Ghaziabad 2.0: राजनगर, सिद्धार्थ विहार, वेब सिटी, वैशाली... गाजियाबाद में कहां कौन-से प्रोजेक्ट्स, किधर बढ़ेगी प्रॉपर्टी डिमांड?
Ghaziabad Real Estate Expansion: गाजियाबाद अब केवल दिल्ली का विकल्प नहीं रहा. यहां लगातार पास हो रहे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स अलग-अलग इलाकों की वैल्यू बढ़ा रहे हैं. रियल एस्टेट के नजरिये से किधर कौन से प्रोजेक्ट्स डेवलप हो रहे हैं और कहां बढ़ेंगी कीमतें?
Ghaziabad Real Estate Projects Development: राजधानी दिल्ली से सटा आपका गाजियाबाद (Ghaziabad) अब केवल NCR यानी नेशनल कैपिटल रीजन का हिस्सा नहीं रहा है, बल्कि ये अपने आप में एक बड़े मेट्रो सिटी के तौर पर डेवलप हो रहा है. दिल्ली-NCR में लंबे समय तक गाजियाबाद को केवल दिल्ली के सस्ते विकल्प के तौर पर देखा जाता था, लेकिन अब तस्वीर तेजी से बदल रही है. इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम, नई मेट्रो कनेक्टिविटी, इंटीग्रेटेड टाउनशिप, स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट और एयर कनेक्टिविटी जैसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स ने गाजियाबाद को एक नए शहरी विकास मॉडल के रूप में खड़ा कर दिया है. यही वजह है कि अब यह शहर केवल घर खरीदने की जगह नहीं, बल्कि निवेश, लाइफस्टाइल और भविष्य की ग्रोथ का बड़ा केंद्र बनता जा रहा है.
इंफ्रा प्रोजेक्ट्स बदल रहे मेट्रो सिटी की तस्वीर
GDA की पिछले दिनों हुई बोर्ड बैठक में राजनगर एक्सटेंशन में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम के प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद पूरे क्षेत्र में रियल एस्टेट से जुड़ी गतिविधियां और बढ़ने की उम्मीद है.
करीब 33 एकड़ में PPP मॉडल पर बनने वाला यह स्टेडियम गाजियाबाद को स्पोर्ट्स और एंटरटेनमेंट हब के रूप में नई पहचान दे सकता है. रियल एस्टेट से जुड़े एक्सपर्ट मानते हैं कि जहां बड़े स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर बनते हैं, वहां आसपास होटल, रिटेल, हाई-स्ट्रीट मार्केट, रेस्टोरेंट और आवासीय प्रोजेक्ट्स की मांग भी तेजी से बढ़ती है.
राजनगर एक्सटेंशन पहले ही NCR के तेजी से विकसित हो रहे रियल एस्टेट कॉरिडोर में शामिल हो चुका है. दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे, हिंडन एयरपोर्ट और बेहतर रोड नेटवर्क ने इसकी कनेक्टिविटी को मजबूत बनाया है. अब क्रिकेट स्टेडियम जैसे प्रोजेक्ट इस क्षेत्र को नई वैल्यू देने का काम कर सकते हैं.

एयरोसिटी प्रोजेक्ट में लैंड पूलिंग पॉलिसी
सबसे अहम फैसला राजनगर एक्सटेंशन के पास प्रस्तावित एयरोसिटी परियोजना को लेकर लिया गया. इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट के तहत मोरटा, अटौर और मेवला अगरी गांवों की करीब 200 हेक्टेयर जमीन को शामिल किया जाएगा. खास बात यह है कि यहां पहली बार लैंड पूलिंग नीति लागू की जाएगी, जिसके तहत किसानों की जमीन विकसित कर उन्हें उसका निर्धारित हिस्सा वापस दिया जाएगा.
प्रतीक ग्रुप के एमडी प्रतीक तिवारी का कहना है आज का होमबायर केवल फ्लैट नहीं खरीद रहा, बल्कि वह ऐसी लोकेशन तलाश रहा है जहां भविष्य में बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, लाइफस्टाइल और मजबूत कनेक्टिविटी मिले. गाजियाबाद में जिस तरह मेट्रो, एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट और स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित हो रहा है, उससे आने वाले वर्षों में यहां प्रॉपर्टी की मांग और वैल्यू दोनों तेजी से बढ़ सकती हैं. सिद्धार्थ विहार जैसे लोकेशन अब प्रीमियम लिविंग के नए सेंटर बनते जा रहे हैं, जहां लोग सिर्फ रहने के लिए नहीं, बल्कि बेहतर भविष्य के लिए निवेश कर रहे हैं.
इंटीग्रेटेड टाउनशिप की तैयारी में GDA
दूसरी ओर हरनंदीपुरम योजना का दूसरा चरण भी इस शहर के भविष्य को नई दिशा देता दिखाई दे रहा है. GDA यहां बड़े स्तर पर इंटीग्रेटेड टाउनशिप विकसित करने की तैयारी में है. चौड़ी सड़कें, हरित क्षेत्र, स्कूल, हेल्थकेयर और कमर्शियल स्पेस जैसी आधुनिक सुविधाओं के साथ यह क्षेत्र आने वाले समय में संगठित शहरी विकास का बड़ा केंद्र बन सकता है.
गुलशन ग्रुप के डायरेक्टर दीपक कपूर का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में NCR के उभरते रिहायशी इलाकों को लेकर खरीदारों की सोच में बड़ा बदलाव देखने को मिला है. अब फोकस सिर्फ कीमत बढ़ने की संभावना तक सीमित नहीं रहा. घर खरीदार अब बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और लंबे समय की शहरी विकास संभावनाओं वाले इंटीग्रेटेड माहौल को प्राथमिकता दे रहे हैं.
कहां कौन से प्रोजेक्ट विकसित हो रहे हैं?
वेव सिटी, गाजियाबाद में आगामी प्रीमियम रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट भी इसी बदलती उम्मीद को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है, जहां खरीदार अब ऐसी परियोजनाओं को ज्यादा पसंद कर रहे हैं जो बेहतर लोकेशन के साथ हाई-एंड लाइफस्टाइल का अनुभव भी दें. गाजियाबाद में जिस तरह नई टाउनशिप और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स आगे बढ़ रहे हैं, उससे यह शहर एंड-यूजर्स और निवेशकों दोनों के लिए मजबूत विकल्प बन रहा है.
सिद्धार्थ विहार, इंदिरापुरम, वैशाली, वसुंधरा जैसे इलाके भी तेजी से हाई-डिमांड माइक्रो मार्केट में बदल रहे हैं. नोएडा और पूर्वी दिल्ली के करीब होने के कारण यहां नौकरीपेशा परिवारों और आईटी प्रोफेशनल्स की रुचि लगातार बढ़ रही है. वहीं वैशाली गोकुलपुरी मेट्रो कॉरिडोर परियोजना से ट्रांस-हिंडन क्षेत्र की कनेक्टिविटी और मजबूत होगी, जिसका सीधा असर प्रॉपर्टी की कीमतों और मांग पर देखने को मिल सकता है.
वेव सिटी का स्मार्ट सिटी मॉडल भी गाजियाबाद को नई पहचान दिला रहा है. ओपन ग्रीन स्पेस, स्मार्ट ट्रैफिक सिस्टम और बेहतर शहरी प्लानिंग के कारण यह क्षेत्र नई पीढ़ी के खरीदारों को आकर्षित कर रहा है. एनएच-9 और दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे की मजबूत कनेक्टिविटी ने यहां से दिल्ली, नोएडा और मेरठ तक का सफर आसान बना दिया है.

किन इलाकों में बढ़ सकती है प्रॉपर्टी डिमांड?
साया ग्रुप के फाउंडर और चेयरमैन विकास भसीन का कहना है कि गाजियाबाद अब केवल किफायती हाउसिंग मार्केट नहीं रह गया है, बल्कि यह तेजी से एक आधुनिक और इंफ्रास्ट्रक्चर आधारित रियल एस्टेट डेस्टिनेशन के रूप में उभर रहा है. अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम, मेट्रो विस्तार, नई टाउनशिप और बेहतर कनेक्टिविटी जैसी परियोजनाएं इस शहर को नई पहचान दे रही हैं. आने वाले वर्षों में राजनगर एक्सटेंशन, सिद्धार्थ विहार और ट्रांस-हिंडन क्षेत्र में आवासीय और कमर्शियल प्रॉपर्टी की मांग में मजबूत बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है.
हिंडन सिविल एयरपोर्ट का विस्तार भी गाजियाबाद की आर्थिक गतिविधियों को नई गति दे रहा है. क्षेत्रीय उड़ानों में बढ़ोतरी और बेहतर एयर कनेक्टिविटी से कॉर्पोरेट और बिजनेस गतिविधियां बढ़ रही हैं, जिसका सीधा लाभ स्थानीय रियल एस्टेट बाजार को मिल सकता है.
रियल एस्टेट के जानकारों का मानना है कि गाजियाबाद अब केवल NCR का विस्तार नहीं, बल्कि खुद एक मजबूत और भविष्य-केंद्रित रियल एस्टेट डेस्टिनेशन बनकर उभर रहा है. आने वाले वर्षों में राजनगर एक्सटेंशन, हरनंदीपुरम, सिद्धार्थ विहार, वेव सिटी और वैशाली जैसे क्षेत्रों में प्रॉपर्टी की मांग और कीमतों में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है.
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