हाल ही में नीट पेपर लीक मामले के दौरान हुए प्रदर्शनों में सबसे ज्यादा चर्चा में रहा, वह 'बिट चैट' नाम का एक छोटा सा चैटिंग ऐप. किसी भी मोबाइल नेटवर्क को जाम कर दिया जाए या इंटरनेट नेटवर्क बंद कर दिया जाए, तब भी डेढ़ सौ से दो सौ मीटर के दायरे में ब्लूटूथ के जरिए मैसेजिंग मुमकिन करने वाला यह ऐप सुरक्षा एजेंसियों के लिए सिरदर्द साबित हो रहा है.
केंद्र सरकार की एक संस्था ने इस ऐप को बैन करने के निर्देश दिए हैं, बावजूद इसके ऐसा ऐप गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध है और इसे डाउनलोड करके इंस्टॉल किया जा सकता है. ऐसा क्यों हो रहा है, इस ऐप को बैन करना क्यों मुश्किल है और इसका उपाय क्या है, इस पर साइबर विशेषज्ञ से एनडीटीवी ने खास बात की है.
साइबर क्राइम इन्वेस्टिगेशन एक्सपर्ट श्रीकांत अर्धापूरकर कहते हैं कि GitHub माइक्रोसॉफ्ट कंपनी का एक ऐसा प्लेटफॉर्म है जहाँ डेवलपर्स अपनी रिपॉजिटरीज रखते हैं. BitChat एक ऐसा ही छोटा ऐप है जो ब्लूटूथ के जरिए वायरलेस मैसेजिंग उपलब्ध कराता है. डेढ़ सौ या दो सौ मीटर की दूरी पर मौजूद लोगों के साथ इसके जरिए चैटिंग और फोटो-वीडियो शेयर किए जा सकते हैं.
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वे आगे कहते हैं कि चैटिंग शुरू करने वाले ने अगर ऐप डिलीट कर दिया तो सारा डेटा डिलीट हो जाता है और कोई डिजिटल फुटप्रिंट नहीं बचता. ऐसे कितने ही ऐप्स इंटरनेट पर उपलब्ध हैं और ChatGPT के जरिए इसका कोड हासिल करके कोई भी ऐसा ऐप तैयार कर सकता है. I4C ने पत्र लिखा है, फिर भी बाकी सोर्स कोड और रिपॉजिटरीज उपलब्ध हैं. इसलिए, इस पर नियंत्रण पाना कानून लागू करने वाली एजेंसियों के लिए एक चुनौती है. खुद यूजर्स को ही यह जिम्मेदारी निभानी होगी. जब हम जवाबदेही की उम्मीद करते हैं, तो हमें भी जिम्मेदारी भरा बर्ताव करना चाहिए, ऐसी उम्मीद उन्होंने जताई.
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