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बड़ी राहत: व्‍यापारियों के लिए सरकार ने RELIEF स्‍कीम की अवधि बढ़ाई, विदेश माल भेजने की टेंशन दूर, ऐसे मिलेगा फायदा  

सरकार ने व्‍यापारियों को 2-2 स्‍कीम पर बड़ी राहत दी है. एक्‍सपोर्ट करने वाले देशभर के व्‍यापारियों को इसका फायदा मिलेगा. क्‍या है दोनों स्‍कीम और कैसे मिलेगा फायदा, पूरी डिटेल अंदर है.

बड़ी राहत: व्‍यापारियों के लिए सरकार ने RELIEF स्‍कीम की अवधि बढ़ाई, विदेश माल भेजने की टेंशन दूर, ऐसे मिलेगा फायदा  
सरकार ने व्‍यापारियों को दी राहत
Source: NDTV Graphics/Canva

पश्चिम एशिया में चल रहे जियो-पॉलिटिकल टेंशन और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी अनिश्चितताओं के बीच सरकार ने व्‍यापारियों को राहत देने के लिए दो अहम एक्सपोर्ट स्कीम की समयसीमा बढ़ा दी है. सरकार ने RELIEF स्कीम के एक कंपोनेंट और RoDTEP स्कीम की अवधि बढ़ाने का फैसला किया है.

कॉमर्स व इंडस्ट्री मंत्रालय के मुताबिक, इन कदमों का मकसद बढ़ती शिपिंग लागत, इंश्योरेंस प्रीमियम और युद्ध से जुड़े एक्सपोर्ट रिस्क के बीच भारतीय एक्सपोर्टर्स को सपोर्ट देना और ट्रेड फ्लो बनाए रखना है.

RELIEF Scheme में क्या बदला?

डिपार्टमेंट ऑफ कॉमर्स ने RELIEF स्‍कीम (Resilience & Logistics Intervention for Export Facilitation) के कॉम्‍पोनेंट II की डेडलाइन बढ़ाई है.

ये एक्‍सपोर्ट प्रोमोशन मिशन के तहत शुरू किया गया एक समयबद्ध उपाय है. इसका मकसद खास क्षेत्रों में होने वाले आगामी एक्सपोर्ट शिपमेंट के लिए एक्सपोर्टर्स को ECGC कवर लेने के लिए प्रोत्साहित करना है.

इसमें 95% तक रिस्क कवरेज उपलब्ध है.

कॉम्‍पोनेंट II के तहत 16 मार्च 2026 या उसके बाद ली गई स्‍टैंड अलोन पॉलिसी या व्‍होल टर्नओवर पॉलिसी पात्र होंगी.

किन शिपमेंट को मिलेगा फायदा?

इस कंपोनेंट के तहत कई तरह के कार्गो को शामिल किया गया है. इनमें:

  • FCL यानी फुल कंटेनर लोड (Full Container Load)
  • LCL यानी लेस दैन कंटेनर लोड (Less than Container Load )
  • रीफर कंटेनर्स (Reefer Containers)

हालांकि, एनर्जी शिपमेंट्स को इससे बाहर रखा गया है.

सरकार के मुताबिक, पात्र अवधि के दौरान एक्सपोर्टर्स की ओर से भुगतान किए जाने वाले प्रीमियम को संकट से पहले के स्तर से ज्यादा नहीं बढ़ाया जाएगा.

19 मार्च को लॉन्च हुई थी RELIEF स्‍कीम

RELIEF स्कीम को सरकार ने 19 मार्च को लॉन्च किया था. इसका मकसद Gulf और व्यापक West Asia Maritime Corridor में व्यवधान के कारण प्रभावित भारतीय एक्सपोर्टर्स को सपोर्ट देना था.

इन व्यवधानों के चलते एक्सपोर्टर्स को ज्यादा फ्रेट कॉस्ट, बढ़े हुए इंश्योरेंस प्रीमियम और युद्ध से जुड़े एक्सपोर्ट रिस्क का सामना करना पड़ रहा था.

सरकार के मुताबिक, Component II की समयसीमा बढ़ाने से मौजूदा भू-राजनीतिक और लॉजिस्टिक्स अनिश्चितताओं के बीच एक्सपोर्ट सेक्टर की मजबूती और ट्रेड फ्लो को बनाए रखने में मदद मिलेगी.

RoDTEP स्‍कीम की अवधि भी बढ़ी

इसके अलावा सरकार ने RoDTEP यानी Remission of Duties and Taxes on Exported Products स्कीम की अवधि भी बढ़ा दी है. अब ये स्कीम 31 दिसंबर तक जारी रहेगी.

इसका फायदा इन एक्सपोर्टर्स को मिलता रहेगा:

डोमेस्टिक टैरिफ एरिया यूनिट्स (Domestic Tariff Area Units)
एडवांस ऑथोराइजेशन होल्‍डर्स (Advance Authorisation Holders)
स्‍पेशल इकोनॉमिक जोन यूनिट्स (Special Economic Zone Units)
एक्‍सपोर्ट ऑरिएंटेड यूनिट्स (Export Oriented Units)

RoDTEP में क्या मिलता है?

RoDTEP के तहत एक्सपोर्ट किए गए प्रोडक्ट्स पर लगे ऐसे केंद्रीय, राज्य और स्थानीय शुल्क, टैक्‍स और लेवी वापस किए जाते हैं, जिनका रिफंड या रिबेट किसी दूसरे तरीके से नहीं मिलता.

इसमें पिछले चरणों में जमा हुए अप्रत्यक्ष टैक्‍स भी शामिल हैं.

सरकार ने साफ किया है कि 30 सितंबर को लागू RoDTEP Rates और Value Caps ही इस बढ़ाई गई अवधि के दौरान भी जारी रहेंगे. यानी मौजूदा दरों और वैल्यू कैप में कोई बदलाव नहीं किया गया है.

एक्सपोर्टर्स को क्या फायदे होंगे?

सरकार के मुताबिक, इन उपायों से भारतीय एक्सपोर्टर्स को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले लेवल प्लेइंग फील्ड बनाने में मदद मिलेगी. पश्चिम एशिया में जियो-पॉलिटिकल टेंशन और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी अनिश्चितता जारी रहने के बीच सरकार का फोकस एक्सपोर्टर्स की लागत और जोखिम को कम करने के साथ भारत से एक्सपोर्ट के फ्लो को बनाए रखने पर है.

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