देश में इस समय रईसों की संख्या और उनकी नेट वर्थ दोनों ही तेज स्पीड से बढ़ रही है. द इंडियन फैमिली ऑफिसेज रिपोर्ट 2026 के आंकड़ों के अनुसार भारत में 30 मिलियन डॉलर यानी करीब 283 करोड़ रुपये से ज्यादा नेट वर्थ वाले परिवारों की संख्या 2030 में 26 हजार के पार पहुंच जाएगी. साल 2025 में देश के अंदर 16 हजार रईस परिवार मौजूद थे. नए अमीर लोगों को जोड़ने के मामले में भारत अब सिर्फ अमेरिका और चीन से ही पीछे है.
देश में बढ़ा इंटरजनरेशनल वैल्थ ट्रांसफर
इसके अलावा रिपोर्ट में बताया है कि देश में एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी संपत्ति का ट्रांसफर पहले के मुकाबले ज्यादा बढ़ा है. इसी को देखते हुए अगले साल में भारत में 1.3 डॉलर से 1.5 ट्रिलियन डॉलर का इंटरजनरेशनल वैल्थ ट्रांसफर होने जा रहा है. मतलब साफ है कि दादा-परदादा की बनाई संपत्ति अब देश के युवाओं के हाथ में आ रही है.
स्टार्टअप्स और एआई पर पैसा लगा रहे युवा
फैमिली ऑफिसेज रिपोर्ट 2026 के अनुसार आज देश की युवा पीढ़ी फैमिली बिजनेस को चलाने की बजाय, उसे प्रोफेशनल्स को दे रही है. कई बड़े परिवारों ने अपने पुराने बिजनेस का कुछ शेयर बेचकर फंड जुटाया. अब इसे वो सही जह पर इन्वेस्ट करने का प्लान बना रहे हैं. इसके लिए देश में फैमिली ,बिजनेस का कल्चर लगातार बढ़ रहा है. अब 50% से ज्यादा भारतीय फैमिली ऑफिसेज में निवेश के फैसले युवा ले रहे हैं. इनमें से 30% युवाओं की पहली पसंद स्टार्टअप्स हैं, जिसमें एआई, फिनटेक और हेल्थटेक शामिल है.
टॉप 10 देशों में अरबपतियों की संख्या (फोर्ब्स)
- यूएसए- लगभग 989 अरबपति
- चीन- लगभग 539 अरबपति
- भारत- लगभग 229 अरबपति
- जर्मनी- लगभग 212 अरबपति
- रूस- लगभग 147 अरबपति
- कनाडा- 82 अरबपति
- हांगकांग- 71 अरबपति
- ब्राजील- 70 अरबपति
- ताइवान- 66 अरबपति
- स्विट्ज़रलैंड- 84 अरबपति
क्या होते हैं फैमिली ऑफिस?
आसान भाषा में कहें तो फैमिली ऑफिस किसी एक परिवार या फिर फैमिली ग्रुप की संपत्ति, निवेश और टैक्स से जुड़े कामकाजों को संभालने के लिए एक निजी संस्था है. एक्सपर्ट के अनुसार जब संपत्ति एक लेवल से ऊपर चली जाती है तो उसे केवल शेयर या प्रॉपर्टी में लगाना ही काफी नहीं होता. इसके गवर्नेंस, कस्टोडियनशिप, टैक्स प्लानिंग के लिए पूरी रूपरेखा तैयार करनी पड़ती है. फैमिली ऑफिस यही सारा काम बखूबी संभालते हैं.
देश में फैमिली ऑफिस की ये ग्रोथ बतलाती है कि देश का बिजनेस इकोसिस्टम मजबूत हो चुका है. रुपये के जरिए देश में तो निवेश हो ही रहा है साथ में क्रॉस बॉर्डर भी इसका इस्तेमाल खूब बढ़ा है. रिस्क मैनेजमेंट के साथ रिस्क डाइवर्सिफिकेशन मार्केट को देखकर जरूरी बन गए हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि आने वाले समय में फैमिली ऑफिस ना सिर्फ स्टार्टअप्स के लिए बल्कि देश को बड़े फाइनेंशियल हब बनाने में मदद करेंगे.
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