Iran Israel War: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में चल रही जियो पॉलिटिकल टेंशन के बीच भारत सरकार ने निर्यातकों को बड़ी राहत दी है. जंग की वजह से जो एक्सपोर्ट कार्गो बीच रास्ते से वापस भारत लौट रहे हैं, उनके लिए कस्टम नियमों को आसान बनाया गया है. सरकार चाहती है कि इस संकट की घड़ी में व्यापारियों पर एक्सट्रा और लॉजिस्टिक बोझ कम पड़े.
उसी पोर्ट पर वापसी और आसान अनलोडिंग
नए नियमों के अनुसार अगर कोई निर्यात जहाज हॉर्मुज रूट में समस्या की वजह से वापस आता है, तो उसे उसी भारतीय बंदरगाह पर लौटना होगा जहां से उसने अपनी यात्रा शुरू की थी. राहत की बात ये है कि वापस आए कंटेनरों को कुछ स्पेशल मामलों में बिल ऑफ एंट्री भरने की जरूरत नहीं है. इससे कागजी कार्रवाई कम होने से समय बचेगा और माल जल्दी सेफ जगह पर पहुंच सकेगा.
शिपिंग बिल कैंसिलेशन में बदलाव
अमूमन एक बार जहाज रवाना होने के बाद शिपिंग बिल कैंसिल करना बहुत लंबा और कठिन काम होता है. इसलिए अभी की समस्या को देखते हुए सरकार ने शिपिंग बिल को रद्द करने की अनुमति दे दी है. इसके लिए डीजी सिस्टम जल्द ही ICES यानी इंडियन कस्टम ईडीआई सिस्टम में एक नया ऑप्शन जोड़ेगा, जिससे EGM फाइल होने के बाद भी शिपिंग बिल को डिजिटल तरीके से कैंसिल किया जा सकेगा. और जब तक ये डिजिटल फीचर चालू नहीं होता तब तक अधिकारियों को मैनुअल रिकॉर्ड रखने के निर्देश दिए हैं.
इंसेंटिव करें वापस
कस्टम विभाग ने कहा कि सुरक्षा और नियमों के साथ कोई समझौता नहीं होगा. अधिकारी कंटेनर की सील की जांच करेंगे. अगर किसी कंटेनर की सील टूटी हुई या उसके साथ छेड़छाड़ पाई जाती है तो उस माल की 100% फिजिकल जांच की जाएगी. इसके अलावा निर्यातकों को यह ध्यान रखना होगा कि अगर उन्हें इस एक्सपोर्ट के बदले कोई इंसेंटिव जैसे IGST रिफंड मिल चुका है तो उसे सरकार को वापस करना होगा.
जिनका सामान वापस आया है, उन्हें बैक टू टाउन यानी माल को शहर/गोदाम में लौटाने की सुविधा मिल सकती है. ये स्पेशल छूट सर्कुलर की तारीख से 15 दिनों तक मान्य होगी.
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