल रहे हैं. ये सभी प्रोजेक्ट्स इन इलाकों को केवल रियल एस्टेट नहीं बल्कि निवेश, रोजगार और लॉन्ग टर्म शहरी विकास के बड़े केंद्र के रूप में स्थापित कर रही हैं.
निवेश को आकर्षित कर रहा एयरपोर्ट
इस बदलाव का आर्थिक असर अब साफ दिखाई देने लगा है. एयरपोर्ट के माध्यम से बेहतर कनेक्टिविटी उन उद्योगों को आकर्षित कर रही है जिन्हें मजबूत सप्लाई चेन और वैश्विक पहुंच की आवश्यकता होती है. वहीं, सरकारी नीतियों, इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश और बड़े भूखंडों की उपलब्धता के कारण मैन्युफैक्चरिंग, वेयरहाउसिंग, डाटा सेंटर और जीसीसी का विस्तार तेजी से हो रहा है. जैसे-जैसे कंपनियां यहां अपने संचालन शुरू कर रही हैं, वैसे-वैसे आवासीय मांग और सोशल इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास भी बढ़ रहा है. इससे आर्थिक गतिविधियों का एक मजबूत चक्र बन रहा है.

गौड़ ग्रुप के CMD मनोज गौड़ कहते हैं, 'केवल एयरपोर्ट शहर नहीं बनाते, बल्कि उनके आसपास विकसित होने वाला पूरा इकोसिस्टम शहरों को आकार देता है. नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट ने विकास की गति को बढ़ावा दिया है और अब औद्योगिक पार्क, संस्थागत बुनियादी ढांचा, प्रस्तावित लेदर मैन्युफैक्चरिंग पार्क, टॉय पार्क और इलेक्ट्रॉनिक सिटी जैसी परियोजनाएं इस विकास को आगे बढ़ाएंगी. माइक्रोसॉफ्ट, टेक महिंद्रा, पतंजलि और एस्कॉर्ट्स जैसी कंपनियों का निवेश भी इस क्षेत्र के प्रति विश्वास को मजबूत कर रहा है. यदि सरकार अपनी योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करती है, तो यह क्षेत्र भारत का दुबई या सिंगापुर बनने की क्षमता रखता है.'
नोएडा-यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र उत्तर भारत के सबसे महत्वपूर्ण विकास कॉरिडोर के रूप में उभर रहा है. नोएडा, ग्रेटर नोएडा, यमुना एक्सप्रेसवे और पश्चिमी उत्तर प्रदेश को जोड़ने वाली इसकी रणनीतिक स्थिति घरेलू और विदेशी निवेशकों को आकर्षित कर रही है. एयरपोर्ट, औद्योगिक विकास और कॉर्पोरेट निवेश का संयुक्त प्रभाव इस क्षेत्र को एक सामान्य उपनगरीय इलाके से बड़े आर्थिक केंद्र में बदल रहा है.
5 साल में 5 गुना तक बढ़ी वैल्यू, अगले 2 साल में क्या होगा?
स्क्वेयर यार्ड्स की रिपोर्ट 'रनवे टू रियल्टी: हाउ नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट इज रीशेपिंग रियल्टी' के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में अपार्टमेंट की कीमतें लगभग तीन गुना तक बढ़ चुकी हैं, जबकि प्लॉट की कीमतों में औसतन 1.5 गुना बढ़ोतरी दर्ज की गई है. कुछ माइक्रो-मार्केट्स में संपत्ति की कीमतों में 5 गुना तक बढ़ोतरी देखने को मिली है. ये बढ़ोतरी इंफ्रास्ट्रक्चर विकास, औद्योगिक विस्तार और रोजगार के बढ़ते अवसरों के कारण निवेशकों के बढ़ते भरोसे को दर्शाती है.
निंबस रियल्टी के CEO साहिल अग्रवाल कहते हैं, 'नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की घोषणा के बाद से यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र में जबरदस्त विकास देखने को मिला है. यह केवल संपत्ति की कीमतों में बढ़ोतरी तक सीमित नहीं है, बल्कि जमीनी स्तर पर इसका प्रभाव स्पष्ट दिखाई देता है. मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स, लॉजिस्टिक्स पार्क और वेयरहाउसिंग सुविधाओं के विकास से रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं और अधिक लोग इस क्षेत्र की ओर आकर्षित हो रहे हैं. सेक्टर 22A जैसे क्षेत्रों में NRI, उद्यमी और कॉर्पोरेट अधिकारियों के बीच लग्जरी अपार्टमेंट और पेंटहाउस की मांग तेजी से बढ़ रही है. बेहतर कनेक्टिविटी, रोजगार और आधुनिक सुविधाओं का यह संयोजन उत्तर भारत के सबसे मजबूत रियल एस्टेट बाजारों में से एक बना सकता है.'

Jewar airport 2026
प्रीमियम लाइफस्टाइल प्रोजेक्ट्स की बढ़ रही मांग
नोएडा एक्सप्रेसवे और यमुना एक्सप्रेसवे दोनों कॉरिडोर पर इस ग्रोथ का प्रभाव दिखाई दे रहा है. बेहतर मेट्रो कनेक्टिविटी, विस्तृत सड़क नेटवर्क, आगामी एयरपोर्ट और औद्योगिक एवं कॉर्पोरेट इकोसिस्टम के विकास ने खरीदारों का भरोसा बढ़ाया है और एंड-यूजर मांग को मजबूत किया है. जो क्षेत्र पहले केवल ट्रांजिट कॉरिडोर के रूप में देखा जाता था, वह अब एक ऐसे गंतव्य के रूप में उभर रहा है जहां लोग रह सकते हैं, काम कर सकते हैं और व्यवसाय स्थापित कर सकते हैं.
इसी कारण इन कॉरिडोर में बड़े घरों, ब्रांडेड रेजिडेंस और प्रीमियम लाइफस्टाइल प्रोजेक्ट्स की मांग लगातार बढ़ रही है.
एयरपोर्ट आधारित शहरीकरण का प्रभाव केवल आवासीय रियल एस्टेट तक सीमित नहीं है. जैसे-जैसे हाई-कनेक्टिविटी वाले क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ती हैं, वैसे-वैसे होटल, रिटेल, मनोरंजन, लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर, डाटा सेंटर और जीसीसी जैसे कार्यालय परिसरों की मांग भी बढ़ती है. इससे जनसंख्या का प्रवाह बदलता है और इंटीग्रेटेड शहरी नियोजन की आवश्यकता बढ़ती है, जहां व्यावसायिक, आवासीय और सामाजिक बुनियादी ढांचा साथ-साथ विकसित हो.
गुलशन ग्रुप की डायरेक्टर युक्ति नागपाल कहती हैं, 'नोएडा एक्सप्रेसवे क्षेत्र में रियल एस्टेट की तेज प्रगति का मुख्य कारण नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का तेजी से हो रहा विकास है. पिछले कुछ वर्षों में खरीदारों की प्राथमिकताओं में बड़ा बदलाव आया है, खासकर उन लोगों के बीच जो बेहतर जीवनशैली और उत्कृष्ट कनेक्टिविटी चाहते हैं. एयरपोर्ट के कारण ब्रांडेड और अनुभव-आधारित आवासीय परियोजनाओं की मांग भी बढ़ी है. अब नोएडा एक्सप्रेसवे को केवल आवासीय क्षेत्र नहीं, बल्कि एक आत्मनिर्भर शहरी गंतव्य के रूप में देखा जा रहा है.'
केवल रियल एस्टेट तक सीमित नहीं रहेगा प्रभाव
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का प्रभाव केवल रियल एस्टेट तक सीमित नहीं रहेगा. आने वाले वर्षों में यह रोजगार, आर्थिक गतिविधियों और शहरी विकास के नए अवसर पैदा करेगा तथा उत्तर भारत के विकास की दिशा को भी प्रभावित करेगा. CRC ग्रुप के डायरेक्टर (मार्केटिंग एवं बिजनेस मैनेजमेंट) सलील कुमार का मानना है कि जो इलाका कभी शहर के बाहरी हिस्से के रूप में देखा जाता था, वो आज एनसीआर के सबसे संभावनाशील विकास कॉरिडोर में बदल रहा है.'
उन्होंने कहा, 'नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट ने इस बदलाव को गति दी है, लेकिन वास्तविक प्रभाव इंफ्रास्ट्रक्चर विकास, नीतिगत समर्थन और निवेशकों की बढ़ती रुचि का है. जेवर के आसपास प्रस्तावित आर्थिक गतिविधियों का विशाल पैमाना एचएनआई और एनआरआई निवेशकों को आकर्षित कर रहा है, जो लंबी अवधि में बेहतर रिटर्न की संभावना देख रहे हैं. डेवलपर्स के लिए यह ऐसा अवसर है जहां आधुनिक बुनियादी ढांचा और भविष्य की शहरी योजना एक साथ मिल रही है.'
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