UPI MDR चार्ज पर उठ रहे सवालों के बीच सरकार का बयान सामने आया है. सरकारी सूत्रों के मुताबिक, नियमों को लागू करने में जो कमियां रह गई हैं, उन्हें दूर करने की कोशिश की जाएगी. सरकार ने पेमेंट एग्रीगेटर्स के साथ इस मुद्दे पर बातचीत की है. सरकार इस व्यवस्था के लागू होने पर बारीकी से नजर रखेगी, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि मर्चेंट यह चार्ज ग्राहकों पर न डालें.
UPI पर GST की बात सिर्फ अफवाह
सरकारी सूत्रों का कहना है कि MDR को लेकर किसी तरह का दबाव नहीं है. UPI पर GST लगाए जाने की बात सिर्फ अफवाह है. इसे इनपुट टैक्स क्रेडिट के जरिए एडजस्ट किया जाएगा. अगर कोई दिक्कत सामने आती है, तो GST काउंसिल उस पर विचार करेगी.
'नहीं बढ़ेगा नकद लेनदेन'
सूत्रों के मुताबिक, MDR की वजह से कैश ट्रांजैक्शन में किसी बड़ी बढ़ोतरी के संकेत नहीं मिले हैं. सरकार को भरोसा है कि नकद लेनदेन नहीं बढ़ेगा. 15 अक्टूबर से नियम लागू होने के बाद भी UPI ट्रांजैक्शन में किसी कमी की उम्मीद नहीं है.
सरकारी सूत्रों के अनुसार, स्टॉक मार्केट में MDR चार्ज लागू करने का फैसला सोच-समझकर लिया गया था. 0.02% MDR चार्ज लगाने से पहले SEBI, स्टॉक एक्सचेंजों और स्टेकहोल्डर्स के साथ बातचीत की गई थी.
क्या हैं नए UPI MDR नियम?
नए नियमों के तहत 15 अक्टूबर से 2000 रुपये से ज्यादा के मर्चेंट यूपीआई भुगतान पर 0.4 प्रतिशत चार्ज लगेगा. इसका भुगतान व्यापारी करेगा और 75,000 रुपये या उससे अधिक के लेनदेन पर यह अधिकतम 300 रुपये होगा. वहीं, दो लोगों के बीच होने वाला लेनदेन और रोजमर्रा के छोटे व्यापारी भुगतान पर कोई चार्ज नहीं लगेगा.
रेलवे, दूरसंचार, ईंधन और बीमा जैसी आवश्यक सेवाओं के लिए 2,000 रुपये से अधिक के लेनदेन पर पांच रुपये का चार्ज होगा, जबकि म्यूचुअल फंड और शेयर ब्रोकिंग जैसे पूंजी बाजार लेनदेन पर 0.02 प्रतिशत एमडीआर लगेगा, जो अधिकतम 300 रुपये होगा.
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