देश में नॉन-लाइफ इंश्योरेंस कंपनियां वाहनों के थर्ड पार्टी इंश्योरेंस का प्रीमियम बढ़ाना चाहती हैं. इसके लिए बीमा कंपनियां इंश्योरेंस रेगुलेटर IRDAI से मांग कर रही हैं. अगर ऐसा होता है तो 2022 के 4 साल बाद ये पहला मौका होगा, जब थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस महंगा होगा. लगातार बढ़ते अंडरराइटिंग नुकसान और क्लेम की लागत में भारी इजाफे के चलते कंपनियां प्रीमियम बढ़ाने की मांग कर रही हैं.
मोटर इंश्योरेंस सेगमेंट का साइज 1 लाख करोड़ से अधिक रहा है. बता दें कि मोटर इंश्योरेंस में अंडरराइटिंग लॉस तब होता है जब कोई बीमा कंपनी, वाहन मालिकों से मिलने वाले प्रीमियम के मुकाबले क्लेम में ज्यादा राशि का भुगतान करती है. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, इस सेगमेंट में हो रहे घाटे के अलावा सुप्रीम कोर्ट के एक हालिया फैसले ने भी बीमा कंपनियों की चिंता बढ़ा दी है, जिसमें आदेश दिया गया है कि क्लेम के कैलकुलेशन में होममेकर्स यानी भारतीय घरेलू महिलाओं के काम की आर्थिक वैल्यू (30,000 रुपये/महीने) को भी शामिल करें. इससे भी क्लेम पेमेंट की कॉस्ट बढ़ी है.
जून 2022 के 4 साल बाद हो सकती है बढ़ोतरी
देश में आखिरी बार थर्ड-पार्टी मोटर इंश्योरेंस प्रीमियम में 1 जून 2022 को बढ़ोतरी हुई थी. उस समय IRDAI की सिफारिशों के आधार पर सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने संशोधित दरें नोटिफाई की थीं. 2022 से पहले कोविड महामारी के दौरान (FY2021 और FY2022 में) केंद्र सरकार ने वाहन मालिकों पर बोझ कम करने के लिए दरें फ्रीज कर दी थीं.

15% तक बढ़ सकता है लॉस रेश्यो
सुप्रीम कोर्ट ने 11 जून 2026 को दिए अपने फैसले में मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) के तहत मुआवजा तय करते समय गृहिणियों के बिना वेतन वाले घरेलू काम की आर्थिक वैल्यू को मान्यता दी है. रिपोर्ट के मुताबिक, इस फैसले के तहत 30,000 रुपये/ माह की आय के आधार पर 'लॉस ऑफ डोमेस्टिक केयर' मद में मुआवजे का प्रावधान किया गया है, जो महंगाई के साथ समय-समय पर बढ़ेगा. प्राथमिक आकलन के अनुसार, इस फैसले से उद्योग का मोटर टीपी लॉस रेशियो 12% से 15% तक बढ़ने की उम्मीद है. इंश्योरेंस कंपनियों का कहना है कि प्रीमियम की पर्याप्तता बहाल करने के लिए दरें बढ़ाना जरूरी है.
मोटर इंश्योरेंस में 60% हिस्सेदारी थर्ड-पार्टी की
देश में वाहनों के लिए थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस जरूरी है. ये दूसरों (तीसरे पक्ष) को हुए नुकसान को कवर करता है, जबकि ओन डैमेज (Own Damage-OD) खुद के वाहन के नुकसान की भरपाई करता है. आंकड़े बताते हैं कि मार्च 2026 को समाप्त हुए वित्त वर्ष में बीमा कंपनियों को कुल 1.08 लाख करोड़ के मोटर प्रीमियम में से 64,227 करोड़ (60%) हिस्सा अकेले थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस का था.
ज्यादातर बीमा कंपनियों का मोटर पोर्टफोलियो थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस की तरफ झुका हुआ है, क्योंकि ऑन डैमेज (OD) सेगमेंट में हाई सर्विस रिक्वायरमेंट्स और क्लेम की फ्रीक्वेंसी (25% तक) ज्यादा होती है. ऐसे में बीमा कंपनियां सरकार से थर्ड-पार्टी दरों को बढ़ाने की मांग कर रही हैं.
ये भी पढ़ें: कांवड़ यात्रा के लिए चलेंगी ज्यादा बसें... गोरखपुर, वाराणसी, प्रयागराज, अयोध्या, हरिद्वार तक लाखों लोगों को फायदा
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं