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Gold ETF में 164% की तूफानी तेजी, Silver ETF में भी रिकॉर्ड उछाल, जानें क्या है वजह

भारत में गोल्ड ETF की कुल संपत्ति अगस्त 2026 में बढ़कर 1.91 लाख करोड़ रुपये हो गई. एक साल पहले यह करीब 72,500 करोड़ रुपये थी. इस तरह इसमें सालाना 164% की बढ़ोतरी दर्ज की गई. यह आंकड़े बयां कर रहे हैं कि सोने की खरीदारी का तरीका पूरी तरह बदल चुका है.

Gold ETF में 164% की तूफानी तेजी, Silver ETF में भी रिकॉर्ड उछाल, जानें क्या है वजह
Gold ETF Investment: भारत में गोल्ड ETF की संपत्ति अगस्त 2026 में 164% बढ़कर ₹1.91 लाख करोड़ पहुंच गई.

सोने में निवेश करने का तरीका तेजी से बदल रहा है.भारतीय निवेशकों का भरोसा अब सोने के गहनों से हटकर डिजिटल गोल्ड और गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF) की तरफ  बढ़ रहा है. एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज की एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, अगस्त 2026 में भारत में गोल्ड ईटीएफ (Gold ETF) एसेट्स 164 फीसदी बढ़कर ₹1.91 लाख करोड़ के स्तर पर पहुंच गए. ठीक एक साल पहले यही आंकड़ा महज ₹72,500 करोड़ के आसपास था.   

सोने-चांदी में क्यों बढ़ रहा निवेश?

निवेशक अब सोने और चांदी को केवल बाजार में गिरावट से बचाव का जरिया नहीं मान रहे. निवेशक अब अपने पोर्टफोलियो को मजबूत करने, लिक्विडिटी बनाए रखने और रिस्क मैनेजमेंट के लिए सोने-चांदी को लगातार चुन रहे हैं.साल 2026 की शुरुआत ही सोने के लिए बेहद शानदार रही, जहां शुरुआती दो महीनों में ही इसने 11 नए रिकॉर्ड स्तरों को छुआ. 

केवल सोना ही नहीं, बल्कि चांदी ईटीएफ (Silver ETFs) में भी निवेशकों की भारी दिलचस्पी देखी जा रही है. रिपोर्ट के मुताबिक,अगस्त 2026 तक सिल्वर ETF की कुल संपत्ति ₹85,000 से ₹86,000 करोड़ तक पहुंच चुकी है.

कॉपर और एल्युमीनियम की मांग भी बढ़ी

कमोडिटी बाजार का ट्रेंड सिर्फ सोने-चांदी को लेकर नहीं  बल्कि कॉपर, एल्युमीनियम और जिंक को लेकर भी बदलता जा रहा है.  तांबा (Copper), एल्युमीनियम और जस्ता (Zinc) जैसे इंडस्ट्रियल मेटल्स की मांग भी बाजार में तेजी से बढ़ी है. देश में बढ़ते इंफ्रास्ट्रक्चर, मैन्युफैक्चरिंग, रिन्यूएबल एनर्जी और इलेक्ट्रिफिकेशन के काम से इन मेटल्स की जरूरत लगातार बढ़ रही है. 

युवाओं की पसंद भी बदली

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की शीला कुलकर्णी के अनुसार, सोने की मांग में बड़ा बदलाव आया है. अब कुल मांग में ज्वेलरी की हिस्सेदारी धीरे-धीरे घट रही है. युवा  अब भारी-भरकम गहनों की जगह हल्के गहने पसंद कर रहे हैं .वे अपने खर्च का कुछ हिस्सा घूमने-फिरने और अन्य प्रोडक्ट्स पर खर्च कर रहे हैं. इस बदलाव के बीच डिजिटल गोल्ड और गोल्ड ETF जैसे विकल्प निवेशकों का ध्यान खींच रहे हैं.

मल्टी-एसेट फंड में भी बढ़ा पैसा

जोखिम कम करने के लिए निवेशकों का झुकाव मल्टी-एसेट एलोकेशन फंड्स (Multi-Asset Allocation Funds) की तरफ भी है. अगस्त 2026 में इन फंड्स का कुल एसेट ₹2.07 लाख करोड़ से अधिक हो गया, जो पिछले साल के मुकाबले लगभग 57 प्रतिशत ज्यादा है. इस कैटेगरी में लगातार 60 महीनों से पॉजिटिव इनफ्लो देखा जा रहा है. हालांकि ये पूरी तरह से कमोडिटी फंड्स नहीं हैं, लेकिन अलग-अलग आर्थिक स्थितियों में जोखिम संभालने के लिए निवेशक इनका खूब सहारा ले रहे हैं.   

एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज के ब्रोकिंग कारोबार के सीईओ राहुल रेगे के मुताबिक, कमोडिटी बाजार के विस्तार के साथ ब्रोकिंग कंपनियों की भूमिका भी बदल रही है. अब उनसे सिर्फ सौदे कराने के बजाय कई तरह की संपत्तियों में निवेश और जोखिम संभालने में सलाह देने की उम्मीद बढ़ रही है.

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