- अमेरिकी टेक कंपनी एक्सेंचर के कमजोर रेवेन्यू अनुमान के बाद भारतीय IT कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट आई है.
- निफ्टी आईटी इंडेक्स लगभग छह प्रतिशत गिर गया और इंफोसिस का शेयर आठ प्रतिशत से अधिक टूटा है.
- IT सेक्टर में 50 लाख से अधिक लोग काम करते हैं, जिससे जॉब सिक्योरिटी और सैलरीव हाईक को लेकर चिंता बढ़ गई है.
भारतीय आईटी (IT) सेक्टर के लिए आज यानी शुक्रवार का दिन किसी ब्लैक फ्राइडे की तरह साबित हो रहा है. कल अमेरिकी बाजार में ग्लोबल टेक दिग्गज एक्सेंचर (Accenture) के रेवेन्यू अनुमान घटाने और उसका शेयर 19% टूटने के बाद आज भारतीय बाजारों में घरेलू आईटी कंपनियों के शेयर ताश के पत्तों की तरह बिखर गए हैं. Nifty IT इंडेक्स करीब 6% तक गिर गया. वहीं, दिग्गज कंपनी इंफोसिस (Infosys) का शेयर 8.3% और टीसीएस (TCS) 6.5% से ज्यादा टूट चुका है.
IT सेक्टर के कर्मचारियों पर टूटा मुसीबतों का पहाड़!
यह गिरावट सिर्फ शेयर बाजार के आंकड़ों तक सीमित नहीं है. भारत के आईटी और टेक सेक्टर में 50 लाख से अधिक लोग काम करते हैं. इस बड़े क्रैश ने भारतीय आईटी सेक्टर में काम करने वाले लाखों टेक प्रोफेशनल्स और उनके परिवारों के बीच जॉब सिक्योरिटी, सैलरी हाईक और आने वाले बोनस को लेकर एक गहरी चिंता पैदा कर दी है.
जानिए आज कौन सा शेयर कितना टूटा?
एक्सेंचर की खराब कमेंट्री के बाद शुक्रवार को भारतीय आईटी कंपनियों के शेयरों में चौतरफा बिकवाली का माहौल देखने को मिला
- इन्फोसिस लिमिटेड (Infosys Ltd): सबसे तगड़ा झटका झेलते हुए 8.3% गिरकर ₹1,033.9 के निचले स्तर पर आ गया.
- एम्फैसिस लिमिटेड (Mphasis Ltd): इसमें 7.99% की भारी गिरावट आई और यह ₹2,150 पर ट्रेड कर रहा है.
- टेक महिंद्रा (Tech Mahindra): कंपनी का शेयर 7.16% टूटकर ₹1,344 पर पहुंच गया.
- परसिस्टेंट सिस्टम्स (Persistent Systems): करीब 6.85% की कमजोरी के साथ ₹4,602 पर आ गया.
- टीसीएस (TCS): देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनी भी नहीं बच सकी और 6.51% फिसलकर ₹2,059.9 पर आ गई.
- एचसीएल टेक्नोलॉजीज (HCL Technologies): शेयर 6.06% की गिरावट के साथ ₹1,091.4 पर आ गया.
- कोफोर्ज लिमिटेड (Coforge Ltd): इसमें 5.75% की कमी देखी गई और यह ₹1,397.8 पर आ गया.
- विप्रो लिमिटेड (Wipro Ltd): विप्रो का शेयर 4.35% टूटकर ₹174.89 पर कारोबार कर रहा है.
- ओरेकल फाइनेंशियल सर्विसेज (Oracle Financial Services): यह शेयर भी 2.89% गिरकर ₹9,127.5 पर आ गया.
दिग्गज ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म्स की बड़ी चेतावनी
इस भारी गिरावट के बीच दुनिया की दिग्गज ब्रोकरेज हाउसेज ने भारतीय आईटी सेक्टर को लेकर बेहद चिंताजनक रिपोर्ट्स जारी की हैं...
मॉर्गन स्टेनली (Morgan Stanley) का कहना है कि एक्सेंचर के नतीजे एक "बेहद कठिन मैक्रो इकोनॉमिक माहौल" (Tough Macro Climate) की तरफ इशारा करते हैं, जो दूसरी तिमाही तक खिंच सकता है. यह अनिश्चितता इतनी गंभीर है कि यह भारतीय आईटी कंपनियों के वित्त वर्ष 2027 (FY27) के गाइडेंस को भी प्रभावित कर सकती है.
एचएसबीसी (HSBC)ने नोट किया है कि आईटी सेक्टर में यह कमजोरी एआई (AI) की वजह से नहीं, बल्कि ग्लोबल जियोपॉलिटिकल डिस्टरबेंस यानी भू-राजनीतिक तनाव के कारण है. फिलहाल भारतीय आईटी कंपनियों के पास शॉर्ट-टर्म में संभलने के लिए कोई बड़ा ट्रिगर नहीं दिख रहा है.
जेफरीज (Jefferies) ने चेतावनी दी है कि एक्सेंचर के कमजोर रेवेन्यू आउटलुक के कारण अब पूरे आईटी सेक्टर के अनुमानित आंकड़ों (Consensus Estimates) में कटौती की जा सकती है. आईटी सर्विसेज अभी भी भारी दबाव में हैं, और भारत की टॉप-5 आईटी कंपनियां अभी भी एक्सेंचर के मुकाबले महंगे वैल्यूएशनपर ट्रेड कर रही हैं.
कोटक का कहना है कि एक्सेंचर के नतीजों ने पहले से ही कई समस्याओं से जूझ रहे आईटी सेक्टर को कोई राहत नहीं दी है. लार्ज-कैप कंपनियों में इंफोसिस (Infosys) पर इसका सबसे ज्यादा और सीधा असर पड़ सकता है, क्योंकि कंपनियां अपने गैर-जरूरी खर्चों (Discretionary Spending) को रोक रही हैं.
लाखों आईटी कर्मचारियों के लिए क्या हैं इसके मायने?
एक्सेंचर के मैनेजमेंट ने साफ किया है कि उनके क्लाइंट्स लगातार अपने नए प्रोजेक्ट्स और आईटी खर्चों को टाल रहे हैं. चूंकि भारतीय कंपनियां पूरी तरह अमेरिकी और यूरोपीय क्लाइंट्स के प्रोजेक्ट्स पर निर्भर हैं, इसलिए इस सुस्ती का सीधा असर जमीनी स्तर पर लाखों आईटी कर्मचारियों पर दिखेगा...
पिछले कुछ सालों में टेक सेक्टर पहले ही बड़े पैमाने पर छंटनी कर रहा है. इस नए संकट के बाद कर्मचारियों को डर है कि कंपनियां अपनी ग्रोथ धीमी होने पर प्रॉफिट बचाने के लिए फिर से छंटनी कर सकती हैं
इस साल जिन कर्मचारियों को अच्छे इंक्रीमेंट या परफॉर्मेंस बोनस की उम्मीद थी, उन्हें अब आशंका है कि कंपनियां कमजोर ग्रोथ का हवाला देकर हाइक पर रोक लगा सकती हैं.
कॉलेज से नए पास-आउट हो रहे फ्रेशर्स इंजीनियर्स के लिए जॉइनिंग की राह और कठिन हो सकती है.जब बिजनेस में सुस्ती आती है, तो कंपनियां ऑनबोर्डिंग (Onboarding) को महीनों के लिए टाल देती हैं
आईटी सेक्टर में यह सुस्ती और गिरावट कुछ तिमाहियों तक खिंच सकती है. हालांकि भारतीय टेक कंपनियों के पास मजबूत कैश रिजर्व और शानदार क्लाइंट बेस है, लेकिन बाजार की इस बड़ी गिरावट ने यह साफ कर दिया है कि आने वाले दिन टेक प्रोफेशनल्स के लिए कड़े इम्तिहान वाले हो सकते हैं, जहां उन्हें नई टेक्नोलॉजी जैसे AI के साथ खुद को री-स्किल करना होगा.
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