आज के डिजिटल दौर में लोगों का ध्यान जल्दी भटक जाता है, इसलिए अब पुराने तरीके के ऐड उतने असरदार नहीं रहे. इसी बात पर गोवा फेस्ट 2026 में एनडीटीवी के ‘द हुक' खास शो में चर्चा हुई, जिसमें बड़े ऐड और कॉर्पोरेट एक्सपर्ट्स ने हिस्सा लिया. इस चर्चा में बताया गया कि आज ब्रांड्स को बड़े ऐड्स पर करोड़ों खर्च करने के बजाय सोशल मीडिया पर एक अच्छा हुक यानी धमाकेदार आइडिया चाहिए, जो तुरंत वायरल हो जाए.
बातचीत में कॉकरोच जनता पार्टी जैसे वायरल ट्रेंड और पीएम मोदी–जॉर्जिया मेलोनी के मेलोडी मोमेंट का भी जिक्र हुआ. साथ ही ये सवाल भी उठा कि क्या सिर्फ वायरल होना ही काफी है या ब्रांड बनाने के लिए इसके पीछे मजबूत सोच और प्लानिंग भी जरूरी है.
एनडीटीवी के सीईओ और एडिटर इन चीफ राहुल कंवल ने कॉकरोच जनता पार्टी, 'मेलोडी मोमेंट' का जिक्र करते हुए कहा कि, "आज एडवरटाइजिंग की दुनिया पूरी तरह बदल चुकी है. अब ब्रांड्स महीनों पहले से फिक्स कैंपेन के भरोसे नहीं बैठ सकते. आज आपको अचानक से पैदा होने वाले कल्चर मूवमेंट्स पर तुरंत रिएक्ट करना पड़ता है. 'कॉकरोच जनता पार्टी' जैसे ट्रेंड्स बताते हैं कि ऑडियंस का हुक अब मीम्स और रील्स में छुपा है."
दर्शना शाह के 4-S मंत्र
आदित्य बिड़ला कैपिटल की सीएमओ दर्शना शाह ने कहा कि अभी के कंज्यूमर्स का फोकस लगातार बंट रहा है. हम हर समय 4-S के बीच घूम रहे हैं, स्क्रॉलिंग, स्ट्रीमिंग, सर्चिंग और शॉपिंग. कंज्यूमर के पास समय नहीं है, इसलिए ब्रांड्स के पास उन्हें अपनी तरफ खीचने के लिए केवल कुछ सेकंड का हुक होता है." दर्शना ने जोर दिया कि आज कंटेंट और कॉमर्स मिल चुकी हैं, जिससे जागरूकता से लेकर सीधे खरीदारी तक का सफर बहुत छोटा हो गया है.
क्या वायरलिटी ही सब कुछ है?
स्विगी के सीईओ रोहित कपूर ने मीम और मोमेंट मार्केटिंग पर अपनी बेबाक राय रखी. उन्होंने माना कि स्विगी जैसे ब्रांड्स के लिए रोजाना के ट्रेंड्स से जुड़ना जरूरी है, लेकिन केवल वायरल होना ही होना जरूरी नहीं. मैडिसन वर्ल्ड के सैम बलसारा ने इस बात पर हामी भरते हुए कहा, "आजकल कई ब्रांड्स लॉन्ग टर्म ब्रांड बिल्डिंग को छोड़कर केवल शॉर्ट टर्म परफॉर्मेंस मार्केटिंग और सोशल मीडिया रीच के पीछे भाग रहे हैं. अगर कोई वायरल मोमेंट आपके ब्रांड की लॉन्ग टर्म मेमोरी या रिकॉल वैल्यू को नहीं बढ़ाता, तो वो बेकार है."
हवास इंडिया के राणा बरुआ ने बताया कि आज का मार्केटिंग इकोसिस्टम एक वर्क-इन-प्रोग्रेस मॉडल है. ब्रांड्स को ये तय करना होगा कि वो कंज्यूमर्स के लिए सिर्फ मन पसंद के प्रोडक्ट्स बनना चाहते हैं या उनके जीवन को बदलने वाले प्रोडक्ट्स को लाना चाहते हैं.
एनडीटीवी प्रॉफिट के 'द हुक' का विजन
ये सेशन केवल एक चर्चा नहीं था, बल्कि एनडीटीवी प्रॉफिट के लीगेसी शो ऑल अबाउट एड्स' (All About Ads) का एक आधुनिक अवतार था. 'द हुक' शो के जरिए अब आने वाले दिनों में एआई (AI), क्रिएटर इकोनॉमी, हाइपर-पर्सनलाइजेशन जैसे विषयों पर गहराई से बात की जाएगी. गोवा फेस्ट 2026 की इस चर्चा ने साफ कर दिया कि जो ब्रांड समय के साथ खुद को सोशल मीडिया कल्चर में नहीं ढालेंगे, वो इतिहास बन जाएंगे.
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