मिडिल ईस्ट में जारी जंग और कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों के बीच हम भारतीयों के लिए एक राहत भरी खबर है. ईरानी तेल पर अमेरिकी प्रतिबंधों में 30 दिन की अस्थाई छूट के बाद भारत के लिए बड़ा मौका है. मौका, ईरानी तेल खरीदने का. मौका, अपने कच्चे तेल के भंडार भरने का. मौका, पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने की आशंका को खत्म करने का. जी हां, और भारतीय रिफाइनरियों ने इसके लिए अपने कदम बढ़ा भी दिए हैं. इससे पहले कि चीन, पाकिस्तान या दूसरे देश ऐसा करें, भारतीय रिफाइनरी कंपनियों ने समंदर में मौजूद ईरानी कच्चा तेल बुक करने की प्रक्रिया तेज कर दी है.
मामले की जानकारी रखने वाले कई लोगों ने बताया कि अन्य एशियाई रिफाइनर यह पता लगाने के लिए जांच कर रहे हैं कि क्या वे तेल खरीद सकते हैं. सूत्रों के अनुसार, तीन भारतीय रिफइनरीज ने कहा कि वे ईरानी तेल खरीदेंगे. इससे पहले वो पेमेंट की शर्तों जैसी डिटेल्स पर सरकार के निर्देशों और अमेरिका से स्पष्टता (Clarity) का इंतजार कर रहे हैं.
अमेरिका की ढील भारत के लिए मौका
कई मीडिया रिपोर्ट्स में रॉयटर्स के हवाले से बताया गया है कि अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट के अनुसार, अमेरिका ने उन ईरानी तेल टैंकरों को 30 दिनों की मोहलत दी है जो पहले से ही समुद्र में हैं. 'ऑफिस ऑफ फौरन एसेट्स कंट्रोल' (OFAC) के मुताबिक, ये छूट उन जहाजों पर लागू होगी जिनमें 20 मार्च या उससे पहले तेल लोड किया जा चुका है और जिन्हें 19 अप्रैल तक अनलोड (डिस्चार्ज) कर लिया जाएगा. युद्ध शुरू होने के बाद से यह तीसरी बार है जब अमेरिका ने तेल प्रतिबंधों में ढील दी है.

17 करोड़ बैरल तेल पर भारत की नजर
जानकारों के अनुसार, फिलहाल समुद्र में लगभग 13 से 17 करोड़ बैरल ईरानी कच्चा तेल मौजूद है. यह तेल मिडिल ईस्ट से लेकर चीन के समुद्री क्षेत्रों तक अलग-अलग जहाजों में फैला हुआ है. ये भारत के लिए भी मौका है और दूसरे एशियाई देशों के लिए भी. कारण कि एशियाई देश अपनी तेल जरूरतों का 60% हिस्सा मध्य पूर्व से ही पूरा करते है. इस महीने 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' के लगभग बंद होने से कई रिफाइनरियों को अपना उत्पादन घटाना पड़ा था, जिसे अब इस ईरानी तेल से सहारा मिल सकता है.
भारत के लिए क्यों है यह मौका?
चीन फिलहाल ईरान का सबसे बड़ा ग्राहक है, जो पिछले साल औसतन 13.8 लाख बैरल प्रतिदिन तेल खरीद रहा था. लेकिन भारत के लिए ये बड़ा मौक है. अन्य बड़े एशियाई आयातकों की तुलना में भारत के पास कच्चे तेल का भंडार (Stockpile) कम है. हाल ही में रूसी तेल पर से प्रतिबंध हटने के बाद भारत ने तेजी से खरीदारी की थी, और अब ईरानी तेल पर मिली यह छूट भारत के 'एनर्जी सिक्योरिटी' प्लान के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है.
...हालांकि कुछ चुनौतियां भी
ईरानी तेल खरीदने की राह में कुछ तकनीकी मुश्किलें भी सामने आ सकती हैं.
- पेमेंट की समस्या: व्यापारियों के अनुसार, प्रतिबंधों के बीच ईरान को भुगतान कैसे किया जाए, इसे लेकर अभी भी बैंकिंग स्पष्टता की कमी है.
- पुराने जहाज: ईरानी तेल का एक बड़ा हिस्सा 'शैडो फ्लीट' (पुराने और बिना बीमा वाले जहाज) पर लदा है, जिससे परिवहन का जोखिम बना रहता है.
- कॉन्ट्रैक्ट की शर्तें: कई पुरानी रिफाइनरियां केवल 'नेशनल ईरानी ऑयल कंपनी' (NIOC) से खरीदने के लिए बाध्य हैं, जबकि वर्तमान में अधिकांश तेल तीसरे पक्ष के व्यापारियों (Third-party traders) के जरिए बेचा जा रहा है.
जानकारों के मुताबिक, प्रतिबंधों में यह ढील भले ही केवल 30 दिनों के लिए हो, लेकिन वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कमी को दूर करने और कीमतों को स्थिर करने में यह एक टर्निंग पॉइंट साबित हो सकती है.
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