अमेरिका-ईरान के बीच हुई जंग से दुनियाभर में कच्चे तेल की सप्लाई पर असर पड़ा. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने से तेल की कीमतें आसमान पर पहुंच गईं. भारत पर इस पूरे मामले का असर सबसे ज्यादा पड़ा, क्योंकि देश अपनी जरूरत 90% कच्चा तेल दूसरे देश से आयात करता है. ऐसे में तेल की किल्लत से बचने के लिए देश ने रूस से रिकॉर्ड तोड़ तेल खरीदा. इसके अलावा प्रतिबंध हटने के बाद अब ईरान से भी तेल आना शुरू होगा, जिससे भारत का ऊर्जा संकट खत्म होगा.
जून में रूस से आया रिकॉर्ड तेल
एनर्जी कार्गो ट्रैकर के अनुसार जून महीने में भारत का रूसी तेल आयात 2.66 मिलियन बैरल प्रति दिन के ऑल टाइम हाई लेवल पर पहुंच गया. ये आंकड़ा इसलिए भी बड़ा है क्योंकि मई में ये आयात 1.91 मिलियन बैरल प्रति दिन था. सिर्फ एक महीने के अदंर आया ये बड़ा उछाल दिखाता है रूस की तेल सप्लाई से भारत का आयात पहले के लेवल पर जा पहुंचा है.
अब ईरान भी तैयार
रूस के इस रिकॉर्ड लेवल के बाद भारत के लिए दूसरी खुशखबरी ईरान से है. दरअसल ईरान पर लगे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध हटने के बाद, अब वहां से भी देश में तेल की सप्लाई शुरू होने का रास्ता साफ हो गया है. ईरान से तेल आने का फायदा यही है कि ईरान से भारत नजदीक है, जिससे कच्चे तेल की ढुलाई का खर्चा काफी हद तक कम हो जाता है. एक्सपर्ट का मानना है कि रूस के साथ ईरान की एंट्री से भारत के पास तेल खरीदने वाले ऑप्शन की कोई कमी नहीं रहेगी. जब देश के पास तेल का पर्याप्त मात्रा में स्टॉक रहेगा, तो लोकल मार्केट में पेट्रोल-डीजल की कीमतें काबू में रहेंगी, जिससे महंगाई से राहत मिल सकती है.
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