प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना को मंजूरी दे दी है. इस योजना के तहत देशभर के जलाशयों और औद्योगिक तालाबों पर 5,000 मेगावाट क्षमता के फ्लोटिंग सोलर प्लांट लगाए जाएंगे. इस महत्वाकांक्षी योजना पर 5,070 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे. देश में फिलहाल फ्लोटिंग सोलर क्षमता करीब 700 मेगावाट है. सरकार का लक्ष्य इसे बढ़ाकर लगभग 5,700 मेगावाट तक पहुंचाना है. योजना का लाभ सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को मिलेगा.
हर परियोजना के साथ होगा बिजली भंडारण का इंतजाम
योजना के तहत वर्ष 2026-27 से 2030-31 के दौरान विभिन्न परियोजनाओं को मंजूरी दी जाएगी. हर फ्लोटिंग सोलर परियोजना के साथ कम से कम दो घंटे की क्षमता वाला एनर्जी स्टोरेज सिस्टम भी लगाया जाएगा. इससे जरूरत के समय बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित होगी और पावर ग्रिड पहले से अधिक मजबूत और भरोसेमंद बनेगा.
केंद्र सरकार सफलतापूर्वक पूरी होने वाली परियोजनाओं के लिए प्रति मेगावाट एक करोड़ रुपये तक की सहायता देगी. वहीं प्रारंभिक सर्वे और व्यवहार्यता अध्ययन के लिए प्रति परियोजना 50 लाख रुपये तक की वित्तीय मदद भी उपलब्ध कराई जाएगी.
जमीन की बचत के साथ रोजगार को भी मिलेगा बढ़ावा
फ्लोटिंग सोलर परियोजनाओं की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इनके लिए अतिरिक्त जमीन की जरूरत नहीं होगी. जलाशयों और औद्योगिक तालाबों का उपयोग होने से भूमि पर दबाव कम होगा और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग संभव हो सकेगा.
सरकार का अनुमान है कि इस योजना से हर साल करीब एक करोड़ टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन कम होगा. इसके साथ ही 16,000 से 17,000 लोगों के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है. सोलर पैनल, मॉड्यूल, फ्लोटिंग सिस्टम और बैटरी जैसे उपकरणों के घरेलू निर्माण को भी बढ़ावा मिलेगा.
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना अक्षय ऊर्जा क्षमता बढ़ाने, जल संसाधनों के बेहतर उपयोग और विकसित भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी.
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