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Explainer: हवाई किराए पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, नियम नहीं मानने वाली एयरलाइंस को ग्राउंड करने की बात; क्या बदलेगा?

किराए में अचानक और असामान्य बढ़ोतरी पर निगरानी बढ़ सकती है. अतिरिक्त शुल्क पर ज्यादा स्पष्टता आ सकती है. बैगेज चार्ज और दूसरे सहायक शुल्कों के लिए नियम अधिक स्पष्ट किए जा सकते हैं. साथ ही शिकायत और रिफंड व्यवस्था मजबूत हो सकती है.

Explainer: हवाई किराए पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, नियम नहीं मानने वाली एयरलाइंस को ग्राउंड करने की बात; क्या बदलेगा?
SC ने की हवाई किराया नियम को नहीं मानने वाले एयरलाइंस को ग्राउंड करने की बात
PTI
  • नियमों, सरकारी निर्देशों को नहीं मानने वाली एयरलाइंस को ग्राउंडिंग जैसी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है.
  • केंद्र एयरफेयर, सर्ज प्राइसिंग और अतिरिक्त बैगेज शुल्क के नए नियम तैयार कर रहा है.
  • किराए में अचानक वृद्धि, अतिरिक्त शुल्क, रिफंड और शिकायतों पर स्पष्ट नियम और एयरलाइंस की जवाबदेही बढ़ सकती है.

हवाई टिकट के बढ़ते किराए और एयरलाइंस की कीमत तय करने की व्यवस्था पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है. जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि अगर एयरलाइंस सरकार के हवाई किराए से जुड़े निर्देशों का पालन नहीं कर रही हैं, तो उन्हें ग्राउंड किया जाना चाहिए. यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब केंद्र सरकार एयरफेयर, सर्ज प्राइसिंग और अतिरिक्त बैगेज शुल्क को लेकर नए नियम तैयार कर रही है. लेकिन यहां एक बात स्पष्ट रूप से समझना जरूरी है कि देश की सर्वोच्च अदालत ने अभी किसी भी एयरलाइन पर सीधे तौर पर कार्रवाई का कोई आदेश नहीं दिया है. कोर्ट ने सरकार से कहा है कि जो एयरलाइंस मौजूदा निर्देशों का पालन नहीं करतीं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए. यानी यह टिप्पणी नियामकीय नियमों के पालन को लेकर अदालत की गंभीर चिंता दिखाती है.

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सर्वोच्च न्यायालय

मामला शुरू कैसे हुआ?

समाचार पत्रिका बिजनेस टुडे के मुताबिक यह मामला सामाजिक कार्यकर्ता एस लक्ष्मीनारायण की याचिका से जुड़ा है. याचिका में आरोप लगाया गया है कि निजी एयरलाइंस खासकर त्योहारों और छुट्टियों जैसे ज्यादा मांग वाले समय में मनमाने तरीके से किराए बढ़ाती हैं. याचिका में एयरफेयर तय करने के लिए स्पष्ट और बाध्यकारी नियम, सर्ज प्राइसिंग पर नियंत्रण, बैगेज और दूसरे अतिरिक्त शुल्क को विनियमित करने तथा टिकट कैंसिलेशन और रिफंड के लिए समान नियमों की मांग की गई है.

मई में भी सुप्रीम कोर्ट ने हवाई किराए में अंतर को लेकर चिंता जताई थी. कोर्ट ने उदाहरण देते हुए कहा था कि एक ही दिन और एक ही रूट पर अलग-अलग एयरलाइंस की इकोनॉमी क्लास टिकट की कीमतों में काफी अंतर हो सकता है और किराए में कुछ तार्किकता होनी चाहिए.

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सरकार क्या कर रही है?

केंद्र ने सोमवार को कोर्ट को बताया कि भारतीय वायुयान अधिनियम, 2024 के तहत हवाई किराए से जुड़े नियम बनाने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है. सरकार के मुताबिक प्रस्तावित नियमों में एयरफेयर, सर्ज प्राइसिंग और अतिरिक्त बैगेज शुल्क जैसे मुद्दे शामिल हैं. सरकार ने ड्राफ्ट नियम कोर्ट के सामने सीलबंद कवर में रखे हैं और कहा है कि अंतिम नियम तैयार करने में करीब तीन हफ्ते लगेंगे. इस मामले की अगली सुनवाई 7 सितंबर को होगी.

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यात्रियों के लिए इसका क्या मतलब है?

अगर प्रस्तावित नियम प्रभावी और स्पष्ट तरीके से लागू होते हैं, तो लॉ बीट के मुताबिक यात्रियों के लिए तीन बड़े बदलाव संभव हैं.

पहला, किराए में अचानक और असामान्य बढ़ोतरी पर निगरानी बढ़ सकती है. खासकर उन स्थितियों में जहां मांग बढ़ने के कारण टिकट की कीमत बहुत तेजी से ऊपर जाती है.

दूसरा, अतिरिक्त शुल्क पर ज्यादा स्पष्टता आ सकती है. बैगेज चार्ज और दूसरे सहायक शुल्कों के लिए नियम अधिक स्पष्ट किए जा सकते हैं.

तीसरा, शिकायत और रिफंड व्यवस्था मजबूत हो सकती है. याचिका में टिकट कैंसिलेशन, रिफंड और यात्रियों की शिकायतों के लिए भी स्पष्ट व्यवस्था की मांग की गई है.

American Airlines

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शिकायतों में भी हुआ बड़ा इजाफा

सरकार की ओर से अदालत में बताए गए आंकड़ों के मुताबिक, एयरसेवा पोर्टल पर टिकट, किराया और रिफंड से जुड़ी शिकायतें 2024 में 5369 थीं. 2025 में यह संख्या बढ़कर 10,804 हो गईं. यानी इसमें 100 फीसद से भी अधिक का इजाफा हुआ.

बैगेज से जुड़ी शिकायतें भी 2024 के 3,043 से बढ़कर 2025 में 3,596 हो गईं, जो करीब 18.2 फीसदी की वृद्धि है.

ये आंकड़े बताते हैं कि विवाद टिकट की कीमत तक ही सीमित नहीं है. यात्रियों की परेशानी में रिफंड, बैगेज और अन्य शुल्क भी शामिल हैं.

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क्या अब एयरलाइंस मनमाना किराया नहीं बढ़ा पाएंगी?

फिलहाल ऐसा कहना जल्दबाजी होगी. सुप्रीम कोर्ट ने अभी हवाई किराए की कोई निश्चित अधिकतम सीमा तय नहीं की है और न ही हर तरह की कीमत बढ़ोतरी पर रोक लगाई है.

असल बदलाव तब आएगा जब केंद्र नए नियमों को अंतिम रूप देकर लागू करेगा और यह स्पष्ट होगा कि एयरलाइंस को किराया तय करते समय किन नियमों का पालन करना होगा.

यही वजह है कि 7 सितंबर की अगली सुनवाई महत्वपूर्ण होगी. उस समय कोर्ट के सामने अंतिम नियामकीय ढांचा और उसकी निगरानी की व्यवस्था ज्यादा स्पष्ट हो सकती है.

DGCA Fine Air India

रेगुलेटर कौन है और कितना ताकतवर?

सुप्रीम कोर्ट ने ड्राफ्ट नियम देखने के बाद प्रस्तावित रेगुलेटरी व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाया और संकेत दिया कि स्वतंत्र रेगुलेटर की भूमिका अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है. याचिका में भी यात्रियों के हितों की रक्षा के लिए मजबूत और स्वतंत्र एविएशन रेगुलेटर की मांग की गई है. इसलिए आने वाले बदलाव का असली असर सिर्फ यह नहीं होगा कि टिकट कितना महंगा होगा. बड़ा सवाल यह होगा कि किराया तय करने की प्रक्रिया कितनी पारदर्शी होगी, नियम तोड़ने पर कार्रवाई कौन करेगा और यात्री अपनी शिकायत का समाधान कितनी जल्दी पा सकेंगे.

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