Ghaziabad Aerocity Development Plan: नई दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट से सटे एयरोसिटी आप कभी घूमे हैं या नहीं? JW मैरियट, होटल हयात, हॉलीडे इन जैसे वर्ल्ड-क्लास लग्जरी होटल्स, द वॉक और वर्ल्ड मार्क जैसे प्रीमियम ऑफिस स्पेस, लग्जरी शॉपिंग, फूड कैपिटल का संगम और यहां की नाइटलाइफ...उफ्फ, देखते ही आप कहेंगे- सो ब्यूटीफुल, सो एलिगेंट, जस्ट लुकिंग लाइक ए वॉव. जी हां, एयरोसिटी मतलब बिजनेस, लग्जरी लाइफस्टाइल, हॉस्पिटैलिटी और एंटरटेनमेंट का एक ऐसा परफेक्ट कॉम्बिनेशन, जहां वर्ल्ड-क्लास सुविधाएं एक ही जगह पर मिल जाती हैं. ये तो हो गई दिल्ली की बात. ऐसा ही कुछ प्लान हो रहा है, आपके गाजियाबाद (Ghaziabad) में.
जी हां! गाजियाबाद में तेजी से विकसित हो रहे राजनगर एक्सटेंशन के पास GDA यानी गाजियाबाद डेवलपमेंट अथॉरिटी 'एयरोसिटी' डेवलप कर रहा है. हिंडन एयरपोर्ट से सटे इस एयरोसिटी प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी खासियत है, यहां लागू होने वाली लैंड पूलिंग नीति (Land Pooling Policy), जिसके तहत जमीन देने वाले किसानों को एयरोसिटी में उन्हीं की जमीन का डेवलप्ड शेयर यानी विकसित किया गया हिस्सा वापस किया जाएगा. इस डेवलप्ड प्लॉट की वैल्यू खेतिहर जमीन की तुलना में कई गुना ज्यादा होगी. एक-एक एकड़ की इतनी कीमत, जितने में तोले में सोना आ जाए! यानी ये एक तरह से जमीन के बदले 'सोना' जैसा सौदा होगा.
GDA की मीटिंग में पास हुए एयरोसिटी प्रोजेक्ट में क्या-क्या होगा?
हाल ही में गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (GDA) की मीटिंग में 'एयरोसिटी परियोजना' को हरी झंडी दी गई है. ये दिल्ली-एनसीआर के रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर के नक्शे को बदलने वाला एक बेहद महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट है. GDA इस क्षेत्र को एक आधुनिक बिजनेस और रेजिडेंशियल हब के रूप में विकसित करने जा रहा है.
GDA के एक अधिकारी ने बताया कि दिल्ली के IGI एयरपोर्ट के पास बनी एयरोसिटी की तर्ज पर ही गाजियाबाद के राजनगर एक्सटेंशन के पास इस परियोजना को अमली जामा पहनाया जा रहा है. इस पूरी योजना का मुख्य उद्देश्य हिंडन कमर्शियल एयरपोर्ट के आसपास के इलाके को एक बड़े कमर्शियल, हॉस्पिटैलिटी और रेजिडेंशियल जोन में बदलना है.

इन 3 गांवों की 500 एकड़ जमीन पर विकसित होगी एयरोसिटी
गाजियाबाद के हिंडन एयरपोर्ट की बढ़ती सक्रियता और रपिड रेल/नमो भारत (RRTS) की बढ़ती कनेक्टिविटी के बीच इस एयरोसिटी का महत्व और भी बढ़ जाता है. इस जोन को दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे, हिंडन एयरपोर्ट और आरआरटीएस (RRTS) स्टेशन से सीधी कनेक्टिविटी मिलेगी, जिससे दिल्ली और मेरठ दोनों तरफ से आना-जाना बेहद आसान हो जाएगा. इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट के तहत करीब 200 हेक्टेयर (लगभग 500 एकड़) जमीन को शामिल किया जाएगा. इस परियोजना के दायरे में मुख्य रूप से गाजियाबाद के तीन प्रमुख गांव आएंगे.
- मोरटा
- अटौर
- मेवला अगरी
ये इलाका भौगोलिक रूप से भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये राजनगर एक्सटेंशन के स्थापित हाउसिंग मार्केट, दिल्ली-मेरठ रोड और नमो भारत ट्रेन के कॉरिडोर से बिल्कुल सटा हुआ है.
पहली बार 'लैंड पूलिंग नीति', जो जमीन देंगे, उन्हें क्या मिलेगा?
इस एयरोसिटी प्रोजेक्ट की सबसे खास बात है, गाजियाबाद के इतिहास में पहली बार लागू होने वाली 'लैंड पूलिंग नीति' (Land Pooling Policy). आमतौर पर सरकारें 'भूमि अधिग्रहण कानून' के तहत किसानों से जमीन खरीदती है, जिसमें कई बार मुआवजे को लेकर विवाद और कोर्ट-कचहरी के चक्कर में प्रोजेक्ट सालों-साल लटक जाते हैं. लेकिन लैंड पूलिंग इससे बिल्कुल अलग और आधुनिक मॉडल है.
लैंड पूलिंग के तहत किसान अपनी मर्जी से अपनी कच्ची जमीन, गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (GDA) को सौंपेंगे. प्राधिकरण उस पूरी जमीन को आपस में मिलाकर (Pool करके) वहां सड़कें, सीवरेज, बिजली, पार्क, कमर्शियल कॉम्प्लेक्स और स्कूल-कॉलेज जैसी आधुनिक सुविधाएं विकसित करेगा.
पूरी जमीन को अत्याधुनिक तरीके से विकसित करने के बाद, प्राधिकरण एक निर्धारित नीति के तहत कुल जमीन का एक तय हिस्सा विकसित प्लॉट के रूप में किसानों को वापस कर देगा. पॉलिसी के प्रावधानों के अनुसार, ये हिस्सा 40% से 50% तक हो सकता है. किसानों की कच्ची जमीन की वैल्यू कई गुना बढ़ जाएगी.
दिल्ली के IGI एयरपोर्ट के पास एयरोसिटी की एक झलक

दिल्ली की एयरोसिटी लग्जरी होटल्स, ऑफिस स्पेसेस और प्रीमियम लाइफस्टाइल के लिए जानी जाती है.
Photo Credit: Social Media/YT Screengrab
सरकार और किसान, दोनों के लिए फायदे का सौदा
लैंड पूलिंग नीति को किसानों और प्रशासन दोनों के लिए फायदेमंद माना जा रहा है. ये किसानों और सरकार दोनों के लिए 'win-win' डील जैसा है.
- किसानों को फायदा: किसानों को उनकी जमीन के बदले जो विकसित प्लॉट वापस मिलता है, उसकी बाजार कीमत (Market Value) उनकी पुरानी खेती की जमीन के मुकाबले कई गुना ज्यादा हो जाती है. इसके अलावा, किसान उस विकसित जमीन पर खुद बिजनेस कर सकते हैं, उसे बेच सकते हैं या बिल्डर्स के साथ मिलकर पार्टनरशिप में प्रोजेक्ट्स बना सकते हैं. इससे उन्हें जिंदगी भर के लिए कमाई का जरिया मिल जाता है.
- प्राधिकरण को फायदा: जीडीए (GDA) को जमीन अधिग्रहण के लिए एकमुश्त अरबों रुपये का मुआवजा नहीं बांटना पड़ेगा, जिससे प्रोजेक्ट की शुरुआती लागत बेहद कम हो जाएगी और काम तेजी से शुरू हो सकेगा.
रियल एस्टेट और इकोनॉमी पर क्या होगा असर?
राजनगर एक्सटेंशन के पास इस एयरोसिटी के बनने से गाजियाबाद की तस्वीर पूरी तरह बदल जाएगी. गुलशन ग्रुप के डायरेक्टर दीपक कपूर का कहना है कि एयरोसिटी प्रोजेक्ट से इलाके में प्रीमियम मार्केट का उदय होगा. जैसा कि दिल्ली-एनसीआर का मार्केट अब 'अफोर्डेबल' से 'प्रीमियम वैल्यू' की तरफ बढ़ रहा है, ये एयरोसिटी गाजियाबाद का सबसे वीआईपी और प्रीमियम जोन बनेगी. यहां 4-स्टार और 5-स्टार होटल, बड़े कॉर्पोरेट ऑफिस, शॉपिंग मॉल्स और हाई-एंड रेजिडेंशियल सोसायटियां बनेंगी.
ये प्रोजेक्ट रोजगार के भी नए अवसर लाएगा. प्रतीक ग्रुप के एमडी प्रतीक तिवारी कहते हैं कि कमर्शियल हब बनने के कारण आईटी, हॉस्पिटैलिटी, रिटेल और एविएशन सेक्टर से जुड़े हजारों युवाओं को गाजियाबाद में ही रोजगार के नए मौके मिलेंगे.
राजनगर एक्सटेंशन के पास मोरटा, अटौर और मेवला अगरी की जमीन पर बनने वाली यह एयरोसिटी गाजियाबाद के विकास में मील का पत्थर साबित होगी. लैंड पूलिंग नीति के कारण किसानों की सीधी भागीदारी इस प्रोजेक्ट को बिना किसी कानूनी विवाद के तय समय पर पूरा करने में मदद करेगी. आने वाले समय में यह इलाका दिल्ली-एनसीआर के सबसे बड़े हॉटस्पॉट में गिना जाएगा.

दिल्ली वाली एयरोसिटी की तुलना में गाजियाबाद एयरोसिटी
नई दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल (IGI) एयरपोर्ट के पास बसी 'एयरोसिटी' देश का सबसे प्रीमियम और सफल एविएशन-कम-कमर्शियल हब है. इसी तर्ज पर अब गाजियाबाद में राजनगर एक्सटेंशन के पास 200 हेक्टेयर में नई एयरोसिटी परियोजना को मंजूरी दी गई है. अगर हम नई दिल्ली और गाजियाबाद (राजनगर एक्सटेंशन) की इन दोनों एयरोसिटी परियोजनाओं की तुलना करें, तो इनमें कई दिलचस्प समानताएं नजर आती हैं.
- एयरपोर्ट-केंद्रित विकास (Airport-Led Development): दोनों ही परियोजनाओं का मुख्य उद्देश्य एक कमर्शियल एयरपोर्ट के आसपास के इलाके को 'बिजनेस और हॉस्पिटैलिटी हब' के रूप में विकसित करना है. दिल्ली एयरोसिटी जहां IGI एयरपोर्ट से जुड़ी है, वहीं गाजियाबाद की एयरोसिटी हिंडन सिविल टर्मिनल (Hindon Airport) की बढ़ती सक्रियता को भुनाने के लिए बनाई जा रही है.
- मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी (Multi-Modal Connectivity): दिल्ली एयरोसिटी मेट्रो (एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन) और नेशनल हाईवे (NH-48) से सीधे जुड़ी है. ठीक इसी तरह, राजनगर एक्सटेंशन के पास बन रही एयरोसिटी को नमो भारत ट्रेन (RRTS) के कॉरिडोर, दिल्ली-मेरठ रोड और ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे के जरिए बेहतरीन कनेक्टिविटी मिलेगी.
- प्रीमियम एंबिएंस और मिक्स-यूज डेवलपमेंट: दिल्ली की तरह ही गाजियाबाद की एयरोसिटी में भी 4-स्टार और 5-स्टार होटल्स, हाई-एंड रिटेल आउटलेट्स, प्रीमियम कॉर्पोरेट ऑफिस और आधुनिक रेजिडेंशियल स्पेस का एक मिक्चर तैयार किया जाएगा, जो इसे सामान्य शहरी इलाकों से बिल्कुल अलग लुक देगा.

दिल्ली से कितनी अलग होगी गाजियाबाद की एयरोसिटी?
लैंड एक्विजिशन मॉडल
- दिल्ली एयरोसिटी: इस परियोजना के लिए जीएमआर (GMR) और सरकार ने सीधे तौर पर बड़ी कंपनियों के साथ मिलकर जमीन का विकास किया और बड़े पैमाने पर सीधे कमर्शियल लीजिंग मॉडल को अपनाया.
- गाजियाबाद एयरोसिटी: यहां पहली बार 'लैंड पूलिंग नीति' (Land Pooling Policy) लागू की जा रही है. इसमें किसानों (मोरटा, अटौर और मेवला अगरी गांवों के) से जमीन छीनी नहीं जाएगी, बल्कि वे अपनी मर्जी से जमीन जीडीए (GDA) को देंगे. जीडीए उसे विकसित करके एक तय हिस्सा (प्लॉट के रूप में) किसानों को वापस सौंपेगा, जिससे स्थानीय किसान इस प्रोजेक्ट में सीधे तौर पर बिजनेस पार्टनर बनेंगे.
स्केल और अंतरराष्ट्रीय दर्जा
- दिल्ली एयरोसिटी: यह वैश्विक स्तर पर एक स्थापित इंटरनेशनल ट्रांजिट हब है. यहां मुख्य रूप से ग्लोबल कॉर्पोरेट हेडक्वार्टर्स, इंटरनेशनल फ्लाइट्स के क्रू और विदेशी बिजनेस ट्रैवलर्स को ध्यान में रखकर वर्ल्ड-क्लास इंफ्रास्ट्रक्चर बनाया गया है.
- गाजियाबाद एयरोसिटी: यह मुख्य रूप से एक रीजनल हब (Regional Hub) के रूप में उभरेगा. इसका फोकस दिल्ली-एनसीआर, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड/हरियाणा से आने वाले घरेलू यात्रियों, लॉजिस्टिक्स कंपनियों और स्टार्टअप्स पर अधिक होगा.
रियल एस्टेट और एफॉर्डेबिलिटी
- दिल्ली एयरोसिटी: यहां कमर्शियल स्पेस और होटल्स के दाम पूरे देश में सबसे महंगे रेट्स में शुमार हैं. यह आम या मिडिल-क्लास खरीदारों की पहुंच से काफी दूर है.
- गाजियाबाद एयरोसिटी: राजनगर एक्सटेंशन से सटे होने के कारण, ये प्रोजेक्ट गाजियाबाद के 'एफॉर्डेबल' मार्केट को 'प्रीमियम वैल्यू' की तरफ शिफ्ट जरूर करेगा, लेकिन दिल्ली की तुलना में यहां प्रॉपर्टी के दाम, लीजिंग कॉस्ट और होटल्स के टैरिफ थोड़े किफायती (Pocket-Friendly) होंगे.
दिल्ली की एयरोसिटी जहां 'इंटरनेशनल कॉर्पोरेट क्लास' को रिप्रेजेंट करती है, वहीं गाजियाबाद की प्रस्तावित एयरोसिटी लैंड पूलिंग के जरिए 'लोकल-पार्टनरशिप और रीजनल ग्रोथ' का एक आधुनिक मॉडल बन सकती है. ये गाजियाबाद को दिल्ली-एनसीआर के एक बड़े वीआईपी हॉटस्पॉट में बदलने का माद्दा (Potential) रखती है.
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