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E20 पेट्रोल से माइलेज या इंजन पर होगा असर? सरकार ने फैक्ट चेक कर बता दिया पूरा सच

E20 पेट्रोल को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ा स्पष्टीकरण जारी किया है. MoPNG ने पुराने वाहनों को नुकसान, माइलेज में भारी गिरावट और इंजन खराब होने के दावों को भ्रामक बताया. जानिए सरकार ने क्या कहा.

E20 पेट्रोल से माइलेज या इंजन पर होगा असर? सरकार ने फैक्ट चेक कर बता दिया पूरा सच

केंद्र सरकार ने इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल (EBP) प्रोग्राम को लेकर सोशल मीडिया और कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में किए जा रहे दावों पर स्पष्टीकरण जारी किया है. सरकार ने कहा है कि E20 पेट्रोल को लेकर फैलाए जा रहे कई दावे भ्रामक हैं और इनके सपोर्ट में कोई तकनीकी या वैज्ञानिक प्रमाण नहीं हैं. पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय (MoPNG) का कहना है कि E20 ईंधन को लागू करने से पहले वर्षों तक साइंटिफिक टेस्टिंग, फील्ड ट्रायल, ऑटोमोबाइल कंपनियों और तकनीकी संस्थानों के साथ व्यापक चर्चा की गई थी. मंत्रालय के मुताबिक अब तक ऐसा कोई वेरिफाइड मामला सामने नहीं आया है, जिसमें E20 पेट्रोल की वजह से बड़े पैमाने पर इंजन खराब होने या वाहन फेल होने की पुष्टि हुई हो.

चरणबद्ध तरीके से लागू किया गया E20 कार्यक्रम

मंत्रालय के अनुसार भारत में एथेनॉल मिश्रण को धीरे-धीरे बढ़ाया गया है. वर्ष 2013-14 में पेट्रोल में औसतन 1.53 प्रतिशत एथेनॉल मिलाया जाता था. यह बढ़कर 2020-21 में 8.1 प्रतिशत, 2021-22 में 10 प्रतिशत, 2022-23 में 12 प्रतिशत, 2023-24 में 14.6 प्रतिशत और 2024-25 में 19.2 प्रतिशत तक पहुंच गया. वहीं नवंबर 2025 से जून 2026 के दौरान औसत मिश्रण 20 प्रतिशत दर्ज किया गया.

सरकार ने बताया कि Ethanol Blended Petrol Programme की शुरुआत वर्ष 2001 में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में हुई थी और 2006 में E5 पेट्रोल पेश किया गया. मंत्रालय ने यह भी कहा कि ब्राजील सहित कई देशों में दशकों से इससे भी अधिक एथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन का इस्तेमाल किया जा रहा है.

पुराने वाहनों को नुकसान के दावों पर सरकार का जवाब

सरकार ने उन दावों को भी खारिज किया है, जिनमें कहा जा रहा था कि वर्ष 2023 से पहले बने वाहन E20 पेट्रोल पर सुरक्षित तरीके से नहीं चल सकते.

मंत्रालय के मुताबिक भारत में पिछले साढ़े तीन वर्षों से E15 Plus और ढाई वर्षों से E19-E20 ईंधन का व्यापक उपयोग हो रहा है. इस दौरान कहीं भी बड़े स्तर पर इंजन खराब होने, वाहन बंद पड़ने या एथेनॉल मिश्रण से जुड़ी किसी बड़ी तकनीकी समस्या की पुष्टि नहीं हुई है. सरकार का कहना है कि अगर E20 वास्तव में बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा रहा होता, तो देशभर में लाखों वारंटी क्लेम, सर्विस कैंपेन और कंज्यूमर शिकायतें सामने आतीं, लेकिन ऐसा कोई रिकॉर्ड मौजूद नहीं है.

वाहन कंपनियों के आंकड़ों में भी नहीं मिला नुकसान

मंत्रालय ने बताया कि एक प्रमुख वाहन निर्माता ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान 2.84 करोड़ वाहनों की सर्विस की. इनमें लगभग 1.5 करोड़ ऐसे वाहन भी शामिल थे जिन्हें मूल रूप से E20 Compatible घोषित नहीं किया गया था. इसके बावजूद कंपनी को E20 की वजह से जंग, असामान्य घिसावट या किसी पुर्जे की उम्र कम होने का कोई प्रमाण नहीं मिला.

एक अन्य वाहन निर्माता ने 1.4 करोड़ वाहनों के आंकड़ों का स्टडी किया और वहां भी एथेनॉल की वजह से किसी तरह के जंग का कोई सबूत नहीं मिला. एक प्रमुख टू-व्हीलर निर्माता ने भी इसी तरह के नतीजे सामने रखे. मंत्रालय ने कहा कि वाहन निर्माता आज भी E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों की वारंटी का सम्मान कर रहे हैं, जो इस ईंधन पर उनके भरोसे को दर्शाता है.

लागू करने से पहले हुआ व्यापक वैज्ञानिक परीक्षण

सरकार के अनुसार E20 ईंधन लागू करने से पहले SIAM, ARAI, ऑटोमोबाइल कंपनियों, ऑटो पार्ट्स निर्माता, टेस्टिंग एजेंसियों और Oil Marketing Companies के साथ व्यापक टेस्ट और चर्चा की गई थी. इस दौरान इंजन कैलिब्रेशन, मैटेरियल कंपेटिबिलटी, ड्यूरेबिलिटी इमिशन, फ्यूल सिस्टम, ड्राइबिलिटी और वाहन की परफॉर्मेंस का वैज्ञानिक मूल्यांकन किया गया. ARAI ने भी पुष्टि की है कि E20 Compatible वाहन अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप टेस्टिंग के बाद ही बाजार में उतारे जाते हैं.

मंत्रालय ने बताया कि Oil Marketing Companies पूरे सप्लाई चेन में क्वालिटी की निगरानी करती हैं और देशभर में 30 हजार से अधिक पेट्रोल पंपों पर नियमित जांच की जाती है. भारत में सप्लाई होने वाला Ethanol Blended Petrol Bureau of Indian Standards (BIS) के मानकों के अनुरूप होता है.

30 करोड़ वाहन बेकार होने का दावा भी खारिज

सरकार ने उस दावे को भी गलत बताया जिसमें कहा गया था कि E20 पेट्रोल की वजह से देश के करीब 30 करोड़ वाहन बेकार हो जाएंगे. मंत्रालय के अनुसार 20 करोड़ से अधिक टू-व्हीलर और 3 करोड़ से ज्यादा पेट्रोल कारें पहले से E15 Plus और E20 ईंधन पर चल रही हैं. इसके बावजूद कहीं भी बड़े स्तर पर एथेनॉल मिश्रण से जुड़ी तकनीकी खराबियों की पुष्टि नहीं हुई है.

ऑटो कंपनियों ने भी जताया भरोसा

मंत्रालय ने बताया कि 4 जुलाई 2026 को पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय, भारी उद्योग मंत्रालय और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में Toyota Kirloskar, Maruti Suzuki, Hero MotoCorp, Hyundai Motor India, TVS Motor Company और Bajaj Auto के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी E20 कार्यक्रम का सपोर्ट किया.

इन कंपनियों का कहना था कि E20 पेट्रोल को बाजार में लाने से पहले व्यापक वैज्ञानिक टेस्ट किए गए थे. Maruti Suzuki ने अपने 2.84 करोड़ सर्विस रिकॉर्ड के आधार पर E20 से जंग या अतिरिक्त घिसावट का कोई प्रमाण नहीं मिलने की बात कही. Hero MotoCorp ने भी अपने दोपहिया वाहनों के आंकड़ों के आधार पर ऐसे ही निष्कर्ष शेयर किए.

माइलेज पर कितना असर पड़ता है?

मंत्रालय के अनुसार वाहन का माइलेज केवल ईंधन पर निर्भर नहीं करता, बल्कि ड्राइविंग स्टाइल, ट्रैफिक, टायर प्रेशर, वाहन की मेंटेनेंस और एयर कंडीशनर के इस्तेमाल जैसे कई अन्य फैक्टर्स पर भी निर्भर करता है. सरकार का कहना है कि पुराने E10 आधारित कुछ वाहनों में माइलेज में यदि कोई कमी आती भी है, तो वह सामान्यतः 3 से 5 प्रतिशत तक सीमित रहती है. सोशल मीडिया पर इससे कहीं ज्यादा कमी के जो दावे किए जा रहे हैं, वे तकनीकी तथ्यों से मेल नहीं खाते.

मंत्रालय ने यह भी कहा कि E20 पेट्रोल का ऑक्टेन स्तर अधिक होता है, जिससे बेहतर Anti-Knock कैपिसिटी, क्लीन कंबशन, स्मूद इंजन परफॉर्मेंस, बेहतर एक्सीलरेशन और बेहतर ड्राइविंग अनुभव मिलता है.

कंपनियों पर किसी तरह का दबाव नहीं

मंत्रालय ने इस आरोप को भी खारिज किया कि वाहन कंपनियों को E20 का सपोर्ट करने के लिए मजबूर किया जा रहा है. सरकार का कहना है कि ऑटोमोबाइल कंपनियां स्वतंत्र लिस्टेड कंपनियां हैं और कंज्यूमर के प्रति उनकी जिम्मेदारियां हैं. अगर E20 की वजह से बड़े स्तर पर वाहन खराब हो रहे होते तो कंपनियां इसे छिपा नहीं सकती थीं, क्योंकि इससे उन्हें वारंटी क्लेम, कानूनी कार्रवाई और प्रतिष्ठा को नुकसान का सामना करना पड़ता.

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