इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम (EBP) न केवल प्रदूषण कम करने का एक जरिया है, बल्कि ये देश के कृषि क्षेत्र और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए गेम-चेंजर साबित हो रहा है. ये दावा है, केंद्र सरकार का. केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी भी कई बार कह चुके हैं कि E20 ईंधन (20% इथेनॉल मिक्स पेट्रोल) के लक्ष्य को पूरा करने के लिए बड़े पैमाने पर इथेनॉल की जरूरत है, जिसका सीधा फायदा हमारे किसानों को मिल रहा है. इससे किसानों की आय भी बढ़ रही है.
गन्ना किसानों की बढ़ेगी आय
इथेनॉल का सबसे प्रमुख स्रोत गन्ना और उसका को-प्राॅडक्ट (मैसेस) है. पहले चीनी का उत्पादन अधिक होने पर बाजार में दाम गिर जाते थे और चीनी मिलें किसानों का भुगतान समय पर नहीं कर पाती थीं. अब चीनी मिलें अतिरिक्त गन्ने के रस और शीरे का इस्तेमाल इथेनॉल बनाने में कर रही हैं. इससे मिलों की नकदी स्थिति सुधरी है, जिससे गन्ना किसानों को उनकी फसल का सही दाम और समय पर भुगतान (बकाया राशि) मिलना सुनिश्चित हुआ है.
मक्का और खराब अनाज की मांग में भारी उछाल
इथेनॉल सिर्फ गन्ने से नहीं, बल्कि मक्का (Maize) और टूटे या खराब हो चुके चावल जैसे अनाजों से भी भारी मात्रा में बनाया जा रहा है. इससे मक्का उगाने वाले किसानों को एक नया और पक्का खरीदार मिल गया है. जिन अनाजों को पहले कौड़ियों के भाव बेचना पड़ता था या जो गोदामों में सड़ जाते थे, अब उनका इस्तेमाल ग्रीन फ्यूल बनाने में हो रहा है. इससे मक्के की बाजार कीमत बढ़ी है और किसानों का मुनाफा कई गुना बढ़ गया है.
ग्रामीण भारत में रोजगार की बहार
देशभर के ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में सैकड़ों नए इथेनॉल प्लांट स्थापित किए जा रहे हैं. इन बायो-रिफाइनरियों के आने से ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा हो रहे हैं. प्लांट में काम करने वाले इंजीनियर्स से लेकर, अनाज और गन्ने की ढुलाई करने वाले स्थानीय ट्रांसपोर्टर्स और मजदूरों तक, हर स्तर पर आर्थिक गतिविधि तेज हुई है.
मजबूत होगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था
जब देश के अन्नदाता की जेब में पैसा आएगा, तो ग्रामीण बाजारों में मांग बढ़ेगी. केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी के मुताबिक, E20 नीति के कारण हर साल हजारों करोड़ रुपये जो कच्चे तेल के आयात के लिए विदेशों में जाते थे, अब वह पैसा देश के भीतर रहकर हमारे किसानों और स्थानीय उद्योगों के पास जा रहा है. सीधे शब्दों में कहें तो, E20 ईंधन भारत के गांवों को आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है.
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