
- सरकार की ओर से आज अप्रैल-जून तिमाही के जीडीपी आंकड़े जारी किए जाएंगे. सबकी नजरें इन आंकड़ों पर टिकी हैं.
- कई एजेंसियां इस तिमाही में भारत की जीडीपी ग्रोथ 6.5% से 7% के बीच रहने का अनुमान लगा रही हैं.
- अमेरिका ने भारतीय सामानों पर टैरिफ 50% तक बढ़ा दिया है, जिससे एक्सपोर्ट सेक्टर और रोजगार प्रभावित हो सकते हैं.
भारत की आर्थिक सेहत का बड़ा अपडेट आज आने वाला है. नेशनल स्टैटिस्टिक्स ऑफिस (NSO) आज यानी 29 अगस्त को अप्रैल-जून तिमाही (Q1 FY26) के जीडीपी आंकड़े जारी करेगा. इस बार के आंकड़े ऐसे समय में आ रहे हैं जब अमेरिका ने भारत पर डबल टैरिफ लगा दिया है और इससे एक्सपोर्ट सेक्टर पर दबाव बढ़ने की आशंका है. यही वजह है कि निवेशक और आम लोग दोनों की नजरें इन आंकड़ों पर टिकी हैं.
क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स
कई बड़ी एजेंसियां और बैंक इस तिमाही में भारत की जीडीपी ग्रोथ 6.5% से 7% के बीच रहने का अनुमान लगा रहे हैं. स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने इसे 6.8-7% तक बताया है. ICRA का अनुमान 6.7% है. एचडीएफसी बैंक और नोमुरा ने 6.6% कहा है, जबकि बार्कलेज ने 6.5% का अनुमान दिया है. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने भी Q1 के लिए 6.5% ग्रोथ का प्रोजेक्शन किया है.
पिछली तिमाही से सुस्त हो सकती है रफ्तार
पिछली तिमाही में भारत की जीडीपी 7.4% रही थी, लेकिन इस बार के आंकड़े कुछ धीमे दिख सकते हैं. वजह है कमजोर अर्बन डिमांड और प्राइवेट इन्वेस्टमेंट की कमी. इसके साथ ही अमेरिका की ओर से डबल टैरिफ का झटका आने वाले समय में और बड़ा असर डाल सकता है.
50% अमेरिकी टैरिफ का असर
अमेरिका ने बुधवार को भारतीय सामानों पर टैरिफ बढ़ाकर 50% तक कर दिया है. वजह बताई गई है कि भारत रूस से तेल खरीद रहा है. यह दर अमेरिका ने अपने किसी भी ट्रेडिंग पार्टनर पर सबसे ज्यादा लगाई है. इसका सीधा असर जॉब्स और एक्सपोर्ट सेक्टर पर हो सकता है. खासकर टेक्सटाइल, फुटवियर, केमिकल और फूड आइटम पर दबाव बढ़ सकता है.
ग्रोथ को सपोर्ट देने वाले फैक्टर
हालांकि एक्सपर्ट्स का कहना है कि अच्छी मानसून, सरकार का ज्यादा खर्च, फूड इन्फ्लेशन में राहत और अमेरिका को फ्रंट-लोडेड शिपमेंट से ग्रोथ को कुछ सहारा मिला है. रिटेल महंगाई जुलाई में 1.55% रही, जो पिछले 8 साल में सबसे कम है.
नोमिनल ग्रोथ पर दबाव
रियल जीडीपी यानी महंगाई को निकालकर की गई ग्रोथ 6.7% के आसपास रहने का अनुमान है, लेकिन नोमिनल जीडीपी यानी महंगाई समेत ग्रोथ घटकर 8% तक रह सकती है. पिछले 8 क्वार्टर में औसत 11% रही थी. इससे सरकार की टैक्स इनकम और कंपनियों के प्रॉफिट पर असर पड़ सकता है.
कंपनियों के नतीजे भी कमजोर
आरबीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, देश की 1,736 लिस्टेड प्राइवेट मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों की सालाना सेल्स ग्रोथ जून तिमाही में घटकर 5.3% रह गई, जबकि पिछली तिमाही में यह 6.6% थी.
US टैरिफ GDP ग्रोथ के लिए कितना बड़ा फैक्टर?
कुछ इकोनॉमिस्ट का मानना है कि अगर अमेरिका का टैरिफ लंबे समय तक बना रहा तो भारत की जीडीपी और गिर सकती है. एचएसबीसी की चीफ इकोनॉमिस्ट प्रांजल भंडारी का कहना है कि अगर यह टैरिफ एक साल तक चला तो जीडीपी 0.7% तक स्लो हो सकती है. सबसे ज्यादा असर ज्वेलरी, टेक्सटाइल और फूड जैसे लेबर-इंटेंसिव सेक्टर्स पर होगा.
ट्रंप टैरिफ के असर को कम करने के लिए सरकार की तैयारी
सरकार ने साफ किया है कि अमेरिका के टैरिफ से प्रभावित सेक्टर्स को सपोर्ट दिया जाएगा. साथ ही टैक्स कटौती और जीएसटी रेट कम करने की तैयारी है ताकि घरेलू खपत को बढ़ाया जा सके. वित्त मंत्रालय ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि जीएसटी कटौती से घरों का खर्च कम होगा और डिमांड बढ़ेगी. वहीं S&P Global की हाल की रेटिंग अपग्रेड से विदेशी पूंजी आने और लोन सस्ता होने की उम्मीद है.
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