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भारत-न्यूजीलैंड FTA पर इसी महीने लग जाएगी आखिरी मुहर, इस समझौते से भारत को क्या फायदा होगा, किन सेक्टरों में आएगा बूम?

भारत और न्यूजीलैंड 27 अप्रैल 2026 को एक ऐतिहासिक FTA पर हस्ताक्षर करेंगे, जिसके तहत न्यूजीलैंड भारतीय निर्यातों पर शून्य शुल्क की अनुमति देगा.

भारत-न्यूजीलैंड FTA पर इसी महीने लग जाएगी आखिरी मुहर, इस समझौते से भारत को क्या फायदा होगा, किन सेक्टरों में आएगा बूम?
  • भारत और न्यूजीलैंड के बीच FTA का लीगल वेरिफिकेशन पूरा हो चुका है और समझौते पर 27 अप्रैल को हस्ताक्षर होंगे
  • न्यूजीलैंड के 95 प्रतिशत निर्यात पर शुल्क समाप्त या कम कर दिया जाएगा, जिससे भेड़ का मांस, ऊन और कोयला शामिल
  • भारत को अपने 100% निर्यात पर शून्य शुल्क बाजार मिलेगा, लेकिन कुछ डेयरी उत्पादों और कृषि वस्तुओं पर रियायत नहीं

भारत-न्यूजीलैंड फ्री ट्रेड एग्रीमेंट एफटीए में लीगल वेरिफिकेशन का काम पूरा हो चुका है और दोनों देश 27 अप्रैल को समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे. इस दौरान दोनों देशों के व्यापार जगत से जुड़े बड़ी संख्या में प्रतिनिधि मौजूद होंगे. यह बयान न्यूजीलैंड के ट्रेड एंड इन्वेस्टमेंट मंत्री टोड मैक्ले ने सोमवार को दिया. इस समझौते से भारत के कई सेक्टरों में बूम आएगा. 

मैक्ले ने अपने बयान में कहा,'यह एक पीढ़ी में केवल एक बार आने वाला मौका है. इससे हमारे निर्यातकों को 1.4 अरब की आबादी वाला एक बड़ा बाजार और एक ऐसी अर्थव्यवस्था में अपना सामान बेचने का मौका मिलेगा, जो कि जल्दी दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने जा रही है.' उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर अस्थिरता के बीच, न्यूजीलैंड की समृद्धि के लिए भारत के साथ व्यापार समझौता पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गया है.

इन सेक्टरों को होगा फायदा

मंत्री ने कहा, 'एफटीए पर हस्ताक्षर करने से न्यूजीलैंड को औपचारिक संसदीय संधि समीक्षा शुरू करने का अवसर मिलेगा और जनता समझौते की पूरी तरह से जांच कर सकेगी.' मैक्ले ने बताया, इस एफटीए के तहत न्यूजीलैंड के 95 प्रतिशत निर्यात पर शुल्क समाप्त या कम कर दिया गया है, जो किसी भी भारतीय मुक्त व्यापार समझौते में सबसे अधिक है. हमारे लगभग 57 प्रतिशत निर्यात पहले दिन से ही शुल्क-मुक्त होंगे, जिनमें भेड़ का मांस, ऊन, कोयला, चमड़ा, अधिकांश वानिकी और औद्योगिक उत्पाद शामिल हैं. यानी इन सेक्टरों को इस डील से काफी फायदा होगा.

इस समझौते से भारत को अपने 100 प्रतिशत निर्यात पर शून्य शुल्क बाजार पहुंच मिलेगी. इसमें ऊन, कोयला, लकड़ी, शराब से लेकर एवोकाडो और ब्लूबेरी शामिल हैं. हालांकि, किसानों और घरेलू उद्योग को संरक्षण देने के लिए भारत ने दूध, क्रीम, मट्ठा, दही और पनीर जैसे डेयरी उत्पादों, प्याज, चीनी, मसाले, खाद्य तेल और रबड़ के आयात पर कोई शुल्क रियायत नहीं दी है. इस समझौते के तहत, न्यूजीलैंड को भेड़ का मांस, ऊन, कोयला और वानिकी एवं लकड़ी से बने 95 प्रतिशत से अधिक उत्पादों पर शुल्क-मुक्त पहुंच प्राप्त होगी. सेवा क्षेत्र के संबंध में, न्यूजीलैंड भारतीय पेशेवरों के लिए प्रतिवर्ष 5,000 वीजा के कोटे के साथ तीन वर्ष तक के प्रवास की अवधि वाला अस्थायी रोजगार प्रवेश वीजा प्रदान करेगा.

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पिछले साल हुआ था समझौता

भारत और न्यूजीलैंड के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौता पिछले साल दिसंबर में हुआ है. मैक्ले ने कहा कि सरकार भारत के साथ एफटीए के लिए स्थापित संसदीय संधि जांच प्रक्रिया का पालन करेगी, जिससे सभी पक्षों को समझौते पर अपने समर्थन पर विचार करने का अवसर मिलेगा, जबकि जनता भी समझौते की बारीकी से जांच करेगी. भारत, न्यूजीलैंड के अलावा अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, यूरोपीय यूनियन, यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (ईएफटीए), यूएई और ओमान के साथ भी द्विपक्षीय व्यापार समझौता कर चुका है.

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(एजेंसी के इनपुट के साथ)

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अनुभव शाक्य
chief sub editor
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