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हर सेकंड ₹2.5 लाख का मुनाफा कमा रही दुनिया की ये 6 तेल कंपनियां, आम आदमी महंगाई से बेहाल, रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

ऑक्सफैम की रिपोर्ट के अनुसार, 6 दिग्गज फॉसिल फ्यूल कंपनियां साल 2026 में $94 बिलियन का कुल मुनाफा कमा सकती हैं. यह मुनाफा ऐसे समय में हो रहा है जब दुनिया महंगाई और ऊर्जा संकट से जूझ रही है.

हर सेकंड ₹2.5 लाख का मुनाफा कमा रही दुनिया की ये 6 तेल कंपनियां, आम आदमी महंगाई से बेहाल, रिपोर्ट में बड़ा खुलासा
Fossil Fuel Profits: जानें कैसे आम आदमी महंगाई से जूझ रहा है और कंपनियां रिकॉर्ड तोड़ कमाई कर रही हैं

एक तरफ जहां दुनिया भर में आम लोग महंगाई और बिजली-ईंधन के बढ़ते बिलों और खाने-पीने की चीजों के दाम से परेशान हैं, वहीं दूसरी तरफ तेल और गैस बेचने वाली दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियां अंधाधुंध कमाई कर रही हैं. ऑक्सफैम (Oxfam) की एक ताजा रिपोर्ट ने चौंकाने वाला खुलासा किया है कि दुनिया की 6 दिग्गज कंपनियां हर सेकंड लाखों रुपये का मुनाफा कूट रही हैं. यह कमाई तब हो रही है जब आम परिवार अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए मुश्किलों का सामना कर रहे हैं. आइए जानते हैं क्या कहती है यह पूरी रिपोर्ट और इन कंपनियों के मुनाफे का गणित क्या है....

हर सेकंड $3,000 की कमाई 

ऑक्सफैम की नई रिसर्च के मुताबिक, साल 2026 में दुनिया की छह सबसे बड़ी फॉसिल फ्यूल (Fossil Fuel) कंपनियां हर एक सेकंड में $2,967 यानी करीब ₹2.5 लाख का मुनाफा कमाने वाली हैं. कोलंबिया के सांता मार्टा में होने वाली 'ट्रांजिशनिंग अवे फ्रॉम फॉसिल फ्यूल्स' कॉन्फ्रेंस से पहले आई यह रिपोर्ट बताती है कि इन कंपनियों की चांदी हो रही है. इनमें शेवरॉन (Chevron), शेल (Shell), बीपी (BP), कोनोकोफिलिप्स (ConocoPhillips), एक्सॉन (Exxon) और टोटल एनर्जीज (TotalEnergies) जैसी दिग्गज कंपनियां शामिल हैं.

रोजाना ₹300 करोड़ से ज्यादा का इजाफा 

रिपोर्ट के अनुसार, इन छह कंपनियों का साल 2025 के मुकाबले साल 2026 में मुनाफा रोजाना $37 मिलियन यानी करीब ₹310 करोड़) बढ़ने वाला है. साल 2026 में इनका कुल अनुमानित मुनाफा $94 बिलियन होगा. यह रकम इतनी बड़ी है कि इससे अफ्रीका के लगभग 5 करोड़ लोगों की सौर ऊर्जा (Solar Power) की जरूरतों को आसानी से पूरा किया जा सकता है.

सुपर-रिच लोगों की संपत्ति में उछाल

एक तरफ मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध और जियोपॉलिटिकल अस्थिरता की वजह से दुनिया भर के परिवार एनर्जी पॉवर्टी यानी ऊर्जा की कमी की ओर धकेले जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ सुपर-रिच लोगों की संपत्ति तेजी से बढ़ रही है. रिपोर्ट कहती है कि इन तेल कंपनियों के मुनाफे का एक बहुत बड़ा हिस्सा दुनिया के सबसे अमीर 1% लोगों की जेब में जा रहा है, जो मुख्य रूप से ग्लोबल नॉर्थ यानी विकसित देशों में रहते हैं.

क्लीन एनर्जी से पीछे हट रही कंपनियां

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि ये कंपनियां क्लाइमेट डिस्ट्रेक्शन से फायदा कमा रही हैं. पिछले महीने ही एक्सॉन मोबिल (ExxonMobil) ने 'लो-कार्बन एनर्जी' प्रोजेक्ट्स में अपने निवेश को एक-तिहाई कम करने का एलान किया है. वहीं, टोटल एनर्जीज (TotalEnergies) ने 'नेट जीरो' ट्रांजिशन प्लान को अपनाने से इनकार कर दिया है, जो दुनिया के तापमान को 1.5 डिग्री तक सीमित रखने के लिए जरूरी है.

तेल कंपनियों के मुनाफे पर टैक्स बढ़ाने की मांग

ऑक्सफैम ने सात देशों में पोलिंग कराई, जिसमें पता चला कि ज्यादातर लोग अब बदलाव चाहते हैं. करीब 68 प्रतिशत लोगों का मानना है कि बड़ी तेल और गैस कंपनियों के मुनाफे पर टैक्स बढ़ाया जाना चाहिए. इस पैसे का इस्तेमाल 'रिन्यूएबल एनर्जी' (Renewable Energy) यानी अक्षय ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए होना चाहिए. लोग अब जीवाश्म ईंधन के बजाय साफ-सुथरी ऊर्जा में सरकारी निवेश को तीन गुना ज्यादा सपोर्ट कर रहे हैं.

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