- भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा देश है जो अपनी जरूरत का लगभग 90 प्रतिशत कच्चा तेल विदेश से आयात करता है
- भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा देश है जहां सबसे ज्यादा रिफाइनिंग क्षमता है और पेट्रोलियम उत्पाद तैयार होते हैं
- भारत की 24 रिफाइनरियां प्रतिदिन लगभग 56 लाख बैरल तेल रिफाइन करती हैं जिनमें सरकारी और निजी दोनों शामिल हैं
- भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा मुल्क है जो कच्चे तेल का सबसे ज्यादा इम्पोर्ट करता है.
- भारत दुनिया का सातवां सबसे बड़ा मुल्क है जो पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स का सबसे ज्यादा एक्सपोर्ट करता है.
- और यही भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा मुल्क भी है जहां सबसे ज्यादा तेल रिफाइन किया जाता है.
ये तीन आंकड़े हैं जो भारत की 'तेल यात्रा' के बारे में बताते हैं. भारत को अपनी जरूरत का 90 फीसदी तक कच्चा बाहर से खरीदना पड़ता है. लेकिन यही तेल भारत में आता है, रिफाइन होता है और फिर सिर्फ एशिया ही नहीं, बल्कि यूरोपीय देशों तक जाता है. ये दिखाता है कि भारत के पास भले ही तेल के कुएं न हों लेकिन तेल से पेट्रोल और डीजल कैसे निकालना है और उसे बेचना कहां है, ये भारत को बखूबी आता है.
अब इसकी चर्चा क्यों?
क्योंकि भारत और मॉरीशस के बीच एक अहम समझौता हुआ है. इसके तहत अब मॉरीशस को भारत पेट्रोल-डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) का एक्सपोर्ट करेगा.
पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी की 21-22 अगस्त को मॉरीशस यात्रा के दौरान इस समझौते पर दस्तखत हुए. इस समझौते के तहत, भारत की सरकारी तेल कंपनी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) भारत अगले 5 साल तक मॉरीशस की पेट्रोल, डीजल और ATF की जरूरत को पूरा करेगा.
यह समझौता IOC और मॉरीशस की स्टेट ट्रेडिंग कॉर्पोरेशन के बीच हुआ है. यह एक लॉन्ग टर्म समझौता है. इतना ही नहीं, यह भारत की किसी सरकारी तेल कंपनी का साउथ एशिया के बाहर हुआ पहला लॉन्ग टर्म समझौता है.
इम्पोर्टर से एक्सपोर्टर कैसे बना इंडिया?
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा देश है जहां कच्चे तेल की सबसे ज्यादा खपत होती है. लेकिन भारत में खाड़ी देशों की तरह तेल के कुएं नहीं हैं. इसलिए भारत इस जरूरत को पूरा करने के लिए कच्चे तेल का इम्पोर्ट (आयात) करता है.
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, भारत अपनी जरूरत का 88% कच्चा तेल इम्पोर्ट करता है. इस तेल को खरीदने पर हर साल 13 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च होते हैं.
लेकिन यहां एक बात यह भी है कि भारत भले ही कच्चे तेल का तीसरा सबसे बड़ा इम्पोर्टर हो लेकिन कच्चे तेल को रिफाइन कर उससे पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स बनाकर एक्सपोर्ट करने के मामले में भी 7वां सबसे बड़ा मुल्क है. इसकी वजह क्या है? भारत की रिफाइनरियों की ताकत.
न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, भारत की 24 रिफाइनरियां मिलकर हर दिन लगभग 56 लाख बैरल तेल रिफाइन करती हैं. इनमें कुछ सरकारी हैं तो कुछ प्राइवेट. रिलायंस इंडस्ट्रीज, रूस की नायरा एनर्जी और HPCL-मित्तल एनर्जी मिलकर कुल रिफाइनिंग कैपेसिटी का लगभग 40% हिस्सा कंट्रोल करती हैं.
यह भी पढ़ेंः क्या भारत में हैं तेल के कुएं? अब समंदर में भी खजाना ढूंढेगी सरकार... लेकिन है ये बड़ा रिस्क
कैसे होता है यह सब?
जमीन या समंदर से जो कच्चा तेल निकलता है, उसे सीधा इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है. उसे रिफाइन किया जाता है.
ये काम रिफाइनरियों में आता है. यहां कच्चा तेल आता है, उसे प्रोसेस किया जाता है और फिर उससे पेट्रोल, डीजल, ATF, LPG और नेफ्था जैसे पेट्रोलियम प्रोडक्टस बनाए जाते हैं.
पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) के मुताबिक, 1 अप्रैल 2026 तक भारत की रिफाइनिंग कैपेसिटी 26.71 करोड़ टन पहुंच गई. 2014 तक ये सालाना कैपेसिटी 21.50 करोड़ टन थी. यानी 12 सालों में कैपेसिटी 24% से ज्यादा बढ़ गई.

PPAC के डेटा से इम्पोर्ट-एक्सपोर्ट का पूरा खेल समझते हैं. 2025-26 में भारत ने कच्चे तेल और पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स को मिलाकर कुल 29.19 करोड़ टन का इम्पोर्ट किया. अब इसमें 6.14 करोड़ टन का एक्सपोर्ट कर दिया. इस हिसाब से भारत का नेट इम्पोर्ट 23.05 करोड़ टन रहा.
यानी, एक तरफ भारत बहुत भारी मात्रा में कच्चा तेल खरीदता है और दूसरी तरफ उसी कच्चे तेल को रिफाइन करके दुनिया को पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स बेचता है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, भारत साउथ एशिया के अलावा अफ्रीकी और यूरोपिय देशों को भी एक्सपोर्ट करता है.
यह भी पढ़ेंः रोज 37 हजार हाथियों के वजन के बराबर कचरा पैदा कर रहा भारत, लेकिन ये जाता कहां है?
यहां है भारत का असली सीक्रेट!
भारत की असली ताकत कच्चा तेल निकालने में नहीं, बल्कि रिफाइनिंग में है. एक अनुमान के मुताबिक, एक बैरल कच्चे तेल से 35.8% पेट्रोल, 25.9% डीजल, 22.2% मोम-ल्यूब्रिकेंट्स वगैरह, 5% मरीन फ्यूल, 4.7% जेट फ्यूल, 2.3% असफॉल्ट और 4.1% बाकी पेट्रो-केमिकल बनाए जा सकते हैं.
भारत दुनिया के रिफाइनिंग मैप में एक बड़ी ताकत बनकर उभरा है. आज के समय में भारत हर साल 26.71 करोड़ टन से ज्यादा कच्चा तेल रिफाइन कर सकता है. 2030 तक इस क्षमता को बढ़ाकर लगभग 31 करोड़ टन तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है.

गुजरात के जामनगर में रिलायंस इंडस्ट्रीज की सबसे बड़ी तेल रिफाइनरी है. इसमें रिलायंस की दो रिफाइनरियां हैं. एक की क्षमता 3.3 करोड़ टन है. दूसरी रिफाइनरी स्पेशल इकनॉमिक जोन (SEZ) में बनी है, जिसकी क्षमता 3.52 करोड़ टन है. इस रिफाइनरी में सिर्फ एक्सपोर्ट के लिए तेल रिफाइन होता है. रिलायंस का दावा है कि उसकी रिफाइनरी में हर दिन 12.4 लाख बैरल तेल को रिफाइन किया जा सकता है.
रिलायंस के अलावा, इंडियन ऑयल की 9, हिंदुस्तान पेट्रोलियम की 2 और भारत पेट्रोलियम की 3 रिफाइनरियां हैं. नायरा एनर्जी की 2 और HPCL-मित्तल एनर्जी की 1 रिफाइनरी है. कुल मिलाकर 24 रिफाइनरियां हैं.
इन्हीं रिफाइनरियों की बदौलत भारत इम्पोर्टर के साथ-साथ एक्सपोर्टर भी है. PPAC के मुताबिक, भारत के कुल इम्पोर्ट में कच्चे तेल की हिस्सेदारी 18.6% है. जबकि, कुल एक्सपोर्ट में 9.3% की हिस्सेदारी है.
यह भी पढ़ेंः 17 दिन की कमाई के बराबर एक टिकट की कीमत, भारत में फ्लाइट से सफर करना कितना महंगा है?
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं