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GDP के बाद GST आंकड़ों पर पूर्व वित्त सचिव ने उठाए सवाल, CBIC ने बताया ‘शरारतपूर्ण’

GST कलेक्शन के आंकड़ों पर पूर्व वित्त सचिव सुभाष गर्ग ने सवाल उठाते हुए कम ग्रोथ का दावा किया है. वहीं, CBIC ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि बंद हो चुके सेस को जोड़कर तुलना करना गुमराह करने वाला है.

GDP के बाद GST आंकड़ों पर पूर्व वित्त सचिव ने उठाए सवाल, CBIC ने बताया ‘शरारतपूर्ण’
GST collection in August: ‘सेब की तुलना संतरे से न करें!’ GST कलेक्शन पर पूर्व वित्त सचिव के आरोपों पर CBIC ने दिया करारा जवाब

हाल ही में देश के GDP आंकड़ों को लेकर काफी चर्चा देखने को मिली थी. अब GST कलेक्शन के आंकड़ों पर भी एक नया विवाद खड़ा हो गया है. पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने सरकार के GST ग्रोथ के दावों पर सवाल उठा दिए हैं. हालांकि, सेंट्रल बोर्ड ऑफ इनडायरेक्ट टैक्सेस (CBIC) ने उनके इन दावों को पूरी तरह खारिज करते हुए इन्हें 'गुमराह करने वाला' और 'शरारतपूर्ण' बताया है.

पूर्व वित्त सचिव का क्या है दावा?

पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट शेयर की. उन्होंने दावा किया कि सरकार ने अगस्त महीने में 14.8% और पिछले 5 महीनों में 11% की GST ग्रोथ का दावा किया है. उनके मुताबिक, सरकार ने यह आंकड़ा दिखाते वक्त एक चाल चली है.

उन्होंने कहा कि सरकार ने 2025-26 के आंकड़ों से 'GST सेस' को चुपचाप हटा दिया. अगर पुराने सेस को भी आंकड़ों में शामिल किया जाए, तो 5 महीनों की असली ग्रॉस GST ग्रोथ सिर्फ 4.08% और नेट ग्रोथ महज 1.30% ही रह जाती है. गर्ग का कहना है कि यह प्रदर्शन बहुत खराब है.

CBIC ने दिया करारा जवाब: 'सेब की तुलना संतरे से न करें'

सुभाष गर्ग के इन आरोपों के बाद CBIC ने तुरंत स्पष्टीकरण जारी किया. बोर्ड ने साफ कहा कि दो अलग-अलग टैक्स बेस के आंकड़ों को मिलाकर पेश करना गलत है. यह पूरी तरह से लोगों को गुमराह करने की कोशिश है.

CBIC ने समझाया कि सही और निष्पक्ष एनालिसिस के लिए हमेशा एक जैसी चीजों की ही तुलना की जानी चाहिए. अगर आप अलग-अलग आधार वाली चीजों की तुलना करेंगे, तो यह सेब की तुलना संतरे से करने जैसा होगा.

कम्पेनसेशन सेस क्यों हटाया गया?

CBIC ने आंकड़ों का गणित समझाते हुए कहा कि GST काउंसिल ने 22 सितंबर 2025 से ही अधिकांश सामानों पर कम्पेनसेशन सेस खत्म करने का फैसला लिया था. इसके बाद सिर्फ तंबाकू और उससे जुड़े सामानों पर ही सेस लागू था, जिसे भी 1 फरवरी 2026 से पूरी तरह हटा दिया गया.जब कानूनन कोई टैक्स या सेस खत्म ही कर दिया गया है, तो उसे तुलना के आधार (Tax Base) में बनाए रखने का कोई मतलब नहीं बनता. CBIC का कहना है कि बंद हो चुके सेस को जोड़कर ग्रोथ निकालना न तो गणित के हिसाब से सही है और न ही इसका कोई लॉजिक बनता है.

सार्वजनिक रूप से साफ रखे गए हैं आंकड़े

बोर्ड ने यह भी बताया कि नवंबर 2025 से ही पब्लिक डोमेन में जारी होने वाले GST रेवेन्यू के आंकड़ों में सेस का अलग से एक टेबल दिया जाता है. इसके अलावा, सालाना ग्रोथ की गणना सिर्फ CGST, SGST और IGST के आधार पर ही की जा रही है.

CBIC के मुताबिक, सरकार का मकसद जनता के सामने GST रेवेन्यू की बिल्कुल सही और साफ तस्वीर पेश करना है, ताकि लोग समझ सकें कि देश का असली टैक्स बेस किस दिशा में आगे बढ़ रहा है.

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